25/08/2025
कविता देवी – वो नाम जिसने भारतीय बेटियों के लिए पहलवानी की दुनिया में नया इतिहास रच दिया 🌟
20 सितंबर 1986 को जन्मी कविता देवी (पूर्व नाम कविता दलाल) आज हर उस लड़की के लिए प्रेरणा हैं जो बड़े सपने देखने की हिम्मत करती है। हरियाणा की मिट्टी से निकली यह बेटी पहले वेटलिफ्टिंग में चमकी और फिर इतिहास रचते हुए WWE रिंग में कदम रखने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं। 💪🇮🇳
🔹 शुरुआत और प्रेरणा
कविता देवी का बचपन से ही पहलवानी की ओर झुकाव था। टीवी पर रेसलिंग देखते हुए उन्होंने मन ही मन ठान लिया था कि एक दिन उन्हें भी इस मंच पर जाना है। जब मौका मिला, तो उन्होंने बिना देर किए वेटलिफ्टिंग से रेसलिंग की ओर रुख कर लिया। उनके इसी जुनून और हिम्मत ने उन्हें भीड़ से अलग बना दिया।
🔹 करियर की उपलब्धियाँ
2016 में द ग्रेट खली की Continental Wrestling Entertainment से डेब्यू।
2017 में WWE NXT से जुड़ीं और Mae Young Classic में हिस्सा लेकर WWE रिंग में उतरने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
2018 में WrestleMania 34 Women’s Battle Royal में शामिल होकर दुनिया के सबसे बड़े मंच पर भारत का परचम लहराया।
रेसलिंग स्टाइल – पावरहाउस मूव्स और उनकी पहचान बनी राउंडहाउस किक।
WWE के बाद 2023 में राजनीति की ओर कदम बढ़ाए।
🔹 द ग्रेट खली का योगदान
कविता देवी हमेशा मानती हैं कि उनका करियर द ग्रेट खली की देन है। खली ने न केवल उन्हें ट्रेनिंग दी बल्कि उनके पावरलिफ्टिंग बैकग्राउंड को रेसलिंग की ताकत में बदलने में मदद की।
खली ने उन्हें आत्मविश्वास दिया कि वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी शानदार प्रदर्शन कर सकती हैं। कविता कहती हैं – “रेसलिंग में जो कुछ भी सीखा है, वो सब खली सर की वजह से ही है।”
🔹 परिवार का साथ
कविता देवी की सफलता के पीछे उनके परिवार का बहुत बड़ा हाथ रहा। समाज और रिश्तेदारों के विरोध के बावजूद उनका भाई और पति हमेशा उनके साथ खड़े रहे। उन्होंने आलोचनाओं से कविता को बचाया और लगातार उनका हौसला बढ़ाया। यही नहीं, उनके ससुरालवालों ने भी हर कदम पर उनका साथ दिया।
कविता मानती हैं कि अगर परिवार का यह अटूट समर्थन न होता तो शायद वह इस मुकाम तक नहीं पहुँच पातीं। उनकी कहानी साबित करती है कि जब परिवार का साथ हो, तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।
👉 कविता देवी सिर्फ़ एक पहलवान नहीं, बल्कि भारतीय बेटियों की हिम्मत, संघर्ष और सफलता की मिसाल हैं। उन्होंने यह साबित किया कि चाहे समाज कुछ भी कहे, अगर हौसला बुलंद हो और परिवार का साथ हो, तो कोई भी लड़की दुनिया के सबसे बड़े मंच पर तिरंगा लहरा सकती है।