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13/01/2023

Life

एक बार समुद्री तूफ़ान के बाद लाखों मछलियाँ किनारे रेत पर तड़प तड़प कर मर रहीँ थीं ! इस भयानक स्थिति को देखकर पास में रहन...
03/11/2022

एक बार समुद्री तूफ़ान के बाद लाखों मछलियाँ किनारे रेत पर तड़प तड़प कर मर रहीँ थीं !

इस भयानक स्थिति को देखकर पास में रहने वाले एक 8 वर्ष के बच्चे से रहा नहीं गया और वह एक एक मछली उठा कर समुद्र में वापस फेकनें लगा !

यह देख कर उसकी माँ बोली...बेटा लाखों की संख्या में है , तू कितनों की जान बचाएगा ।

यह सुनकर बच्चे ने अपनी गति और तेज बढ़ा दी औऱ ताबड़तोड़ मछलियों को पानी में फेंकने लगा ।

माँ फिर बोली... बेटा रहनें दे कोई फ़र्क नहीं पड़ता !

बच्चा जोर जोर से रोने लगा और एक मछली को समुद्र में फेकतें हुए जोर से बोला माँ *"इसको तो फ़र्क पड़ता है"*

फिर दूसरी मछली को उठाता और उसे पानी में फेंककर बोलता माँ *"इसको तो फ़र्क पड़ता हैं"* !

माँ ने बच्चे को सीने से लगा लिया !

इस बेहद मुश्किल दौर में जितना संभव हो सके लोगों को हमेशा होंसला और उम्मीद देनें की कोशिश करें , न जानें कब आपकी वजह से किसी की जिन्दगी औऱ सोंच बदल जाए !

क्योंकि भले ही इससे हम सबको कोई फ़र्क नहीं पड़ता हो पर "उसको तो फ़र्क पड़ता है शायद ".......

23/04/2022

किताबें ऐसी शिक्षक हैं जो बिना कष्ट दिए, बिना आलोचना किए और बिना परीक्षा लिए हमें शिक्षा देती हैं। “विश्व पुस्तक दिवस” की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। 23 April 📚

जब टाईटेनिक समुन्द्र में डूब रहा था तो उसके आस पास तीन ऐसे जहाज़ मौजूद थे जो टाईटेनिक के मुसाफिरों को बचा सकते थे।सबसे क...
20/04/2022

जब टाईटेनिक समुन्द्र में डूब रहा था तो उसके आस पास तीन ऐसे जहाज़ मौजूद थे जो टाईटेनिक के मुसाफिरों को बचा सकते थे।
सबसे करीब जो जहाज़ मौजूद था उसका नाम SAMPSON था और वो हादसे के वक्त टाईटेनिक से सिर्फ सात मील की दूरी पर था।
SAMPSON के कैप्टन ने न सिर्फ टाईटेनिक की ओर से फायर किए गए सफेद शोले (जो कि बेहद खतरे की हालत में हवा में फायर किये जाते हैं।) देखे थे, बल्कि टाईटेनिक के मुसाफिरों के चिल्लाने के आवाज़ को भी सुना भी था। लेकिन सैमसन के लोग गैर कानूनी तौर पर बेशकीमती समुन्द्री जीव का शिकार कर रहे थे और नहीं चाहते थे कि पकड़े जाएं, अपने जहाज़ को दूसरी तरफ़ मोड़ कर चले गए।

यह जहाज़ हम में से उन लोगों की तरह है जो अपनी गुनाहों भरी जिन्दगी में इतने मग़न हो जाते हैं कि उनके अंदर से इनसानियत खत्म हो जाती है।

दूसरा जहाज़ जो करीब मौजूद था उसका नाम CALIFORMIAN था, जो हादसे के वक्त टाईटेनिक से चौदह मील दूर था, उस जहाज़ के कैप्टन ने भी टाईटेनिक की ओर से निकल रहे सफेद शोले अपनी आखों से देखे, क्योंकि टाईटेनिक उस वक्त बर्फ़ की चट्टानों से घिरा हुआ था और उसे उन चट्टानों के चक्कर काट कर जाना पड़ता, इसलिए वो कैप्टन सुबह होने का इन्तजार करने लगा।और जब सुबह वो टाईटेनिक की लोकेशन पर पहुंचा तो टाईटेनिक को समुन्द्र की तह मे पहुचे हुए चार घंटे गुज़र चुके थे और टाईटेनिक के कैप्टन Adword_Smith समेत 1569 मुसाफिर डूब चुके थे।

यह जहाज़ हम लोगों मे से उनकी तरह है जो किसी की मदद करने के लिए अपनी सहूलियत और आसानी देखते हैं और अगर हालात सही न हों तो अपना फ़र्ज़ भूल जाते हैं।

तीसरा जहाज़ CARPATHIA था जो टाईटेनिक से 68 मील दूर था, उस जहाज़ के कैप्टन ने रेडियो पर टाईटेनिक के मुसाफारों की चीख पुकार सुनी, जबकि उसका जहाज़ दूसरी तरफ़ जा रहा था, उसने फौरन अपने जहाज़ का रुख मोड़ा और बर्फ़ की चट्टानों और खतरनाक़ मौसम की परवाह किए बगैर मदद के लिए रवाना हो गया। हालांकि वो दूर होने की वजह से टाईटेनिक के डूबने के दो घंटे बाद लोकेशन पर पहुच सका लेकिन यही वो जहाज़ था, जिसने लाईफ बोट्स की मदद से टाईटेनिक के बाकी 710 मुसाफिरों को जिन्दा बचाया था और उन्हें हिफाज़त के साथ न्यूयार्क पहुचा दिया था।
उस जहाज़ के कैप्टन "आर्थो रोसट्रन " को ब्रिटेन की तारीख के चंद बहादुर कैप्टनों में शुमार किया जाता है और उनको कई सामाजिक और सरकारी आवार्ड से भी नवाजा गया था।

हमारी जिन्दगी में हमेशा मुश्किलें रहती हैं, चैलेंज रहते हैं लेकिन जो इन मुश्किल और चैलेंज का सामना करते हुए भी इन्सानियत की भलाई के लिए कुछ कर जाए वही सच्चा इन्सान है।

आज के माहौल में जिस किसी ने भी अपनी सामर्थ्य अनुसार किसी की मदद की है, समझो विश्व रूपी टाइटैनिक के डूबने से पहले उसने जिंदगियां बचाने का पुण्य प्राप्त किया है। अभी संकट दूर नहीं हुआ है। अभी भी बहुत कुछ किया जा सकता है।

आओ मिलजुल कर इस मुश्किल घड़ी में एक दूसरे की मदद कर त्रस्त मानवता के कल्याण में अपना योगदान दें।(कॉपी)

18/04/2022
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17/04/2022

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15/04/2022

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भारत को एक सनातन राष्ट्र माना जाता है क्योंकि यह मानव सभ्यता का पहला राष्ट्र था। श्रीमद्भागवत के पंचम स्कन्ध में भारत रा...
03/06/2021

भारत को एक सनातन राष्ट्र माना जाता है क्योंकि यह मानव सभ्यता का पहला राष्ट्र था। श्रीमद्भागवत के पंचम स्कन्ध में भारत राष्ट्र की स्थापना का वर्णन आता है। भारतीय दर्शन के अनुसार सृष्टि उत्पत्ति के पश्चात ब्रह्मा के मानस पुत्र स्वयंभु मनु ने व्यवस्था सम्भाली। इनके दो पुत्र, प्रियव्रत और उत्तानपाद थे।

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