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मकान का किराया नहीं दे रहा किरायेदार तो मत कीजिए झगड़ा, काम आयेंगे ये कानूनी अधिकारअक्सर किराएदार और मकान मालिक के बीच ल...
07/10/2023

मकान का किराया नहीं दे रहा किरायेदार तो मत कीजिए झगड़ा, काम आयेंगे ये कानूनी अधिकार
अक्सर किराएदार और मकान मालिक के बीच लड़ाई झगड़े होते रहते हैं लेकिन कई बार किराएदार के समय पर किराया ने देने के मामले ज्यादा सामने आ रहे हैं ऐसे में मकान मालिक इन कानूनी नियमों का इस्तेमाल कर सकता है चलिए जानते हैं...

मकान मालिक और किरायेदार में विवाद होना कोई नई बात नहीं है. आमतौर किरायेदार के समय पर किराया (House Rent) न चुकाने के मामले ज्‍यादा सामने आते हैं।

अगर आपका किरायेदार भी आपको किराया देने से इंकार कर रहा है, तो उससे किराया वसूलने के कई तरीके हैं. ऐसी स्थिति में झगड़ना बिल्‍कुल नहीं चाहिए,

बल्कि उपलब्ध कानूनी विकल्पों का इस्‍तेमाल कर अपना बकाया पैसा हासिल करने का रास्‍ता अपनाना चाहिए. किरायेदार से किराया निकलवाने के कई रास्‍ते आपके पास हैं।

किरायेदार से किराया वसूलने में मकान मालिक और किराएदार के बीच हुआ रेंट एग्रीमेंट बहुत काम आता है. इस दस्‍तावेज में ही किराये की राशि, देय तिथि और भुगतान न करने के परिणाम शामिल हैं. यह दस्तावेज़ ही मकान मालिक द्वारा की जाने वाली किसी भी कानूनी कार्रवाई का आधार होता है।

आमतौर पर हर मकान मालिक किरायेदार से सिक्‍योरिटी के रूप में कुछ पैसे जमा कराता है. यह राशि ही किराया न चुकाए जाने की स्थिति में पैसा वसूलने में मदद करती है।

सिक्योरिटी डिपॉजिट्स मकान मालिकों को किराए का भुगतान न करने या किरायेदारी के दौरान किरायेदारों द्वारा संपत्ति को होने वाले नुकसान के खिलाफ वित्तीय सुरक्षा प्रदान करता है. किरायेदार के किराया देने से आनाकानी करने पर आप उसे बताएं कि आप उसके द्वारा जमा सिक्‍योरिटी राशि से किराया काट लेंगे।

पहले दें कानूनी नोटिस

अगर किरायेदार निश्चित तारीख पर किराया नहीं देता है, तो किराये की वसूली के लिए आप कानूनी नोटिस भी भेज सकते हैं. नोटिस में बकाया किराए (Unpaid Rent) का डिटेल,

भुगतान की समय सीमा और गैर-अनुपालन के परिणाम शामिल होने चाहिए. सुनिश्चित करें कि नोटिस इंडियन कॉन्ट्रैक्ट एक्ट 1872 के तहत बताई गई सभी कानूनी शर्तों के अनुरूप हो।

कोर्ट में करें केस

अगर किरायेदार कानूनी नोटिस देने के बाद भी किराया नहीं देता है, तो आप अदालत में केस दायर कर सकते हैं. शुरू में आपको निचली अदालत में ही केस दायर करना होगा. अगर आप किराया पाने के हकदार होंगे और आपने कांट्रेक्‍ट की सभी शर्तों को पूरा किया होगा तो कोर्ट आपके पक्ष में फैसला सुना देगी।

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02/10/2023

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Ancestral property: दादा, पिता और भाई न दे प्रोपर्टी में हिस्सा, तो इस तरीके से ले सकते हैं अपने हक की जमीन।Ancestral pr...
29/09/2023

Ancestral property: दादा, पिता और भाई न दे प्रोपर्टी में हिस्सा, तो इस तरीके से ले सकते हैं अपने हक की जमीन।

Ancestral property: कानूनी भाषा में कहें तो पुरुषों की चार पीढ़ियों तक जो संपत्ति विरासत में मिली हो उसे पैतृक संपत्ति कहा जाता है. पैतृक संपत्ति में हिस्से का अधिकार जन्म के समय ही मिल जाता है. लेकिन फिर भी कई बार पिता, भाई उसे देने से मना करते हैं ऐसे में क्या करें. आइए जानते है इसके बारे में विस्तार से,

भारत में संयुक्त परिवार की संस्कृति है. यहां बड़े-बड़े परिवार कई पीढ़ियों से एक साथ ही रहते हैं. हालांकि, अब धीरे-धीरे वक्त बदल रहा है. बड़े संयुक्त परिवार की जगह छोटी सिंगल फैमिली ही नजर आती है।
ऐसे में प्रॉपर्टी को लेकर अक्सर विवाद होता ही है. संपत्ति को लेकर झगड़ा तकरीबन हर तीसरे परिवार में देखने को मिलता है. किसी-किसी जगह यह बगैर कानून के हस्तक्षेप के हल हो जाता है तो कहीं बात कोर्ट कचहरी तक पहुंच जाती है. संपत्ति पर कब्जे की मंशा बहुत से लोगों को इस कदर अंधा कर देती है कि वे बाप-बेटे के रिश्ते को भी खराब कर देती है।

वहीं बहुत से उत्तराधिकारी उनके कानूनी हिस्से से ही वंचित रह जाते हैं. अकसर ऐसा लड़कियों के साथ होता नजर आया है,
कई लड़कियां आज भी अपने हक से वंचित रह जाती हैं. आज हम आपको बताएंगे यदि किसी को उनके दादा, पिता व भाई पैतृक संपत्ति में हिस्सा नहीं देते तो वह क्या कर सकता है।

पैतृक संपत्ति में कितना होता हक:

सबसे पहली बात यदि दादा, पिता एवं भाई पैतृक संपत्ति में हिस्सेदार हैं तो आपको भी पैतृक संपत्ति में हिस्सा अवश्य दिया जाना चाहिए. पैतृक संपत्ति में हिस्से का अधिकार जन्म के साथ ही मिल जाता है,
यदि पैतृक संपत्ति का बंटवारा होता है अथवा उस संपत्ति को बेचा जाता है तो बेटियों को भी उसमें बराबर अधिकार मिलता है।
हिंदू कानून के मुताबिक संपत्तियां दो तरह की होती हैं-पैतृक संपत्ति और खुद कमाई हुई. पैतृक संपत्ति वह संपत्ति होती है, जो आपके लिए पूर्वज छोड़कर जाते हैं, चार पीढ़ियों तक. अगर आम भाषा में कहा जाए तो जो संपत्ति या जमीन आपके बुजुर्ग छोड़कर जाते हैं, उसे पैतृक संपत्ति कहा जाता है।

क्या किराएदार कर सकता है प्रोपर्टी पर कब्जा का दावा, Supreme Court ने 2014 में दिए फैसले को पलट दिया।Supreme Court : देश...
25/09/2023

क्या किराएदार कर सकता है प्रोपर्टी पर कब्जा का दावा, Supreme Court ने 2014 में दिए फैसले को पलट दिया।

Supreme Court : देश में ज्यादातर लोग किराए का घर लेकर ही रहते हैं। कई बार ऐसे मामले भी सामने आते हैं जहां पता चलता है कि किराएदार ने मकान मालिक कि प्रॉपर्टी पर कब्जा कर लिया ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने इस बात को स्पष्ट किया है।

घर का किराया एक स्थायी इनकम है. इसलिए लोग प्रॉपर्टी में इन्वेस्ट करते हैं. घर, दुकान, जमीनें खरीदते हैं. खरीदने के बाद किराए पर चढ़ा देते हैं. कई बार मालिक किराए पर दिए अपनी प्रॉपर्टी की सुध नहीं लेते. विदेश चले जाते हैं. या देश में रहते हुए केवल अपने कामों में व्यस्त रहते हैं. केवल उन्हें किराए से मतलब होता है जो हर महीने उनके बैंक अकाउंट में पहुंच जाता है।

लेकिन किराए पर देते समय और किराए पर चढ़ाने के बाद भी मालिक को कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए, नहीं तो प्रॉपर्टी से हाथ धोना पड़ सकता है!हमारे देश में प्रॉपर्टी को लेकर ऐसे कुछ नियम हैं जहां लगातार 12 साल तक रहने के बाद किराएदार उस प्रॉपर्टी पर कब्जे का दावा कर सकता है, हालांकि इसकी कुछ शर्तें हैं. इतना आसान नहीं है. लेकिन आपकी प्रॉपर्टी विवाद में आ जाएगी।

कब किराएदार प्रॉप्रटी पर कब्जे का दावा कर सकता है?

अग्रेजों का बनाया एक कानून है- प्रतिकूल कब्जा. अंग्रेजी में कहें तो adverse Possession. इसके मुताबिक लगातार 12 साल तक रहने के बाद किराएदार उस प्रॉपर्टी पर कब्जे का दावा कर सकता है।
लेकिन इसकी कुछ शर्तें भी हैं. जैसे- मकान मालिक ने 12 साल की अवधि में कभी उस कब्जे को लेकर कोई रोक-टोक न की हो. यानी प्रॉपर्टी पर किराएदार का कब्जा लगातार रहा हो. कोई ब्रेक न हो. किराएदार प्रॉपर्टी डीड,पानी बिल, बिजली बिल जैसी चीजें सबूत के तौर पर पेश कर सकता है।

इस मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने भी फैसला सुना चुका है. सुप्रीम कोर्ट ने जमीन से जुड़े विवाद में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि 12 साल तक जमीन पर जिसका कब्जा होगा, वही अब जमीन का मालिक माना जाएगा, सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा है कि अगर 12 साल तक उस जमीन पर कोई मालिकाना हक नहीं जताता तो जिसने उस जमीन पर कब्जा किया है, उसे उसका मालिक माना जाएगा. हालांकि सुप्रीम कोर्ट का ये फैसला निजी जमीन से जुड़ा है. सरकारी जमीन पर ये फैसला लागू नहीं होगा।
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Property Right : ससुर की संपत्ति में बहू को कितना मिलेगा हक, जानिए क्या कहता है कानूनProperty Right : अधिकतर लोगों में प...
21/09/2023

Property Right : ससुर की संपत्ति में बहू को कितना मिलेगा हक, जानिए क्या कहता है कानून

Property Right : अधिकतर लोगों में प्रोपर्टी से जुड़े नियमों और कानूनों को लेकर जानकारी का अभाव होता है। इसी कड़ी में आज हम आपको अपनी इस खबर में ये बताने जा रहे है कि आखिर ससुर की संपत्ति में बहू को कितना अधिकार मिलेगा....

प्रॉपर्टी को लेकर अक्सर लोगों के मन में कई सवाल होते हैं. खासकर तब, जब वह पिता या ससुर की हो. किसी भी प्रॉपर्टी पर कौन क्लेम कर सकता है? कौन-कौन उसके हकदार हो सकते हैं…. वगैरह-वगैरह. वैसे तो बदलते हुए दौर के साथ नियम-कायदे भी अपडेट होते रहते हैं. संहिताएं भी नए दौर की जरूरत के हिसाब से बदली जाती हैं और कानून भी।

संपत्ति संबंधी कानूनों को लेकर लोगों में जानकारी का अभाव होता है. अक्सर इससे जुड़ी उलझनों और जानकारी की कमी के चलते संपत्ति संबंधी विवाद भी होते हैं. आज हम आपको बताएंगे कि बहू के क्या अधिकार हैं, खासकर ससुराल के घर और संपत्ति में उसका कितना हक है. इस बारे में कानून क्या कहता है….

ये तो सभी को पता है कि सुरक्षा कानून ने महिला को पति के साथ घर में रहने का अधिकार दिया है. यह अधिकार महिला के गुजारा भत्ते और मानसिक शारीरिक हिंसा से बचाव के अधिकार के अलावा है. लेकिन पति की संपत्ति में पत्नी के अधिकारों से संबंधित मुद्दा भी संपत्ति बंटवारे से जुड़ा एक अहम मुद्दा है. पति और ससुराल की संपत्ति में पत्नी का कोई हक है या नहीं और इससे जुड़े कानूनी प्रावधान क्या हैं।

क्या है कानूनी प्रावधान-

जिस व्यक्ति से महिला की शादी हुई है अगर उसके पास खुद से अर्जित की गई कोई संपत्ति है तो इसको लेकर नियम-कानून स्पष्ट हैं. व्यक्ति की खुद से अर्जित संपत्ति चाहे जमीन हो, मकान हो, पैसे हों, गहने हों या कुछ अन्य इस पर पूरी तरह से सिर्फ और सिर्फ उसी व्यक्ति का अधिकार है जिसने संपत्ति अर्जित की है. वह उस संपत्ति को बेच सकता है, गिरवी रख सकता है, वसीयत लिख सकता है यहां तक कि किसी को दान भी दे सकता है. इससे जुड़े सभी अधिकार उसके पास सुरक्षित होते हैं।

20/09/2023

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Property Right : क्या औलाद को बेदखल करने के बाद भी देना होगा संपत्ति में हिस्सा, जानिये कानून में क्या है प्रावधानAncest...
12/09/2023

Property Right : क्या औलाद को बेदखल करने के बाद भी देना होगा संपत्ति में हिस्सा, जानिये कानून में क्या है प्रावधान

Ancestral Property: पैतृक संपत्ति (ancestral property) ऐसी संपत्ति होती है जो आपको पिता के पूर्वजों से मिली हो. पैतृक संपत्ति (ancestral property) कम-से-कम 4 पीढ़ी पुरानी होनी चाहिए. इस बीच परिवार में कोई बंटवारा नहीं होना चाहिए.आइए जानते है इसके बारे में विस्तार से।

कई बार अनचाही परिस्तिथियों के कारण मां-बाप अपने बच्चों को जायदाद से बेदखल कर देते हैं. इसके बाद उन बच्चों को अपने माता-पिता की संपत्ति पर कोई अधिकार नहीं रह जाता है. हालांकि, एक संपत्ति ऐसी भी होती है जिससे बच्चों को मां-बाप द्वारा बेदखल नहीं किया जा सकता है. इसे पैतृक संपत्ति (Ancestral Property Eviction) कहते हैं. तो अगर आपने अपनी संतान कहीं से बेदखल किया भी है तो तब भी वह पैतृक संपत्ति (ancestral property) में दावे के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।

लगभग शत प्रतिशत संभावना है कि कोर्ट का फैसला संतान के पक्ष में ही आएगा. हालांकि, कई बार कोर्ट ऐसे में मामलों में मां-बाप का समर्थन कर देते हैं लेकिन यह उस निर्धारित केस की डिटेल्स और जज के विवेक पर निर्भर करता है. यह अपवाद ही होता है. इसके अलावा कोर्ट भी माता-पिता की इस मामले में कोई मदद नहीं कर पाता है।

क्या होती है पैतृक संपत्ति?

किसी भी शख्स को उसके दादा, परदादा से मिली संपत्ति पैतृक कहलाती है. पैतृक संपत्ति (ancestral property) कम-से-कम 4 पुश्तें पुरानी होनी चाहिए, इस बीच परिवार में कोई बंटवारा नहीं होना चाहिए, अगर बंटवारा होता है तो वह प्रॉपर्टी पैतृक नहीं रह जाएगा, पैतृक संपत्ति (ancestral property) पर पुत्र और पुत्री दोनों का हक होता है, पैतृक संपत्ति को विरासत में मिली संपत्ती भी कहा जा सकता है. हालांकि, विरासत में मिली हर संपत्ति पैतृक नहीं होती. पैतृक संपत्ति के बारे में हिंदू उत्तराधिकार कानून 1956 की धारा 4, 8 और 19 में बात की गई है।

अगर संपत्ति में बंटवारा हो जाता है तो वह पैतृक की जगह खुद से जुटाई गई संपत्ति में तब्दील हो जाती है और इसके माता-पिता अपनी संतान को उस प्रॉपर्टी से बेदखल कर सकते हैं।

सीआरपीसी की धारा 451 | जब्त की गई संपत्ति आवश्यकता से अधिक समय तक पुलिस/अदालत के कस्टडी में नहीं रहनी चाहिए: केरल हाईकोर...
11/09/2023

सीआरपीसी की धारा 451 | जब्त की गई संपत्ति आवश्यकता से अधिक समय तक पुलिस/अदालत के कस्टडी में नहीं रहनी चाहिए: केरल हाईकोर्ट

केरल हाईकोर्ट ने शुक्रवार को सीआरपीसी की धारा 451 के दायरे का विश्लेषण किया। उक्त दायरा आपराधिक अदालतों को किसी अपराध की सुनवाई और पूछताछ के दौरान उसके समक्ष पेश की गई जब्त संपत्ति की अंतरिम कस्टडी के आदेश देने का अधिकार देता है। जस्टिस राजा विजयराघवन वी. की एकल न्यायाधीश पीठ का विचार था कि जब कोई संपत्ति आपराधिक अदालत के समक्ष पेश की जाती है तो उक्त अदालत के पास ऐसा आदेश देने का विवेक होगा, क्योंकि वह ऐसी वस्तु की उचित कस्टडी, जांच या ट्रायल के लिए उचित समझती है।

हालांकि, कोर्ट ने संकेत दिया, "जहां जो संपत्ति किसी अपराध का विषय रही है, पुलिस द्वारा जब्त कर ली जाती है, उसे अदालत या पुलिस की कस्टडी में बिल्कुल आवश्यक समय से अधिक समय तक नहीं रखा जाना चाहिए। जब्ती के रूप में पुलिस द्वारा संपत्ति का स्वामित्व सरकारी कर्मचारी को स्पष्ट रूप से सौंपने के बराबर है, विचार यह है कि संपत्ति को बनाए रखने की आवश्यकता समाप्त होने के बाद उसे मूल मालिक को वापस कर दिया जाना चाहिए।"

'महिंद्रा पिकअप जीप' में ओल्ड एडमिरल वीएसओपी ब्रांडी की 50 बोतलें ले जाने के आरोप के तहत उक्त वाहन को आबकारी अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करने के लिए जब्त कर लिया गया। चेनजम्मा वाहन का रजिस्टर्ड मालिक है। उसने वाहन की रिहाई के लिए मजिस्ट्रेट से संपर्क किया, लेकिन मजिस्ट्रेट द्वारा लगाई गई शर्तों की "कठिन" प्रकृति के कारण उसे रिहा नहीं कराया जा सका, जैसे कि 6,30,000/- रुपये के मूल्य की नकद सुरक्षा के एक बांड माध्यम से निष्पादित करना। इस प्रकार वाहन पिछले दो वर्षों से बदलते मौसम के संपर्क में पड़ा हुआ था, इसी दौरान उक्त चेनजम्मा की मृत्यु हो गई।

इसके बाद, सत्र न्यायालय के समक्ष उनके बेटे के आवेदन को इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि वह यह बताने में सक्षम नहीं था कि वाहन कैसे जब्त किया गया। इस प्रकार वर्तमान याचिका सत्र न्यायालय के उक्त फैसले को चुनौती देती है। इस मामले में न्यायालय का विचार था कि निचली अदालत द्वारा आवेदन को खारिज करना उचित नहीं था और सीआरपीसी की धारा 451 के तहत, जब किसी संपत्ति को पुलिस ने जब्त कर लिया है, तो उसे न्यायालय की हिरासत में नहीं रखा जाना चाहिए या पुलिस की ओर से किसी भी समय आवश्यकता से अधिक समय तक।
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Delhi High Court : क्या पिता की संपत्ति को अपने नाम ट्रांसफर करवा सकता है बेटा, हाइकोर्ट ने सुनाया अहम फैसलाहाईकोर्ट (Hi...
09/09/2023

Delhi High Court : क्या पिता की संपत्ति को अपने नाम ट्रांसफर करवा सकता है बेटा, हाइकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

हाईकोर्ट (High Court) ने पिता की देखरेख न करने और प्रताड़ित करने के आधार पर बेटों के नाम उपहार स्वरूप करोड़ों की संपत्ति (property) के ट्रांसफर को रद्द करने से इनकार कर दिया।

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने 97 वर्ष के एक बुजुर्ग की याचिका को खारिज कर दिया। वकील के माध्यम से दाखिल याचिका में बुजुर्ग ने अपने दो बेटों पर धोखे से संपत्ति गिफ्ट के रूप में अपने नाम करने और प्रताड़ित करने का आरोप लगाया था।

हाईकोर्ट (High Court) ने पिता की देखरेख न करने और प्रताड़ित करने के आधार पर बेटों के नाम उपहार स्वरूप करोड़ों की संपत्ति (property) के ट्रांसफर को रद्द करने से इनकार कर दिया।

कोर्ट (court) ने कहा है कि माता-पिता, वरिष्ठों नगारिकों के भरण-पोषण और कल्याण अधिनियम 2007 की धारा 23 के प्रावधानों को अधिसूचना जारी होने से पहले की तारीख से लागू नहीं किया जा सकता है। इस कानून को 2008 से लागू किया गया था।

चीफ जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली बुजुर्ग की याचिका को खारिज कर दिया।

उन्होंने इस कानून की धारा 23 के उस प्रावधान के संवैधानिक वैधता को चुनौती दी थी, जिसमें कहा गया है कि माता-पिता की मूलभूत जरूरतों को पूरा करने में विफल रहने और उन्हें प्रताड़ित करने पर उनके द्वारा संतानों के नाम उपहार या किसी भी तरह से की गई संपत्ति के ट्रांसफर को अमान्य माना जाएगा।

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