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आपको और आपके परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं https://ift.tt/bBLHKxU
22/10/2022

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14/10/2022

भगवन शिव ने हनुमान जी के रूप में अवतार लिया। आखिर क्यों,



भगवान शिव ने हनुमान जी के रूप में अवतार लिया था इस बात को कई बार पढ़ा और सुना होगा। लेकिन उन्होंने ऐसा क्यों किया था इस बात को जानने के लिए हमें इससे जुड़ी कहानी के बारे में जानना होगा। कहानी रामायण के प्रारंभ की है जब धरती पर श्री राम जी अवतार हुआ था।

शिव का अवतार हनुमान जी ही थे और यह सच भी है की भगवान राम ही शिव के हनुमान जी अवतार का कारण बने थे। रामायण में बताया गया है की एक बार भगवान शिव की भी इच्छा हुई थी की पृथ्वी लोक चलकर भगवान राम के दर्शन किये जाये। उस समय भगवान राम जी की उम्र 5 साल के आसपास रही होगी। भगवान शिव के सामने समस्या यह थी की वह अपने असली रूप में नहीं जा सकते थे। ऐसे में एक दिन शिव ने माता पार्वती से कहा -जानती हो पार्वती मेरे राम ने पृथ्वीपर जन्म लिया है और उनके दर्शन की सेवा का मन हुआ है। मेरी इच्छा है की अब में यहां से चला जाऊ और जिस लोक में राम है वही में भी रहुँ।

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यह सुनकर पार्वती विचलित हो गई और दुखी होकर बोली की हे स्वामी मुझसे ऐसी कोनसी गलती हो गई है आप यहां छोड़कर कर पृथ्वी लोक पर रहने जा रहे है। स्वामी आप जाते है तो जाइये लेकिन एक बात सुन लीजिये की आपके बिना में यहां जीवित नहीं रहूंगी।

पार्वती माता की बात सुनकर शिव को अहसास हुआ की पार्वती भी मेरे बिना नहीं रह सकती। और अगर यहां से गया तो निश्चित ही रूप से पार्वती अपने प्राण की बलि दे देगी। ऐसे में शिव मोह के एक चक्रव्यूह में फंस जाते है। क्यों की एक तरफ माता पार्वती जी के पास भी रहना था और दूसरी तरफ भगवान राम के लोक में भी जाना था।

ऐसे में भगवान शिव ने अपने ग्यारह रुद्रो का पूरा राज माता पार्वती को बताया और बोले -देखो पार्वती इन ग्यारह रुद्रो में से एक रूप वानर का अवतार आज में लेने वाला हूँ। एक रुद्रों में से आज एक रूप वानर होगा जो बाद में हनुमान के रूप जाना जायेगा। शास्त्र बताते है की भगवान शिव सब जानते थे शिव जी राम जी के पुरे जीवनकाल को देख पा रहे थे। वह जानते थे एक बार राम जी को पृथ्वी का कल्याण करने के लिए मेरी आवश्य्कता होगी। शिव को यह भी पता था की कलयुग में ना में नजर आऊंगा ना ही राम। तब कोई अवतार भी धरती पर नहीं होगा। इसलिए शिव ने अपने एक शक्तिशाली रूप को जन्म दिया जो कलयुग में भी अजर -अमर रहेगा और धरती लोक के लोगों के दुःख दर्द को दूर किया करेगा। इसलिए आज भी भक्त लोग हनुमान जी के दर्शन साक्षात् कर लेते है। इस बात के बहुत से मिल चुके है हनुमान जी आज भी धरती पर मौजूद है।

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भगवन शिव ने हनुमान जी के रूप में अवतार लिया। आखिर क्यों, https://ift.tt/TpXjsic
14/10/2022

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पुरे परिवार घर में जल्द बन जाएगा सुख शांति का वातावरण, करे छोटा सा उपाय https://ift.tt/phqTS7A
12/10/2022

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12/10/2022

पुरे परिवार घर में जल्द बन जाएगा सुख शांति का वातावरण, करे छोटा सा उपाय

पुरे परिवार घर में जल्द बन जाएगा सुख शांति का वातावरण, करे छोटा सा उपाय

हमारे पूर्वजों ने घर को मंदिर की संज्ञा देते हुए कहा है की जिस घर में परिवार के सभी लोग आपसी तालमेल से रहते है उस घर में सदैव सुख शांति बानी रहती है। कभी भी किसी की बुरी नजर नहीं लगती। लेकिन वही घर परिवार का वातावरण अनुकूल नहीं हो. तब वह प्रत्येक सदस्य के जीवन को प्रभावित करता है. अगर किसी के घर में किसी कारण से सुख -शांति नहीं है. तो घरेलु उपायों को आजमाकर आप हमेशा के लिए अपने घर में सुख-शांति बनाये रख सकते है।

1 घर में सुबह सुबह कुछ देर के लिए भक्ति गीत -भजन अवश्य करे।

2 घर में कभी भी झाड़ू को खड़ा करके ना रखे, उसे पैर ना लगाए,न ही उसके ऊपर से गुजरे अन्यथा घर में अलक्ष्मी निवास करने लगेगी।

3 अपने सोने के बिस्तर पर बैढ़कर भोजन ना करे ,ऐसा करने से बुरे सपने आते है ,या घर में दरिद्रता वास होने लगता है।

4 घर के मुख्य द्वार पर या इधर उधर जूते चम्पल उल्टे सीधे करके नहीं रखने चाहिए , इससे घर में अशांति उत्पन होने लगाती है।

5 अपने घर में पूजा-पाढ़ हमेशा सुबह 6 से 8 बजे के बीच भूमि पर कुश का आसान बिछाकर पूर्व या उत्तर दिशा की और मुंह करके रोज करे। ऐसा करने से सुख समृदि बनी रहेगी।

6 हमेशा घर में बनी हुई पहली रोटी गाय के लिए जरूर निकले।

7 अपने घर के पूजा स्थल सदैव पानी भरा कलश जरूर रखे।

8. पूजा में उपयोग होने वाली धुप आरती ,दीप,हवन की आग जैसे पवित्रता के प्रतीक साघनों को कभी भी अपने मुह से फूँक मारकर नही बुझाए।

9 घर के मुख्य दरवाजे पर दाहिनी तरफ सिंदूर से स्वस्तिक का चिन्ह बनाए ,एवं सूर्यास्त के समय हर रोज आंगन में लगे तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक अवश्य जलाया करे। इससे आपके घर में सदैव सुख-शांति का वातावरण बना रहेगा ,घर के सभी लोग मिल-जुलकर रहते है।

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बच्चों का पढ़ाई में मन लगाने के आसान उपाय https://ift.tt/BvlRk1j
11/10/2022

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11/10/2022

आँखों की कमजोरी के लक्षण

आंखों में दर्द रहना

आँखों में सूजन या लालिमा होना

आंखों को कई बार मलना

मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर देखते वक्त एक आंख बंद करके एक आंख से देखना या देखते देखते एक आंख बंद हो जाना खोलकर देखना

सिर में अक्सर दर्द रहना (सिर दर्द के अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिये डॉक्टर की सलाह अवश्य लें)

आंखों में तेज रोशनी लगने पर दर्द होना या बर्दाश्त न कर पाना

दूर या कुछ लोगों को पास की चीजें स्पष्ट नजर न आना

आई बॉल की गति में बदलाव होना

डबल विजन

आंखों का तिरछापन दिखना

आँखों में थकान रहना

आंखों के सामने अंधेरा छा जाना या धुंधला दिखना भी आँखों की कमजोरी के लक्षण हो सकते हैं।

आंख से पानी आना

आंखों का लाल होना

बच्चों की आँखे कमजोर होने के लक्षण

अगर बच्चा ब्लैकबोर्ड का या किताब पढ़ने में आँखे छोटी या बड़ी कर रहा है या गलत शब्द पढ़ रहा है। तब आपके बच्चे में आँखों की कमजोरी के लक्षण हो सकते हैं

अगर बच्चा धूप में निकलने के काफी देर बाद भी एक या दोनों आँखें बंद कर ले रहा है तो ऑंखें कमजोर होने के संकेत हो सकते हैं।

अक्सर बच्चे अपनी नज़र तिरछी या भेंगा करके देखते हैं, यह भी आँखों के कमजोर होने का लक्षण है।

अगर आपका बच्चा अपनी आँखें बार बार मलता है और आँखों में लालिमा दिखे तो समझ जाइये आपके बच्चे की आँखें कमजोर हो सकती हैं।

आँखे कमजोर होने के कारण

1. आँखों में ड्राईनेस आ जाना

आंख कमजोर होने के कारणों में सबसे मुख्य कारण है आंखों में ड्राईनेस आ जाना या आंखों का सूखापन। आंखों के सूखने के मुख्य कारण हैं रैग्यूलर कम्प्यूटर पर या मोबाइल पर काम करना। कम्प्यूटर या मोबाइल पर काम करते वक्त हमारी आंखों कम झपकती हैं जिसके कारण वह सूख जाती हैं।

2. आंखों पर सूरज की रोशनी कम पड़ना

सूरज की रोशनी हमारे शरीर के लिये जितनी आवश्यक हैं उतनी ही हमारी आंखों के लिये भी हैं। सूरज की रोशनी से विटामिन डी मिलता है जिससे हेल्दी इम्यून सिस्टम, ब्रेन और आंखें स्वस्थ रहती हैं। सूरज की किरणों से डोपाइन रिलीज होता है जो आंखों को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाता है। हालाँकि सीधे आँखों पर ज्यादा देर तक सूरज की रौशनी नहीं पड़नी चाहिए, इससे आँखें ख़राब हो सकती हैं।

3. महिलाओं में पीरियड्स समय से पहले बंद हो जाना

पीरिड्स महिलाओं के शरीर को स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कई महिलाओं में पीरियड्स सही समय पर यानी कि उचित उम्र में बंद होता है जबकि कुछ महिलाओं का समय से पहले ही बंद हो जाता है। जिसका असर उनकी आंखों पर पड़ सकता है। हालांकि इसमें कोई घबराने की बात नहीं है। आंखों की कमजोरी से बचने के लिये महिलाओं को अपने खानपान पर उचित ध्यान देना चाहिये।

4. शरीर में पानी की मात्रा कम होने पर

आप अगर पानी कम पीते हैं जिससे आपके शरीर में पानी की मात्रा कम हो जाती है तो इस कारण भी आंखें कमजोर हो जाती हैं। मानव शरीर में लगभग 60 प्रतिशत जल होना चाहिये। मस्तिष्क में 85 प्रतिशत जल होता है, रक्त में 79 प्रतिशत जल है तथा फेफड़ों में लगभग 80 प्रतिशत जल होता है। इसकी संख्या अगर कम ज्यादा हो जाती है तो इसका असर शरीर पर जरुर पड़ता है।

5. आंखों में अधरूनी चोट से आँखों की कमजोरी के लक्षण

अगर कभी खेलते हुए या किसी और वजह से आँखों में चोट लग गयी हो तब भी आँखों की कमजोरी के लक्षण कुछ समय बाद दिखने लगते हैं।आंख में अधरूनी चोट के कारण आंखों की रोशनी कम हो सकती है। ऐसा होने पर अपनी आंखों की जांच किसी अच्छे डॉक्टर से करानी चाहिये।

6. अनुवांशिक कारणों से आंखें कमजोर होना

आंखों की कमजोरी के कारण में एकअनुवांशिक कारण भी हो सकता है। विभिन्न शोध व चिकित्सकों के अनुसार अगर परिवार में किसी कारण से किसी भी व्यक्ति की आंखें कमजोर हैं, तो हो सकता है कि आपकी आंखें भी कमजोर हो जाए। हालांकि इस पर अभी और अधिक शोध की आवश्यकता है और यह कारण विशेष स्थिति में हो सकता है।

7. आंखों की कमजोरी के कारण शरीर में पोषक तत्वों की कमी से

शरीर में पोषक तत्वों की कमी के कारण विभिन्न समस्याएं व बीमारियां हो सकती हैं। इनमें से एक है आंखों का कमजोर होना। इससे बचने के लिये कोशिश करें कि आहार में सभी पोषक तत्वों को शामिल करें। खासतौर पर विटामिन ए जो आंखों को स्वस्थ रखने के लिए बहुत ही जरूरी पोषक तत्वों में से एक माना जाता है।

8. कंप्यूटर और मोबाइल का कम इस्तेमाल करें

लंबे समय तक बिना रुकावट या ब्रेक लिये कंप्यूटर और मोबाइल का इस्तेमाल करने से आंखें पर बुरा असर पड़ सकता है व आंखें कमजोर हो सकती है। इसलिए कोशिश करें कि कंप्यूटर या मोबाइल का इस्तेमाल करने के दौरान बीच-बीच में अपनी आंखों को रेस्ट दें। इससे आंखों को आराम मिलता है। स्क्रीन टाइम कम करने से आंखों को सुरक्षित रखने में मदद मिलती है।

9. धूम्रपान का सेवन

शराब और धूम्रपान का सेवन करने से आँखों की कमजोरी के लक्षण सामने आ सकते हैं। इससे आंखें कमजोर ही सकती हैं। इसलिए अगर आप अपनी आंखों के स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो शराब और धूम्रपान से दूरी बनाकर रखें।

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आँख की रोशनी बढ़ाने के घरेलू उपाय

आंखों की रोशनी बनाये रखने के लिये हमें सबसे ज्यादा अपने खानपान, उचित व्यायाम, शरीर में भरपूर पानी की मात्रा होने से हमारी आंखे तंदरुस्त रहेंगी। इस लेख में आपको कुछ ऐसे उपाय बताये जाएंगे जिससे आपकी आंखों की रोशनी बनी रहेगी।

आँखों की कमजोरी के लक्षण दिख रहे हैं तो आंख को दिनभर में कई बार ठण्डे पानी से धोना चाहिए। अगर आपका काम कम्प्यूटर पर करने वाला हो तब अवश्य ही यह प्रक्रिया करें। साथ ही कुछ घंटों तक काम करने के बाद कम से कम 15 मिनट तक आंखों को ब्रेक दें।

अगर आप धूल, प्रदूषण एवं तेज धूप में अधिक समय बिता रहे हैं तो आप में आँखों की कमजोरी के लक्षण दिख सकते हैं। इन सभी से आँखों को बचाना चाहिए, तेज धूप में जाते समय आँखों पर अच्छी गुणवत्ता वाले चश्मों का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि सूर्य की पराबैंगनी किरणें (UV rays) आँखों को नुकसान पहुँचाकर समस्याओं को उत्पन्न करती है।

अगर आपकी रात को देर तक या दिन में भी पढ़ने की आदत हो तो पढ़ते समय उजाले (रोशनी) का विशेष ध्यान दें। क्योंकि हल्की रोशनी में पढ़ने से आंखों पर दबाव पड़ता है जिससे आंखें खराब हो सकती हैं।

आंखों को तंदरुस्त बनाए रखने के लिये खाने में पोषक तत्वों का इस्तेमाल करें। खाने में आवश्यक विटामिन्स और मिनरल्स का उपयोग करें। जैसे – विटामिन सी, विटामिन ए और बीटा कैरोटिन से युक्त आहार, अखरोट, बादाम, पिस्ता, मूंगफली, शकरकंद, हरी पत्तेदार सब्जियाँ एवं दालों, ओमेगा-3 फैटी एसिड्स का उपयोग करें।

आंखों के लिये लाभदायक घरेलू नुस्खे

शहद के साथ ताजे आँवले का रस पीना आंखों के लिये फायदेमंद होता है।

आँखों की रोशनी बढ़ाने में बादाम-सौंफ, मिश्री का मिश्रण फायदेमंद होता है। इसके लिये बादाम, सौंफ और मिश्री को बराबर मात्रा में लेकर पीस लें। इस मिश्रण को दूध के साथ रात में सोने से पहले लें। 40 दिन तक लगातार इसका सेवन करें और इसे लेने के दो घंटे बाद तक पानी न पिएँ। इससे धीरे-धीरे आँखों की रोशनी बढ़ती है.

त्रिफला पाउडर से आंखों को फायदा मिल सकता है। त्रिफला के फायदे के लिये एक चम्मच त्रिफला पाउडर को पानी में रात भर के लिए भिगो दें। अगले दिन सुबह इस पानी को छानकर इससे आँखो को धोएँ। इससे आपकी दृष्टि में सुधार हो सकता है। ध्यान रहे त्रिफला पाउडर शुद्ध हो। अगर आप त्रिफला पाउडर घर पर बना सकते हैं तो और ही अच्छी बात हैं। त्रिफला चूर्ण कैसे बनता है. त्रिफला के फायदे

आंखों की मालिश और एक्सरसाइज से इन पर काफी असर होता है। मालिश के लिये सरसों के तेल की भी उपयोग कर सकते हैं। वहीं अगर आप रात को पैरों के तलवे पर सरसों के तेल की मालिश करके सोएँ और सुबह नंगे पैर नियमित रूप से हरी घास पर चलें तो भी आपको काफी फायेदा मिलेगा। त्रिफला चूर्ण कैसे बनता है

आंखों की एक्सरसाइज

आंखों को स्वस्थ रखने के लिये खानपान के साथ-साथ एक्सरसाइज करना बहुत फायदेमंद होता है। आर्टिकल में आगे पढ़ें – आंखों की रोशनी बढ़ाने की एक्सरसाइज

आंख की एक्सरसाइज करने के लिये एक हाथ में पेंसिल या पेन को पकड़ कर नोक पर नजर टिकाते हुए धीरे-धीरे नाक के पास लगभग 10 सेंटीमीटर दूर तक लाते हैं। इस प्रक्रिया से आंख की मसल्स में ताकत आती है।

जिस आंख से सही दिखता है, उसे हाथ से बंद कर लें व जिससे कम दिख रहा है, उससे देखें। ऐसा करने से देखने की ताकत बढ़ती है।

चोटग्रस्त आंखें हों या कैटरेक्ट या अन्य कोई दोष हो, तो उसे सर्जरी द्वारा दूर किया जाता है। आंख में कोई बीमारी हो या कम दिखे तो तुरंत डाक्टर से संपर्क करें ताकि आंख ठीक हो सके।

आंखों की रोशनी बनाये रखने के लिये क्या करें।

अगर आंखों में थोड़ी सी भी परेशानी हो तो नियमित रुप से आंखों की जांच कराएं।

कोई भी काम करते समय यह सुनिश्तिच करें जहां आप काम कर रहे हैं वहां हो।

आंखों को झपकाते रहें। एकटक व ज्यादा समय तक बिना पलक झपकाए किसी भी चीज को न देखें।

Direct Sunlight में न जाएं। इसके लिये आप चश्मा या छाते का उपयोग कर सकते हैं।

सुबह सुबह हरी घास पर चलें।

नियमित रूप से आंखों की एक्सरसाइज करें।

सही डाइट लें।

आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिये कौन सा विटामिन जरूरी हैं

आंखों की रोशनी बनाये रखने के लिये सही खाद्य पदार्थों का सेवन करना जरूरी है। आइये जानते हैं आगे…

आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिये विटामिन-ए है सबसे जरूरी

आंखों की रोशनी कम होने का सबसे बड़ा कारण है विटामिन-ए की कमी। विटामिन ए आंखों की प्रकाश-संवेदी कोशिकाओं को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है, जिन्हें फोटोरिसेप्टर भी कहते हैं। विटामिन-ए की कमी से रतौंधी, ड्राईनेस (सूखापन) व अन्य गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। विटामिन-ए की कमी पूरा करने के लिये अंडे की जर्दी व डेयरी प्रोडक्ट्स के साथ पीले फलों व सब्जियों का सेवन कर सकते हैं।

आंखों के लिये ओमेगा -3 फैटी एसिड खाने के फायदे

कई वैज्ञानिक शोध व अध्ययनों के अनुसार ओमेगा-3 फैटी एसिड आंखों के स्वस्थ के लिये फायदेमंद हो सकती हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड युक्त आहार का सेवन करने से आंखों में सूखापन की समस्या से छुटकार दिला सकता है। इसके लिये आहार में नट्स, सीड्स, सैल्मन और टूना जैसी मछलियों का सेवन किया जा सकता है।

आंखों के स्वास्थ के लिए विटामिन सी जरूरी

आंखों के स्वास्थ्य पर किए गए अध्ययनों के अनुसार मोतियाबिंद के मरीजों में एंटीऑक्सीडेंट की कमी होती है। पर्याप्त मात्रा में विटामिन-सी की खुराक लेने पर मोतियाबिंद होने की आशंका कम हो सकती है। इसके लिये शिमला मिर्च, खट्टे फल, अमरूद, नींबू, संतरे और ब्रोकली इत्यादि खा सकते हैं।

विटामिन-ई आंखों के लिये फायदेमंद

विटामिन ई, वसा में घुलनशील एंटीऑक्सिडेंट का एक समूह है जो फैटी एसिड को हानिकारक ऑक्सीकरण से बचाता है। चूंकि हमारे रेटिना में फैटी एसिड की उच्च सांद्रता होती है, इसलिए आंखों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए पर्याप्त में विटामिन-ई का सेवन महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके लिये बादाम, सूरजमुखी के बीज

आंखों की रोशनी बढ़ाने के घरेलू उपाय बताएं

विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर खाना खाएं जो आपकी सेहत के साथ ही आँखों की रौशनी भी बढ़ाता है। आँखों को तेज रौशनी से बचाएं। इसके अलावा एक बोनस टिप ये है की शहद और आंवले का रास पीना आँखों के लिए अच्छा माना जाता है।

आंखों के लिए विटामिन कौन से हैं ?

आंखों के लिए विटामिन A से भरपूर चीज़े खाएं। इसके साथ अगर विटामिन C वाले फल खाते हैं तो मोतियाबिंद की समस्या कम हो जाती है।

आंख से धुंधला दिखाई देने पर क्या करें ?

सबसे पहले अगर धुंधला दिखाई दे तो ठन्डे पानी से आँखें अच्छी तरह धोएं। अगर कोई ऑय ड्राप है तो उसे डालें। कभी कभी ज्यादा देर धुप में रहने या थकान की वजह से भी धुंधला दिखाई पद सकता है। अब अगर फिर भी समझ ना आये तो किसी अच्छे नेत्र विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें।

आँख लाल होने पर क्या करें ?

दूध और शहद को अच्छी तरह मिक्स करके आँखों में ड्राप की मदद से डालें। शहद एक एंटीबैक्टीरियल पदार्थ है जिससे आँखों में लालिमा को दूर करने मदद करता है।

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बच्चों की आँख कमजोर होने के कारण एवं लक्ष्ण और उपाय https://ift.tt/ANZDeWl
11/10/2022

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11/10/2022

बच्चों की आँख कमजोर होने के कारण एवं लक्ष्ण और उपाय

बार-बार आंखों को मलना
अगर आपका बच्चा अक्सर अपनी आंखों को मलता रहता है इसके अलावा किसी भी वस्तु को देखने के लिए वो अपनी आंखों पर जोर डालता है या आंखों को आगे करके देखने का प्रयास करता है तो समझ जाएं कि कहीं न कहीं ये आंखों की कमजोरी की निशानी है।
एक आंख को खोलकर और दूसरी आंख को बंद करके देखना
अगर आपका बच्चा मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर या अन्य कुछ भी जिनसे तेज रोशनी निकलती है को देखने के दौरान एक आंख बंद कर लेता है तो इसकी अनदेखी न करें।
सिर में अक्सर दर्द होना
अगर आपका बच्चा पढ़ाई करने के कुछ देर बाद कह रहा है कि उसके सिर में तेज दर्द हो रहा है या फिर टीवी वगैरह देखने के बाद सिर दर्द की शिकायत आपसे करता है तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए।
आंख में दर्द
बच्चे की आंखों में दर्द हो रहा हो या अगर वो ये कह रहा है कि उसकी आंखों में कुछ चुभन जैसी महसूस हो रही है तो इसका मतलब की आंखें कमजोर हो रही है। इसके अलावा आंखों से पानी आने की समस्या को भी नजरंदाज नहीं करें।
तेज रोशनी को बर्दाश्त नहीं कर पाना
हालांकि अचानक तेज रोशनी नजर आने पर सबकी आंखें असहज हो जाती हैं लेकिन अगर आपका बच्चा तेज रोशनी में आने पर बार-बार अपनी पलकें झपकाने लगता है या उसको कुछ धुंधलापन जैसा नजर आने लगे तो इसका मतलब है कि उसकी आंखों कुछ कमजोर हो रही हैं।
दूर की चीजें स्पष्ट नजर नहीं आ रही होंं तो
अगर आपका बच्चा ये कहे कि उसको दूर की चीजें साफ-साफ नजर नहीं आ रही है या आपको ही महसूस हो कि बच्चा दूर की चीजों को देख नहीं पा रहा है और नजदीक जाकर देखते हैं तो इस संकेत की अनदेखी न करें।
आई बॉल की गति में बदलाव
अगर आपके बच्चे की आई बॉल की गति में कुछ फर्क नजर आ रहा है तो उसके बाद भी आपको अपने बच्चे को डॉक्टर से दिखला लेना चाहिए।
आंखों का तिरछापन
अगर आप ये महसूस करें कि आपके बच्चे की आंखें कुछ तिरछी नजर आ रही हैं तो इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
आंखों के सामने अंधेरा छा जाना
किसी काम को कुछ देर करने के बाद अगर आपका बच्चा अपनी आंखों को बंद कर लेता है तो आप उसकी इस गतिविधि को जरूर नोटिस करें। अगर बच्चा आपसे यह कहे कि कभी-कभार उसकी आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है तो यह भी कमजोरी के प्रमुख लक्षणों में से एक है।
आंखें लाल हो जाना
हालांकि आंखों के लाल होने के कई और कारण भी हो सकते हैं जैसे कि भरपूर नींद की कमी, आंखों में धूल का प्रवेश कर जाना इत्यादि। लेकिन अगर अक्सर आपके बच्चे की आंखें लाल हो जाती हैं और वह लगातार अपनी आंखों को मलता रहता है तो उसको आंखों के डॉक्टर के पास चेकअप के लिए ले जाएं।
बच्चों की आंखों की रोशनी बढ़ाने के लिए घरेलू उपाय
आपके बच्चे भी मोबाइल, कंप्यूटर, टेबलेट या टीवी का इस्तेमाल करते ही होंगे तो ऐसे में ये बहुत जरूरी है कि आंखों की सही देखभाल के लिए आप उनको प्रेरित करें और कुछ बेहद सरल उपायों का जरूर पालन करवाएं।
आंखों की मालिश
जी हां, आंखों की भी मालिश होती है लेकिन जैसा कि आप जानते हैं कि आंख बेहद नाजुक अंग होते हैं तो इनके मालिश करने का तरीका भी कुछ अलग हटकर होता है। अपनी अंगुलियों से आंखों की पलकें और भौंह के बीच में आहिस्ते-आहिस्ते 10-20 सेकेंड तक मालिश करें। इसके बाद अपने हाथों की दोनों हथेलियों को आपस में कुछ देर तक रगड़ते रहें। कुछ देर में आपको एहसास होगा कि आपकी दोनों हथेलियां गर्म हो चुकी है फिर इसके बाद अपनी हथेलियों को आंख बंद करके पलकों पर रख दें। इससे आंखों का ब्लड सर्कुलेशन सही रहता है और आंखों को भी राहत मिलती है।
आंखों की सिकाई
ठंडे पानी से आंखों की सिकाई कर सकते हैं। गुलाब जल या खीरे के टुकड़े को आंखों पर रखने से भी आराम मिलता है।
आंखों के लिए एक्सरसाइज
एक पेन या पेंसिल की मदद से आप भली भांति अपने आंखों का एक्सरसाइज कर सकते हैं। पेन या पेंसिल को अपने बच्चे को कहें कि वह इसे एक हाथ की दूरी पर आंखों के सामने पकड़ कर रख ले। इसके बाद धीरे धीरे करके उस पेंसिल या पेन को आंखों के नजदीक लाएं। बच्चे का ध्यान पेंसिल या पेन पर ही केंद्रित रहे। एक बार नजदीक लाना है तो उसके बाद फिर इसको दूर ले जाना है। इस प्रक्रिया को 10-12 बार दोहराना है। आपका बच्चा जिस कमरे में बैठकर स्टडी करता हो वहां उचित रोशनी का प्रबंध होना चाहिए। तेज रोशनी नहीं होना चाहिए। बच्चा जहां बैठता है, उसके पीछे से रोशनी आनी चाहिए न कि सामने से।
पौष्टिक खाना खिलाएं
आंखों की रोशनी के लिए विटामिन ए बहुत आवश्यक होता है। विटामिन ए से परिपूर्ण आहार जैसे कि गाजर वगैरह सलाद या जूस के रूप में आप अपने बच्चे को दे सकते हैं।

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