सब का सपना घर हो अपना अपना

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07/02/2025

*🕉️ रात्रि कहानी 🕉️*
*झगडे का मूल*

यह कहानी संत के ज्ञान को दर्शाने वाली कथा है क्यों कि हमेशा ये माना जाता है की साधू, संत, महात्मा और गुरु महाराज के पास उन सभी सांसारिक... समस्याओं का तुरंत हल मिल जाता है जिसके बारे में आज लोग और गृहस्थी हमेशा से ही परेशान रहते हैं।

समाज में साधू,संत,गुरु और मुनि ही हर समस्या की एक मात्र चाबी माने जाते रहे हैं और यह सही भी है की इनके पास जाने मात्र से ही हमारे मन को शांति प्राप्त हो जाती है और फिर जब इनके दो सांत्वना भरे बोल या ज्ञान बढ़ाने वाले शब्द जब हमारे कान में जाते है तो जेसे अन्दर तक आत्मा को ठंडक पहुंचती हैl

इसलिए आज एक ऐसी ही कहानी लेकर आया हूँ जिससे आप गुरु की महिमा को समझ जायेंगे की क्यों और कैसे ये सभी विद्वान जन तुरंत ही हरेक के मन की समस्या का समाधान कर देते हैं।

एक बार गोमल सेठ अपनी दुकान पर बैठे थे दोपहर का समय था इसलिए कोई ग्राहक भी नहीं था तो वो थोडा सुस्ताने लगे इतने में ही एक संत भिक्षा लेने के लिए दुकान पर आ पहुचे। और सेठ जी को आवाज लगाई कुछ देने के लिए...सेठजी ने देखा कि इस समय कौन आया है ? जब उठकर देखा तो एक संत याचना कर रहा था।

सेठ बड़ा ही दयालु था वह तुरंत उठा और दान देने के लिए कटोरी चावल बोरी में से निकाला और संत के पास आकर उनको चावल दे दिया। संत ने सेठ जी को बहुत बहुत आशीर्वाद और दुवाएं दी। तब सेठजी ने संत से हाथ जोड़कर बड़े ही विनम्र भाव से कहा कि हे गुरुजन आपको मेरा प्रणाम मैं आपसे अपने मन में उठी शंका का समाधान पूछना चाहता हूँ। संत ने कहा की जरुर पूछो -

तब सेठ जी ने कहा की लोग आपस में लड़ते क्यों है ? संत ने सेठजी के इतना पूछते ही शांत स्वभाव और वाणी में कहा कि सेठ मै तुम्हारे पास भिक्षा लेने के लिए आया हूँ तुम्हारे इस प्रकार के मूर्खता पूर्वक सवालो के जवाब देने नहीं आया हूँ। संत के मुख से इतना सुनते ही सेठ जी को क्रोध आ गया और मन में सोचने लगे की यह कैसा घमंडी और असभ्य संत है ?

ये तो बड़ा ही कृतघ्न है एक तरफ मैंने इनको दान दिया और ये मेरे को ही इस प्रकार की बात बोल रहे हैं इनकी इतनी हिम्मत और ये सोच कर सेठजी को बहुत ही गुस्सा आ गया और वो काफी देर तक उस संत को खरी खोटी सुनाते रहे और जब अपने मन की पूरी भड़ास निकाल चुके तब कुछ शांत हुए तब संत ने बड़े ही शांत और स्थिर भाव से कहा कि जैसे ही मैंने कुछ बोला आपको गुस्सा आ गया और आप गुस्से से भर गए और लगे जोर जोर से बोलने और चिल्लाने लगे।

*वास्तव में केवल विवेक हीनता ही सब झगडों का मूल है यदि सभी लोग विवेकी हो जाये तो अपने गुस्से पर काबू रख सकेंगे या हर परिस्थिति में प्रसन्न रहना सीख जाये तो दुनिया में झगडे कभी नहीं होंगे ..!!*
*जयश्री कृष्ण*

*🙏शुभ रात्रि🙏*
ज्ञान चन्द सोनी
9610007689

18/02/2023

सनातन धर्म और संस्कृति के आधार हमारे पुराणों व महाकाव्यों की रक्षा कैसे करें? वैसे, क्या सनातन धर्म को सुरक्षा की जरूरत है? नहीं, क्योंकि अगर वह शाश्वत है, तो मैं और आप उसकी सुरक्षा करने वाले कौन होते हैं? लेकिन इस सनातन धर्म तक कैसे पहुंचें और इन नियमों के जानकार कैसे हों, और उसे अपने जीवन में कैसे लागू करें. इन पहलुओं के बारे में आज की भाषा में, आज की शैली में, और आज के तरीके में बताए जाने की जरूरत है, ताकि यह इस पीढ़ी के लोगों को आकर्षक लगे. वे इसे इसलिए नहीं अपनाने वाले हैं क्योंकि आप इसे कीमती बता रहे हैं. आप इसे उनके दिमाग में नहीं डाल सकते. आपको उन्हें इसकी कीमत का एहसास दिलाना होगा, आपको उन्हें यह दिखाना होगा कि यह कैसे कार्य करता है. सिर्फ तभी वे इसे अपनाएंगे. सनातन धर्म को सुरक्षा की जरूरत नहीं है. इसे जिए जाने की जरूरत है, हमारे वेदों, पुराणों, महाकाव्यों, को पढने लिखने व मनन कर इसे हमारी जीवनशैली के जरिए हम सब के अंदर जीवित रहना चाहिए. अगर हम ऐसा नहीं करते, तो इसकी रक्षा करने से ये अलग-थलग हो जाएगा.

्रीराम 🚩


#राजकुमार_दास_जी
#रामायण_जी
#वाल्मीकी_रामायण
#अयोध्या_जी



18/02/2023

्रीराम 🚩


#राजकुमार_दास_जी
#रामायण_जी
#वाल्मीकी_रामायण
#अयोध्या_जी



*सादर प्रणाम*चैत्र शुक्ला एकम वर्ष प्रतिपदा भारतीय नव वर्ष- विक्रम संवत 2079 आप सभी के लिए मंगलमय हो ईश्वर कृपा से आप अप...
02/04/2022

*सादर प्रणाम*
चैत्र शुक्ला एकम वर्ष प्रतिपदा भारतीय नव वर्ष- विक्रम संवत 2079 आप सभी के लिए मंगलमय हो ईश्वर कृपा से आप अपने परिवार, इष्ट मित्र सहित स्वस्थ,प्रसन्न और दीर्घायु रहे इसी आशा और विश्वास के साथ भारतीय नव बर्ष की शुभकामनाएं

होली की बहोत बहोत हार्दिक शुभकामनाएं #होली
16/03/2022

होली की बहोत बहोत हार्दिक शुभकामनाएं

#होली

05/01/2022

पत्नी वामांगी क्यों कहलाती है?
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शास्त्रों में पत्नी को वामंगी कहा गया है, जिसका अर्थ होता है बाएं अंग का अधिकारी। इसलिए पुरुष के शरीर का बायां हिस्सा स्त्री का माना जाता है।

इसका कारण यह है कि भगवान शिव के बाएं अंग से स्त्री की उत्पत्ति हुई है जिसका प्रतीक है शिव का अर्धनारीश्वर शरीर। यही कारण है कि हस्तरेखा विज्ञान की कुछ पुस्तकों में पुरुष के दाएं हाथ से पुरुष की और बाएं हाथ से स्त्री की स्थिति देखने की बात कही गयी है।

शास्त्रों में कहा गया है कि स्त्री पुरुष की वामांगी होती है इसलिए सोते समय और सभा में, सिंदूरदान, द्विरागमन, आशीर्वाद ग्रहण करते समय और भोजन के समय स्त्री पति के बायीं ओर रहना चाहिए। इससे शुभ फल की प्राप्ति होती।

वामांगी होने के बावजूद भी कुछ कामों में स्त्री को दायीं ओर रहने के बात शास्त्र कहता है। शास्त्रों में बताया गया है कि कन्यादान, विवाह, यज्ञकर्म, जातकर्म, नामकरण और अन्न प्राशन के समय पत्नी को पति के दायीं ओर बैठना चाहिए।

पत्नी के पति के दाएं या बाएं बैठने संबंधी इस मान्यता के पीछे तर्क यह है कि जो कर्म संसारिक होते हैं उसमें पत्नी पति के बायीं ओर बैठती है। क्योंकि यह कर्म स्त्री प्रधान कर्म माने जाते हैं।

यज्ञ, कन्यादान, विवाह यह सभी काम पारलौकिक माने जाते हैं और इन्हें पुरुष प्रधान माना गया है। इसलिए इन कर्मों में पत्नी के दायीं ओर बैठने के नियम हैं।

क्या आप जानते हैं?????

सनातन धर्म में पत्नी को पति की वामांगी कहा गया है, यानी कि पति के शरीर का बांया हिस्सा, इसके अलावा पत्नी को पति की अर्द्धांगिनी भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है पत्नी, पति के शरीर का आधा अंग होती है, दोनों शब्दों का सार एक ही है, जिसके अनुसार पत्नी के बिना पति अधूरा है।

पत्नी ही पति के जीवन को पूरा करती है, उसे खुशहाली प्रदान करती है, उसके परिवार का ख्याल रखती है, और उसे वह सभी सुख प्रदान करती है जिसके वह योग्य है, पति-पत्नी का रिश्ता दुनिया भर में बेहद महत्वपूर्ण बताया गया है, चाहे सोसाइटी कैसी भी हो, लोग कितने ही मॉर्डर्न क्यों ना हो जायें, लेकिन पति-पत्नी के रिश्ते का रूप वही रहता है, प्यार और आपसी समझ से बना हुआ।

हिन्दू धर्म के प्रसिद्ध ग्रंथ महाभारत में भी पति-पत्नी के महत्वपूर्ण रिश्ते के बारे में काफी कुछ कहा गया है, भीष्म पितामह ने कहा था कि पत्नी को सदैव प्रसन्न रखना चाहिये, क्योंकि, उसी से वंश की वृद्धि होती है, वह घर की लक्ष्मी है और यदि लक्ष्मी प्रसन्न होगी तभी घर में खुशियां आयेगी, इसके अलावा भी अनेक धार्मिक ग्रंथों में पत्नी के गुणों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया है।

आज हम आपको गरूड पुराण, जिसे लोक प्रचलित भाषा में गृहस्थों के कल्याण की पुराण भी कहा गया है, उसमें उल्लिखित पत्नी के कुछ गुणों की संक्षिप्त व्याख्या करेंगे, गरुण पुराण में पत्नी के जिन गुणों के बारे में बताया गया है, उसके अनुसार जिस व्यक्ति की पत्नी में ये गुण हों, उसे स्वयं को भाग्यशाली समझना चाहिये, कहते हैं पत्नी के सुख के मामले में देवराज इंद्र अति भाग्यशाली थे, इसलिये गरुण पुराण के तथ्य यही कहते हैं।

सा भार्या या गृहे दक्षा सा भार्या या प्रियंवदा।
सा भार्या या पतिप्राणा सा भार्या या पतिव्रता।।

गरुण पुराण में पत्नी के गुणों को समझने वाला एक श्लोक मिलता है, यानी जो पत्नी गृहकार्य में दक्ष है, जो प्रियवादिनी है, जिसके पति ही प्राण हैं और जो पतिपरायणा है, वास्तव में वही पत्नी है, गृह कार्य में दक्ष से तात्पर्य है वह पत्नी जो घर के काम काज संभालने वाली हो, घर के सदस्यों का आदर-सम्मान करती हो, बड़े से लेकर छोटों का भी ख्याल रखती हो।

जो पत्नी घर के सभी कार्य जैसे- भोजन बनाना, साफ-सफाई करना, घर को सजाना, कपड़े-बर्तन आदि साफ करना, यह कार्य करती हो वह एक गुणी पत्नी कहलाती है, इसके अलावा बच्चों की जिम्मेदारी ठीक से निभाना, घर आये अतिथियों का मान-सम्मान करना, कम संसाधनों में भी गृहस्थी को अच्छे से चलाने वाली पत्नी गरुण पुराण के अनुसार गुणी कहलाती है, ऐसी पत्नी हमेशा ही अपने पति की प्रिय होती है।

प्रियवादिनी से तात्पर्य है मीठा बोलने वाली पत्नी, आज के जमाने में जहां स्वतंत्र स्वभाव और तेज-तरार बोलने वाली पत्नियां भी है, जो नहीं जानती कि किस समय किस से कैसे बात करनी चाहियें, इसलिए गरुण पुराण में दिए गए निर्देशों के अनुसार अपने पति से सदैव संयमित भाषा में बात करने वाली, धीरे-धीरे व प्रेमपूर्वक बोलने वाली पत्नी ही गुणी पत्नी होती है।

पत्नी द्वारा इस प्रकार से बात करने पर पति भी उसकी बात को ध्यान से सुनता है, व उसके इच्छाओं को पूरा करने की कोशिश करता है, परंतु केवल पति ही नहीं, घर के अन्य सभी सदस्यों या फिर परिवार से जुड़े सभी लोगों से भी संयम से बात करने वाली स्त्री एक गुणी पत्नी कहलाती है, ऐसी स्त्री जिस घर में हो वहां कलह और दुर्भाग्य कबीनहीं आता।

पतिपरायणा यानी पति की हर बात मानने वाली पत्नी भी गरुण पुराण के अनुसार एक गुणी पत्नी होती है, जो पत्नी अपने पति को ही सब कुछ मानती हो, उसे देवता के समान मानती हो तथा कभी भी अपने पति के बारे में बुरा ना सोचती हो वह पत्नी गुणी है, विवाह के बाद एक स्त्री ना केवल एक पुरुष की पत्नी बनकर नये घर में प्रवेश करती है, वरन् वह उस नये घर की बहु भी कहलाती है, उस घर के लोगों और संस्कारों से उसका एक गहरा रिश्ता बन जाता है।

इसलिए शादी के बाद नए लोगों से जुड़े रीति-रिवाज को स्वीकारना ही स्त्री की जिम्मेदारी है, इसके अलावा एक पत्नी को एक विशेष प्रकार के धर्म का भी पालन करना होता है, विवाह के पश्चात उसका सबसे पहला धर्म होता है कि वह अपने पति व परिवार के हित में सोचे, व ऐसा कोई काम न करे जिससे पति या परिवार का अहित हो।

गरुण पुराण के अनुसार जो पत्नी प्रतिदिन स्नान कर पति के लिए सजती-संवरती है, कम बोलती है, तथा सभी मंगल चिह्नों से युक्त है, जो निरंतर अपने धर्म का पालन करती है तथा अपने पति का ही हीत सोचती है, उसे ही सच्चे अर्थों में पत्नी मानना चाहियें, जिसकी पत्नी में यह सभी गुण हों, उसे स्वयं को देवराज इंद्र ही समझना चाहियें।

जय श्री राम!
जय महादेव!
🚩🚩🚩🚩🚩

मेहरबाई टाटा (1879~1931) जमशेदजी टाटा की बहू और बडे बेटे दोराबजी टाटा की पत्नी थी और नारी शक्ति की प्रतीक थी! तस्वीर मे ...
25/12/2021

मेहरबाई टाटा (1879~1931) जमशेदजी टाटा की बहू और बडे बेटे दोराबजी टाटा की पत्नी थी और नारी शक्ति की प्रतीक थी! तस्वीर मे इन्होंने गले मे पति दोराबजी द्वारा भेंट किया गया 245 कैरेट का प्रसिद्ध जुबली डायमंड जो की वजन मे कोहिनूर से दोगुना था, पहना है! इनकी कैंसर से असमय मृत्यु के बाद यह हीरा बेचकर ही दोराबजी टाटा ने टाटा मेमोरियल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की थी!

प्रेम के लिये बनाया गया यह स्मारक मानवता के लिये एक उपहार है! विडम्बना देखिये हम प्रेम स्मारक के रुप मे कब्रों को महिमामंडित करते रहते हैं और जो हमें जीवन प्रदान करता है, उसके बारे मे जानते तक नहीं है!

साभार

" कुछ मीठे के बजाए "गजक" हो जाए ........"गजक ........ तिलों से बनने वाली यह मिठाई कितनी पुरानी है ? करीब 4-5 हजार वर्ष प...
20/11/2021

" कुछ मीठे के बजाए "गजक" हो जाए ........"

गजक ........ तिलों से बनने वाली यह मिठाई कितनी पुरानी है ? करीब 4-5 हजार वर्ष पुरानी। यह संसार की सबसे पुरानी मिठाइयों में से एक है। गुजरात के कच्छ जिले में हाल ही पुरातत्व विद्वानों ने जो हड़प्पा कालीन स्थल खोजा है वहां तिल भी मिले हैं और गुड़ के अवशेष भी.. प्राचीन भारत में तिलोदन (तिलों की खीर) का भी उल्लेख है और राजस्थान-मध्यप्रदेश-गुजरात के आदिवासी इलाकों में आज भी आदिवासी और किसान लोग सर्दियों में तिल गुड़ और घी का बना पकवान खाते हैं। इस पकवान का नाम ही है "जंगल"...यह जंगल राजस्थान में गुजरात सरहद से लेकर भीलवाड़ा-अजमेर की अरावली पहाड़ी के गांवों-कस्बों तक आज भी खाया जाता है .....

विश्व में सर्वाधिक मानव गुफाएं और रॉक पेंटिंग खोजने वाले महान पुरातत्वविद ओमप्रकाश कुक्की कहते हैं कि भारत में तिल चौथ का त्योहार ही बहुत बड़ा साक्ष्य है इतिहास का, गजक का और तिलोदन का ......

भारत जहां 13 हजार से अधिक मिठाई और मीठे पकवान बनते हों, वहां बाजार की ताकतों ने हमें "कुछ मीठा हो जाए" की विज्ञापन पंच लाइन से चॉकलेट खाना सिखा दिया। सिखा दिया वहां तक भी कोई बात नहीं लेकिन गजक जैसी गज़ब मिठाई खाना भुला दिया। शेष काम डायबिटिज के डॉक्टराना डर ने कर दिया ......लोगों से मीठा ही छुड़वा दिया ...... गजक ना केवल पौष्टिक है बल्कि स्वादिष्ट भी। उत्तर भारत में तो सर्दियों की रातों में गजक का आनंद ही कुछ और है .......

जयपुर में भी गजक खूब प्रसिद्ध है। पग-पग पर गजक के नाम से करीब 10 हजार दुकानें हैं। फ़िर राजस्थान में ब्यावर की तिलपट्टी और मध्यप्रदेश के मुरैना की गजक भी देश की सरहदें लांघ चुकी हैं। भारत के साथ षड़यंत्र कुछ ऐसे-ऐसे हुए हैं कि हलवा, जलेबी, कलाकन्द तक को विदेशी धरती का बता दिया जाता है जबकि भारत में यह चीजें तब भी बन रही थी जब शेष दुनिया शौच जाना भी ठीक से नहीं सीखी थी ......

भारत के साथ संकट यह है कि वो इतना उदारमना है कि जो इरफानूद्दीन थापर कह दे इतिहास के नाम पर उसे ही मान लेता है और अब तो बाजार में नए-नए मणिशंकर खुर्शीद भी इतिहासकार हो रहे हैं ...... खैर देशी-विदेशी भी छोड़ो यह बताएं कि जो मजा करारी गजक और कुरकुरी तिलपट्टी और ताकतवर जंगल में है वो चॉकलेट या केक पेस्ट्री में आता है क्या ? सच सच बताना .......
लेखक : वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र शर्मा

तिल : तिलहन से जुड़ी रोचक मान्यताएं

राजस्थान, गुजरात, मालवा और हरयाणा में कहावत है : जिण घरै काळा तिल चाब्या, उण घरै जाणौ पड़सी ! मतलब है कि जहां पर कृष्णतिल खाए हों, वहां ब्याह होगा।
बेटियों के लिए खासकर यही कहा जाता है कि "कहां जाएगी?" " जिण देहरी रा काला तिल चाबिया, वठै, अजु कठै!
"कौन आएगी?"
"जिण धीवड़ी इण आंगणै काळा तिल खाया हुवैला।"
है ना रोचक ! तिल चबाने से संबंध ! और वह भी अगले जन्म मे! नई वधू को थाल एँठाने (मुंह झूठा कराने) की परंपरा आज भी है जिसमें रोटियों में चिमटी भर तिल मिलाए जाते हैं सास के हाथों।

मकर संक्रान्ति के अवसर पर न्यौतकर तिल-गुड़ खिलाने, चबाने और अंगीरों पर तिड़तिड़ाने की परंपरा है तो तर्पण आदि के अवसर पर तिल के प्रयोग की रीति है। विदर्भ, कौंकण महाराष्ट्र में तिल-गुळ की परंपरा ऐसी ही है ।

पिंडदान में भी आटे में तिल डाले जाते हैं। चित्तौड़गढ़ के 14 वीं सदी के एक शिलालेख में नदी की मछलियों के लिए कहा गया है कि वे ऐसे पिंड के विसर्जन पर खाने के लिए टूट पड़ती है जिनमें तिल डाला गया हो। विचार यह है कि तिलदान के पुण्य स्वरूप स्वर्गस्थ को छुटकारा मिलता है।

हमारी परंपराओं की पीठिका यूं ही तैयार नहीं हुई, उनको सुदीर्घ विश्वास के बाद निर्धारित किया गया है। इनमें तिल को लेकर जो विश्वास है, वे मूंगफली को लेकर नहीं क्योंकि वह बहुत बाद में हमारे जीवन का हिस्सा बनी। हां, सरसों को लेकर भी कई मान्यताएं हैं। तिल-तिल विश्वास ने तिल को तेवरदार किया है। है न? आपके आसपास भी ऐसी मान्यताएं होंगी ही, जानते हैं तो बताइयेगा और जानकारी न हो तो पूछकर पता कीजियेगा :)
जय-जय।

जाड़े की दस्‍तक और गुड का स्‍वाद...

जाड़े ने दस्‍तक दे दी है। सिर पर पंखों की पंखडि़यां थमती जा रही है और रजाई या कंबल चढ़ती जा रही है। मार्गशीर्ष आरंभ। आयुर्वेद तो कहता है : मार्गशीर्षे न जीरकम्। जीरा इस दौरान नहीं खाएं मगर कहने से कौन मानेगा, जीरा सेक कर गुड़ में मिलाकर खाएं तो खांसी जाए। हां, शक्‍कर से दूरी रखी जाए। गुड़ से याद आया कि इस दौर में तिल और गुड़ खाने और गन्‍ने चूसने की इच्‍छा हाेती है। ये इच्‍छा कालिदास की भी हाेती थी। तभी तो ऋतु वर्णन में उन्‍होंने इस बात का इजहार किया है :

प्रचुर गुडविकार: स्‍वादुशालीक्षुरम्‍य। (ऋतुसंहार 16)

हमारे यहां गुड के कई व्‍यंजन बनाए जाते हैं। गुड़ में तिल को मिलाकर घाणी करवाई जाती है। आज घाणी को कोल्‍हू के नाम से जाना जाता है। कई जगह खुदाइयों में घाणियां मिली है। (देखिये चित्र में लेखांकित घाणी) इसे तेलयंत्र के नाम से नरक के वर्णनों में लिखा गया है। शिल्‍परत्‍नम् में घाणी बनाने की विधि को लिखा गया है।
घाणी में पिलकर तिल-कूटा तैयार होता है... गजक तो खास है ही। गजक-रेवड़ी, बाजरे का रोट और गुड़, गुड़-धानी, गुड-राब... और न जाने क्‍या-क्‍या। आपके उधर भी बनते ही होंगे। मगर, खास बात ये कि गुड एक ऐसा शब्‍द है जो संस्‍कृत में मीठे के लिए आता है।

दक्षिण के कुछ पाठों में 'गुल' शब्‍द भी मिलता है मगर वह गुड़ ही है। अनुष्‍ठानों में देवताओं की प्रसन्‍नता के लिए गुड़, गुडोदन, गुडपाक, गुलगुले आदि के चरु चढ़ाने का साक्ष्‍य कई अभिलेखों में भी मिलता है। सल्‍तनकालीन संदर्भों में इसके भाव भी लिखे मिलते हैं। बनारस के इलाके का गुड और खांड दोनों ही ख्‍यात थे। गुड शब्‍द देशज भी है और शास्‍त्रीय भी। मगर अपना मूल रूप मिठास की तरह ही बरकरार रखे हुए है, इस स्‍वाद का गुड़ गोबर नहीं हुआ। यदि अंधेरे में भी यह शब्‍द सुन लिया जाए तो भी जीभ उसकी मीठास जान लेती है।

#गजक #तिलपट्टी #घाणी #कोलुकाबेल #जयपुर

*कौन थे राजा वीर विक्रमादित्य..... ????**बड़े ही दुर्भाग्य की बात है कि महाराज विक्रमदित्य के बारे में देश को लगभग शून्य ...
19/10/2021

*कौन थे राजा वीर विक्रमादित्य..... ????*
*बड़े ही दुर्भाग्य की बात है कि महाराज विक्रमदित्य के बारे में देश को लगभग शून्य बराबर ज्ञान है, जिन्होंने भारत को सोने की चिड़िया बनाया था, और स्वर्णिम काल लाया था!*
*उज्जैन के राजा थे , जाट पंवार गोत्र के चक्रवर्ती राजा गन्धर्वसैन जिनके तीन संताने थी , सबसे बड़ी लड़की थी मैनावती , उससे छोटा लड़का भृतहरि और सबसे छोटा वीर विक्रमादित्य...*
*बहन मैनावती की शादी धारानगरी के राजा पदमसैन के साथ कर दी जिनके एक लड़का हुआ गोपीचन्द , आगे चलकर गोपीचन्द ने श्री ज्वालेन्दर नाथ जी से योग दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए , फिर मैनावती ने भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग दीक्षा ले ली ,*
*आज ये देश और यहाँ की संस्कृति केवल विक्रमादित्य के कारण अस्तित्व में है।*
*अशोक मौर्य ने बोद्ध धर्म अपना लिया था और बोद्ध बनकर 25 साल राज किया था.....भारत में तब सनातन धर्म लगभग समाप्ति पर आ गया था, देश में बौद्ध और जैन हो गए थे।*
*रामायण, और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे, महाराज विक्रम ने ही पुनः उनकी खोज करवा कर स्थापित किया*
*विष्णु और शिव जी के मंदिर बनवाये और सनातन धर्म को बचाया।*
*राजा विक्रमादित्य का शासन लगभग पूरी धरती पर था , मिस्र , अरब , इराक , ईरान तक और संपूर्ण धरती उनके नाम से उस समय परिचित थी।*
*इतना सम्पन्नता कि सोने के बदले कपड़े खरीदे जाते थे।*

*विक्रमादित्य के 9 रत्नों में से एक कालिदास ने अभिज्ञान शाकुन्तलम् लिखा, जिसमे भारत का इतिहास है।*
*अन्यथा भारत का इतिहास क्या मित्रो हम भगवान् कृष्ण और राम को ही खो चुके थे।*
*हमारे ग्रन्थ ही भारत में खोने के कगार पर आ गए थे,*
*उस समय उज्जैन के राजा भृतहरि ने राज छोड़कर श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग की दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए , राज अपने छोटे भाई विक्रमादित्य को दे दिया , वीर विक्रमादित्य भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से गुरू दीक्षा लेकर राजपाट सम्भालने लगे और आज उन्ही के कारण सनातन धर्म बचा हुआ है ,हमारी संस्कृति बची हुई है।राजा भृतहरि ने ही हरिद्वार में हर की पौड़ी का निर्माण करवाया। उज्जैन में पहली समय देखने वाली घड़ी बनवाई। नक्षत्र विज्ञान व काल गणना हेतु केंद्र स्थापित किया।*

*महाराज विक्रमादित्य ने केवल धर्म ही नही बचाया*
*उन्होंने देश को आर्थिक तौर पर सोने की चिड़िया बनाई, उनके राज को ही भारत का स्वर्णिम राज कहा जाता है*
*विक्रमादित्य के काल में भारत का कपडा, विदेशी व्यापारी सोने के वजन से खरीदते थे।*
*भारत में इतना सोना आ गया था की, विक्रमादित्य काल में सोने की सिक्के चलते थे , आप गूगल इमेज कर विक्रमादित्य के सोने के सिक्के देख सकते हैं।पूर्णमासी अमावस को आधार मान तारीख बना विक्रम संवत की शुरुआत की।*
*शकों व हूणों के आतंक को समूल खत्म किया।*
*हिन्दू विक्रम कैलंडर भी चक्रवर्ती राजा विक्रमादित्य द्वारा स्थापित किया गया।*
*आज जो भी ज्योतिष गणना है जैसे , हिन्दी सम्वंत , वार , तिथियां , राशि , नक्षत्र , गोचर आदि उन्ही की रचना है । वे बहुत ही पराक्रमी , बलशाली और बुद्धिमान राजा थे ।*
*कई बार तो देवता भी उनसे न्याय करवाने आते थे ,आज भी विक्रम बेताल की न्याय की कहानियां प्रचलित है।*
*विक्रमादित्य के काल में हर नियम धर्मशास्त्र के हिसाब से बने होते थे । न्याय व राज सब धर्मशास्त्र के नियमों को आधार बनाकर ही चलता था।*

*विक्रमादित्य का काल राम राज के बाद सर्वश्रेष्ठ माना गया है। जहाँ प्रजा धनवान और धर्म पर चलने वाली थी।*
* कृपया आप शेयर तो करें ताकि देश जान सके कि सोने की चिड़िया वाला देश का राजा कौन था ?*.... 🙏❤️

आश्विनस्य सिते पक्षे दशम्यां तारकोदये।स कालो विजयो ज्ञेयः सर्वकार्यार्थसिद्धये।।बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय...
15/10/2021

आश्विनस्य सिते पक्षे दशम्यां तारकोदये।
स कालो विजयो ज्ञेयः सर्वकार्यार्थसिद्धये।।

बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय के महापर्व #विजयादशमी की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।




#दशहरा

🙏🏻🌹 श्री कृष्ण जन्माष्टमी की सभी वैष्णवो जन को बहुत बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏻🌹
30/08/2021

🙏🏻🌹 श्री कृष्ण जन्माष्टमी की सभी वैष्णवो जन को बहुत बहुत बधाई एवं हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏻🌹

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