Vishwakarma Vedic Vastu Consultant

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06/11/2019

1. हल्दी के प्रयोग से उपाय विवाह योग लोगों को शीघ्र विवाह के लिये प्रत्येक गुरुवार को नहाने वाले पानी में एक चुटकी ह.....

प्रति वर्ष चातुर्मास में भगवान शयनावस्था में होते है जिसके कारण सभी मांगलिक कार्यो पर रोक लग जाती है। इस वर्ष 2019 को चा...
06/11/2019

प्रति वर्ष चातुर्मास में भगवान शयनावस्था में होते है जिसके कारण सभी मांगलिक कार्यो पर रोक लग जाती है। इस वर्ष 2019 को चार माह की योगनिद्रा के बाद भगवान विष्णु 8 नवंबर को देव प्रबोधिनी एकादशी जिसे देवोत्थान एकादशी या देव उठनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। देव प्रबोधिनी एकादशी वर्ष के स्वयंसिद्ध मुहूर्तों में से एक मानी जाती है। शास्त्रों के अनुसार यही वह दिन होता है जब भगवान अपनी चातुर्मास की निंद्रा से जागते है और यही से विवाह आदि समस्त मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं, लेकिन

प्रति वर्ष चातुर्मास में भगवान शयनावस्था में होते है जिसके कारण सभी मांगलिक कार्यो पर रोक लग जाती है। इस वर्ष 2019 को ...

इस वर्ष गोपाष्टमी का पर्व 4 नवंबर, सोमवार को मनाया जा रहा है। हिन्दू संस्कृति में गाय का विशेष महत्व माना गया है और उन्ह...
02/11/2019

इस वर्ष गोपाष्टमी का पर्व 4 नवंबर, सोमवार को मनाया जा रहा है। हिन्दू संस्कृति में गाय का विशेष महत्व माना गया है और उन्हीं को समर्पित हैं ये गोपाष्टमी पर्व। धार्मिक शास्त्रों के अनुसार दिवाली के ठीक बाद आने वाली कार्तिक शुक्ल अष्टमी को गोपाष्टमी पर्व के रूप में मनाया जाता...

इस वर्ष गोपाष्टमी का पर्व 4 नवंबर, सोमवार को मनाया जा रहा है। हिन्दू संस्कृति में गाय का विशेष महत्व माना गया है और उ....

1. भूकम्प ग्रहण, पूर्णमासी या अमावस्या के आस-पास आते हैं। 2. भूकम्प आधी रात व सूर्य निकले या दोपहर के बाद व सूर्य अस्त ह...
08/05/2018

1. भूकम्प ग्रहण, पूर्णमासी या अमावस्या के आस-पास आते हैं।
2. भूकम्प आधी रात व सूर्य निकले या दोपहर के बाद व सूर्य अस्त होने के मध्य में आते हैं।
3. मंगल व शनि की युति, दृष्टि या सम सप्तम स्थिति होती है।
4. बृहस्पति, शनि व मंगल की वक्रीय स्थिति होती है या वक्रीय स्थिति से मार्गी होते है। उस समय भूकम्प आता है।

भूकम्प ग्रहण, पूर्णमासी या अमावस्या के आस-पास आते हैं। भूकम्प आधी रात व सूर्य निकले या दोपहर के बाद व सूर्य अस्त होन...

What is the basic difference between these 2 brahmsthan ?
30/04/2017

What is the basic difference between these 2 brahmsthan ?

30/04/2017

॥ ॐ श्रीपरमात्मने नमः ॥

नाम-जपकी खास विधि है‒भगवान का होकर भगवान का नाम लें । केवल भगवान ही हमारे हैं और हम भगवान ‌के ही हैं; संसार हमारा नहीं है और हम संसारके नहीं हैं‒यह अगर पक्का विचार हो जाय तो तत्काल लाभ होता है । गोस्वामीजी महाराजने कहा है—

बिगरी जनम अनेक की सुधरे अबहीं आजु ।
होहि राम को नाम जपु तुलसी तजि कुसमाजु ॥ (दोहावली २२)

अनेक जन्मोंकी बिगड़ी हुई बात आज सुधर जाय और आज भी अभी-अभी, इसी क्षण सुधर जाय । कैसे सुधर जाय ? तो कहते हैं कि तू रामजीका होकर रामजीको पुकार । परन्तु हमारेसे भूल यह होती है कि हम संसारके होकर भगवान्‌को पुकारते हैं । संसारके काम-धन्धोंके कारण वक्त नहीं मिलता, हम तो संसारी आदमी हैं, कलियुगी जीव हैं‒इस प्रकार अपने-आपको संसारी और कलियुगी मानोगे तो आपपर संसारका और कलियुगका प्रभाव ज्यादा पड़ेगा; क्योंकि उनके साथ आपने सम्बन्ध जोड़ लिया । बिजलीके तारसे सम्बन्ध जुड़ जाता है तो करेण्ट आ जाता है, ऐसे ही संसार और कलियुगसे सम्बन्ध जोड़ेंगे तो उनका असर जरूर आयेगा । कहते हैं, महाराज ! हम तो खाली राम-राम करते हैं, तो ठोस भरा हुआ क्यों नहीं करते भाई ? मानो भगवान्‌के नाममें तो खालीपना है और सम्बन्ध हमारा संसार और कलियुगसे है ! यह बहुत बड़ी गलती है ।

● श्रद्धेय स्वामीजी श्रीरामसुखदासजी महाराज

राक्षसी संस्कार घर में प्रवेश कर जाते है तब....नैऋृत्य कोण में सुई की नोक के बराबर भी छिद्र छोड़ दिया जाए तो घर में भूत-...
20/08/2016

राक्षसी संस्कार घर में प्रवेश कर जाते है तब....

नैऋृत्य कोण में सुई की नोक के बराबर भी छिद्र छोड़ दिया जाए तो घर में भूत-प्रेत और राक्षस घुस आते हैं ऐसा एक वास्तु ग्रंथ में लिखा है। इसका अर्थ यह है कि घर में राक्षसी संस्कार घुस जाते हैं। धनाधिक्य से जो बुरी आदतें व्यक्ति में प्रवेश कर जाती हैं वे समय आने पर व्यक्ति को नष्ट कर देती हैं।

धन समाप्त हो जाता है शरीर का नाश हो जाता है। लक्ष्मी घर में रूके या न रूके यह निर्णय वास्तु ही करता है। खराब अन्तर्दशाएं आने पर व्यक्ति कोई न कोई ऐसा निर्माण कार्य करता है जो कि वास्तु शास्त्र की दृष्टि से दूषित श्रेणी में आता है और घर में पतन का कारण बनता है।

अधिकांश मामलों में यह होता है कि वास्तु दोष तो पूर्व में ही उपस्थित रहता है जैसे ही कोई खराब अन्तर्दशा आई वह दोष भारी पड़ता है और धन और शान्ति की हानि होती है। जब वे अन्तर्दशा समाप्त होती है तब तक उस वास्तु दोष को जितनी बलि लेनी होती है उतनी बलि ले चुकता है। थोड़ा ठीक चलने लगता है उसके बाद पुन: वही स्थिति आती है।

जिस प्रकार मोबाइल को निरंतर उपयोग में लेने के लिए उसे चार्ज करना जरुरी होता हैं। ठीक उसी प्रकार व्यक्ति भी अपने कार्यों ...
08/05/2014

जिस प्रकार मोबाइल को निरंतर उपयोग में लेने के लिए उसे चार्ज करना जरुरी होता हैं। ठीक उसी प्रकार व्यक्ति भी अपने कार्यों को निष्पादन निरंतर करता रहें। इसके लिए उसे उर्जा की आवश्यकता होती हैं। वास्तुशास्त्र में ऐसे कई रहस्य वर्णित हैं। उन्हीं रहस्यों में से एक हैं। दक्षिण दिशा मध्य से दक्षिण-पश्चिम दिशा में शयनकक्ष का विधान।......

Which Brham Sthan is correct ?
10/06/2013

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