20/03/2021
क्या है RERA (रियल एस्टेट रेगुलेटरी एक्ट)
रियल एस्टेट (रेग्युलेशन एंड डेवेलपमेंट) एक्ट 2016 (RERA) एक कानून है, जिसे भारतीय संसद ने पास किया था. RERA का मकसद रियल एस्टेट सेक्टर में ग्राहकों का निवेश बढ़ाना और उनके हितों की रक्षा करना है. 10 मार्च 2016 को राज्यसभा ने रेरा बिल को पास किया था. इसके बाद 15 मार्च 2016 को लोकसभा ने इसे पास किया. 1 मई 2016 को इसे लागू किया गया. 92 में से 59 सेक्शन्स 1 मई 2016 को नोटिफाई किए गए और बाकी के प्रावधान 1 मई 2017 से लागू कर दिए गए. इस कानून के तहत, अगले 6 महीने में केंद्रीय कानून के मॉडल नियमों के आधार पर केंद्र और राज्य सरकारों को अपने नियम नोटिफाई करने हैं.
अप्रैल 2019 तक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में RERA का रजिस्ट्रेशन
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश नोटिफिकेशन का स्टेटस
अरुणाचल प्रदेश नोटिफाइड (वेबसाइट अभी लॉन्च होनी है)
असम नोटिफाइड (वेबसाइट अभी लॉन्च होनी है)
केरल नोटिफाइड (वेबसाइट लॉन्च हो गई है)
मणिपुर जल्द ही नोटिफाई होना है
मेघालय जल्द ही नोटिफाई होना है
मिजोरम जल्द ही नोटिफाई होना है
नगालैंड जल्द ही नोटिफाई होना है
सिक्किम जल्द ही नोटिफाई होना है
त्रिपुरा नोटिफाइड (वेबसाइट लॉन्च होनी है)
पश्चिम बंगाल HIRA के तहत नोटिफाइड
लक्षद्वीप नोटिफाइड (वेबसाइट अभी लॉन्च होनी है)
पुडुचेरी नोटिफाइड (वेबसाइट लॉन्च होनी है)
वो राज्य और केंद्र शासित प्रदेश, जिनकी वेबसाइट एक्टिव हैं
राज्य/ केंद्र शासित प्रदेश April 2019 तक रजिस्टर्ड प्रोजेक्ट्स पंजीकृत एजेंट्स
आंध्र प्रदेश 307 47
बिहार 250 –
छत्तीसगढ़ 859 363
गोवा 379 143
गुजरात 5,317 899
हरियाणा 558 –
हिमाचल प्रदेश 29 26
झारखंड 30 66
कर्नाटक 2,530 1,342
मध्य प्रदेश 2,163 533
महाराष्ट्र 20,718 19,699
ओडिशा 257 35
पंजाब 672 1,026
राजस्थान 925 840
तमिलनाडु 965 538
तेलंगाना 642 440
उत्तर प्रदेश 2,612 2,750
उत्तराखंड 156 175
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह 1 16
दादरा एवं नगर हवेली – दमन और दीयू 96 2
दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली) 18 70
क्यों जरुरी है RERA?
काफी वक्त से घर खरीददार इस बात की शिकायत कर रहे थे कि रियल एस्टेट की लेनदेन एकतरफा और ज्यादातर डिवेलपर्स के हक में थीं। RERA और सरकार के मॉडल कोड का मकसद मुख्य बाजार में विक्रेता और संपत्ति के खरीददार के बीच न्यायसंगत और सही लेनदेन तय करना है। उम्मीद की जा रही है कि RERA बेहतर जवाबदेही और पारदर्शिता लाकर रियल एस्टेट की खरीद को आसान बनाएगा। साथ ही राज्यों के प्रावधान केंद्रीय कानून की भावना को कमजोर नहीं करेंगे। RERA भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री का पहला रेगुलेटर है। रियल एस्टेट एक्ट के तहत यह अनिवार्य किया गया कि सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपने रेगुलेटर और नियमों का गठन करेंगे, जिसके मुताबिक कामकाज होगा।
घर खरीददारों पर क्या होगा RERA का प्रभाव
कुछ अहम अनुपालन हैं:
कोई भी अतिरिक्त इजाफा या परिवर्तन के बारे में आवंटियों को सूचना देना।
किसी भी इजाफे या बदलाव के बारे में 2/3 आवंटियों की मंजूरी की जरूरत होगी।
RERA में रजिस्ट्रेशन से पहले किसी तरह का लॉन्च या विज्ञापन नहीं किया जाएगा।
अगर बहुमत अधिकार तीसरे पक्ष को ट्रांसफर किया जाना है तो 2/3 सहमति की जरूरत होगी।
प्रोजेक्ट प्लान, लेआउट, सरकारी मंजूरी और लैंड टाइटल स्टेटस और उप-ठेकेदारों की जानकारी साझा करना।
वक्त पर प्रोजेक्ट पूरा होकर ग्राहकों को मिल जाए, इस पर जोर दिया जाएगा।
पांच साल की दोष दायित्व अवधि के कारण कंस्ट्रक्शन की क्वॉलिटी में इजाफा।
ब्योरेवार समय या काफी फ्लैट्स बिक जाने के बाद आरडबल्यूए का गठन।
इस कानून का सबसे सकारात्मक पहलू है कि यह फ्लैटों, अपार्टमेंट आदि की खरीद के लिए एक एकीकृत कानूनी व्यवस्था मुहैया कराता है, साथ ही पूरे देश में उसका मानकीकरण करता है। अब आपको इस कानून की मुख्य बातों के बारे में बताते हैं:
रेगुलेटरी अथॉरिटी की स्थापना: रियल एस्टेट के लिए सही रेगुलेटर (जैसे कैपिटल मार्केट के लिए सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड अॉफ इंडिया) की जरूरत लंबे वक्त से थी। इस कानून के तहत हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया जाएगा। इसका मकसद ग्राहकों के हितों की रक्षा, जमा किए डाटा को संग्रहित करना और मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली बनाना है। समय की बर्बादी को रोकने के लिए प्राधिकरण को अधिकतम 60 दिनों के भीतर आवेदन का निपटारा करना अनिवार्य है। यह सीमा तभी बढ़ाई जा सकती है, अगर देरी का कोई कारण दर्ज हो। इसके अलावा रियल एस्टेट अपीलीय प्राधिकरण (REAT) में अपील की जा सकती है।
अनिवार्य रजिस्ट्रेशन: केंद्रीय कानून के मुताबिक सभी रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स (जहां विकसित होने वाला कुल क्षेत्रफल 500 स्क्वेयर मीटर से ज्यादा है या किसी भी चरण में 8 से ज्यादा अपार्टमेंट्स बनने अनिवार्य हैं) का अपने राज्य के RERA में रजिस्टर्ड होना अनिवार्य है। जिन मौजूदा प्रोजेक्ट्स को कंप्लीशन सर्टिफिकेट (सीसी) या अॉक्युपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) जारी नहीं हुआ है, उन्हें भी इस कानून के तहत रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। रजिस्ट्रेशन कराते वक्त प्रोमोटर्स को प्रोजेक्ट की जानकारी जैसे-जमीन की स्थिति, प्रोमोटर की जानकारी, अप्रूवल, पूरे होने का समय इत्यादि बतानी होगी। जब रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी और सभी मंजूरियां मिल जाएंगी, तब प्रोजेक्ट की मार्केटिंग की जा सकती है।
रिजर्व अकाउंट: प्रोजेक्ट्स में देरी होने की सबसे मुख्य वजह है कि एक प्रोजेक्ट के लिए पैसा जमा कर उसे दूसरे प्रोजेक्ट में निवेश कर दिया जाता है। इस पर रोक लगाने के लिए प्रोमोटर्स को प्रोजेक्ट का 70 प्रतिशत पैसा अलग रिजर्व अकाउंट में रखना होगा। इस खाते की राशि को सिर्फ जमीन या निर्माण के कामों में खर्च किया जा सकता है। किसी पेशेवर से इसे सर्टिफाइड कराना भी जरूरी है।
प्रोजेक्ट की प्रोग्रेस देख सकेंगे ग्राहक: RERA के लागू होने के बाद घर खरीददार RERA की वेबसाइट पर प्रोजेक्ट की प्रोग्रेस मालूम कर सकेंगे। प्रोजेक्ट में कितना काम पूरा हुआ, इसकी जानकारी प्रोमोटर्स को नियमित अंतराल पर नियामक को देनी होगी।
टाइटल रिप्रेजेंटेशन: प्रोमोटर्स को अब सही टाइटल और जमीन पर रुचि के लिए सकारात्मक वॉरंटी बनानी होगी, जिसे बाद में घर खरीददार उनके खिलाफ इस्तेमाल कर सकते हैं। गलत टाइटल की खोज की जानी चाहिए। इसके अलावा उन्हें टाइटल और प्रोजेक्ट के कंस्ट्रक्शन के लिए इन्श्योरेंस भी हासिल करनी होगी, जिसका मुनाफा बिक्री समझौते के निष्पादन के बाद अलॉटी को दिया जाना चाहिए।
बिक्री समझौते का मानकीकरण: इस कानून के तहत प्रोमोटर्स और घर खरीददार के बीच बिक्री समझौते का मानक मॉडल है। मिसाल के तौर पर प्रोमोटर्स ने घर खरीददारों के लिए कई धाराएं डालीं, जो उनके लिए सजा जैसी थीं, लेकिन प्रमोटर्स अगर कोई गलती करते थे तो उन पर कोई पेनाल्टी नहीं लगती थी। लेकिन एेसे क्लॉज अब बीते दिनों की बात हो जाएंगे और घर ग्राहकों को भविष्य में एक संतुलित अग्रीमेंट मिलेगा।
पेनाल्टी: इस कानून का उल्लंघन न हो, इसके लिए सख्त जुर्माने (प्रोजेक्ट की लागत का 10 प्रतिशत) का प्रावधान है।
RERA के तहत कारपेट एरिया की परिभाषा:
प्रॉपर्टी का एरिया तीन तरीकों से कैलकुलेट किया जाता है-कारपेट एरिया, बिल्ड-अप एरिया और सुपर बिल्ड-अप एरिया। इसलिए जब भी बात प्रॉपर्टी खरीदने की आती है तो आप क्या चुकाएंगे और आपको क्या मिलेगा, इसके बीच काफी फर्क होता है। महाराष्ट्र RERA के चेयरमैन गौतम चटर्जी ने कहा, अब यह सभी बिल्डर्स के लिेए अनिवार्य है कि वे अपार्टमेंट का साइज कारपेट एरिया (चार दीवारों के बीच का एरिया) के आधार पर बताएं। इस्तेमाल होने वाले इल एरिया में टॉयलेट एवं किचन भी शामिल होंगे। इससे पारदर्शिता आएगी, जो पहले नहीं थी।
RERA के मुताबिक कारपेट एरिया किसी अपार्टमेंट का इस्तेमाल होने वाला एरिया होता है, जिसमें बाहरी दीवारों का एरिया, सर्विस शाफ्ट, बालकनी और वरांडा एरिया शामिल नहीं होते। फ्लैट के अंदर की दीवारों का एरिया इसका हिस्सा होता है।
सुमेर ग्रुप के सीईओ राहुल शाह ने कहा, RERA की गाइडलाइंस के मुताबिक, बिल्डर को सटीक कारपेट एरिया की जानकारी देनी होगी, ताकि ग्राहकों को यह पता चल सके कि वह किसके लिए भुगतान कर रहे हैं। लेकिन कानून के तहत बिल्डरों को कारपेट एरिया के आधार पर फ्लैट बेचना अनिवार्य नहीं है।
रियल एस्टेट इंडस्ट्री पर RERA का असर:
शुरुआती बैकलॉग
प्रोजेक्ट की बढ़ी हुई लागत
चुस्त नकदी
पूंजी की लागत में इजाफा
एकत्रीकरण
प्रोजेक्ट लॉन्च टाइम में बढ़ोतरी
शुरुआती तौर पर मौजूदा और नए प्रोजेक्ट्स के रजिस्ट्रेशन पर काफी काम करना होगा। पिछले पांच वर्षों में पूरे हुए प्रोजेक्ट्स का स्टेटस, प्रोमोटर की जानकारी, विस्तृत निष्पादन योजना तैयार करने की जरूरत है।
RERA के आने से घर खरीद से जुड़े सभी विवादों का निपटारा स्टेट रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी और रियल एस्टेट अपीलीय ट्रिब्यूनल करेगा। एेसे मामलों के लिए सिविल कोर्ट या कंज्यूमर फोरम का सहारा नहीं लिया जाएगा। मामलों के तेजी से निपटारे के लिए RERA ने मूल सिद्धांत तय किए हैं। इसकी सफलता वक्त पर विवादों का निपटारा करने वाली संस्थाओं का गठन और कैसे इन विवादों को सुलझाया जाएगा, इस पर निर्भर करेगा।
राज्यों में RERA
31 जुलाई, 2017 को 23 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) ने अपने स्थायी और अंतिम रेगुलेटरी अथॉरिटी की स्थापना की। RERA के तहत सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में खुद का रेगुलेटर होना चाहिए। जब तक बिल्डर अपना मौजूदा या आने वाला प्रोजेक्ट राज्यों के स्थायी या अंतरिम रेगुलेटर में रजिस्टर्ड नहीं कर देते, वे उसका प्रचार नहीं कर सकते। जिन प्रोजेक्ट्स को ओसी नहीं मिला था, उनके लिए आखिरी तारीख 31 जुलाई, 2017 थी।
आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय ने कहा कि गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और पंजाब ने अपने स्थायी रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण का गठन कर लिया है, जबकि 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने अंतरिम प्राधिकरण बना चुके हैं। केवल 23 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों ने कानून के नियमों को नोटिफाई किया है, जबकि 6 राज्यों ने नियमों को ड्राफ्ट कर लिया है, लेकिन नोटिफाई नहीं। कुल 9 राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों ने रियल एस्टेट कानून के तहत अंतरिम अपीलीय न्यायाधिकरण नियुक्त किया है जबकि केवल सात राज्यों ने अधिनियम के तहत ऑनलाइन पंजीकरण शुरू कर दिया है।
महाराष्ट्र RERA: महाराष्ट्र रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (MahaRERA) 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आया था। बिल्डर्स और रियल एस्टेट एजेंट्स को अपने नए और मौजूदा प्रोजेक्ट्स को रजिस्टर्ड कराने के लिए 90 दिनों की मोहलत दी गई।
सुलह व्यवस्था शुरू करने वाला पहला राज्य बना महाराष्ट्र: इस राज्य के परेशान घर खरीददार बिल्डर के साथ अपने विवादों का जल्द निपटारा कर पाएंगे, क्योंकि महाराष्ट्र RERA के सेक्शन 32 (जी) के वैकल्पिक विवाद समाधान (एडीआर) के तहत सुलह व्यवस्था शुरू करने वाला पहला राज्य बन गया है। यह सुलह व्यवस्था 1 फरवरी, 2018 से शुरू हो गई है और सुलह कराने वाली बेंच मार्च के पहले हफ्ते में सुनवाई शुरू कर सकती है। कोई भी परेशान आवंटी या प्रोमोटर (RERA में परिभाषित) महाराष्ट्र रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण के तहत सुलह व्यवस्था का आह्वान कर सकता है। इसके लिए एक वेबसाइट बनाई गई है, जिसे MahaRERA की वेबसाइट के जरिए भी चलाया जा सकता है।