12/05/2026
#लूणी आज अपने #इतिहास के सबसे भीषण जल संकट से गुजर रहा है… हर गांव, हर ढाणी और हर गली से सिर्फ एक ही आवाज़ सुनाई दे रही है — “पानी पानी पानी…”
भीषण गर्मी ने आमजन का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। सुबह होते ही माताएं-बहनें सिर पर मटके उठाकर पानी की तलाश में निकल पड़ती हैं। कहीं 2 किलोमीटर तो कहीं 4-5 किलोमीटर दूर तक सिर्फ इस उम्मीद में जाना पड़ रहा है कि शायद आज घर के लिए दो बाल्टी पानी मिल जाए। टैंकर आते हैं तो वहां इंसानों की नहीं, मजबूरी की भीड़ दिखाई देती है। घंटों धूप में खड़े रहकर लोग अपनी बारी का इंतजार करते हैं। छोटे-छोटे बच्चे, बुजुर्ग, किसान, मजदूर — हर वर्ग आज पानी की समस्या से त्रस्त है।
यह स्थिति केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव-गांव में हालात भयावह होते जा रहे हैं। कई जगह पाइपलाइनों में दिनों तक पानी नहीं पहुंचता। कई गांवों में टैंकर ही एकमात्र सहारा बन चुके हैं। तालाब सूख चुके हैं, कुएं जवाब दे चुके हैं, हैंडपंप बंद पड़े हैं और सरकारी दावों की पोल पूरी तरह खुल चुकी है।
सबसे दुखद और शर्मनाक बात यह है कि लूणी का प्रतिनिधित्व करने वाला व्यक्ति आज राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री है। इसके बावजूद लूणी की जनता प्यास से तड़प रही है। जनता ने उम्मीद की थी कि सरकार में मजबूत भागीदारी होने से क्षेत्र में विकास होगा, पानी जैसी मूलभूत समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा, लेकिन आज हालात पहले से भी ज्यादा खराब दिखाई दे रहे हैं।
“डबल इंजन सरकार” के बड़े-बड़े विज्ञापन और दावे आज धरातल पर पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। यदि सरकार सच में संवेदनशील होती, तो आज माताओं-बहनों को मटके लेकर सड़कों पर भटकना नहीं पड़ता। यदि सरकार गंभीर होती, तो पशुओं को प्यास से दम नहीं तोड़ना पड़ता।
आज लूणी में इंसान ही नहीं, जीव-जंतु और पशु-पक्षियों की हालत भी बेहद दयनीय हो चुकी है। गांवों में पशुपालक अपने पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। पक्षी प्यास से इधर-उधर भटक रहे हैं। कई स्थानों पर पशुधन को बचाना भी मुश्किल हो गया है। यह केवल जल संकट नहीं, बल्कि जीवन संकट बन चुका है।
चुनाव के समय जनता से बड़े-बड़े वादे किए गए थे — हर घर पानी पहुंचेगा… क्षेत्र में विकास होगा… जल योजनाओं को मजबूत किया जाएगा… लेकिन आज सच्चाई यह है कि जनता अपने अधिकार के पानी के लिए संघर्ष कर रही है और सरकार केवल आंकड़ों और भाषणों में व्यस्त है।
राजस्थान पत्रिका सहित कई समाचार माध्यमों ने भी जमीनी हकीकत उजागर की है कि लूणी क्षेत्र में लोग पानी के लिए किस तरह संघर्ष कर रहे हैं। 120 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन होने के बावजूद गांवों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा। टैंकरों के भरोसे जीवन चल रहा है। आंगनबाड़ी केंद्र तक पानी के अभाव से जूझ रहे हैं। यह स्थिति सरकार की विफलता और प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण है।
मैं,राजस्थान सरकार से मांग करता हूं कि —
लूणी क्षेत्र में तुरंत प्रभाव से पर्याप्त पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।हर गांव और ढाणी में नियमित एवं पारदर्शी टैंकर व्यवस्था लागू की जाए। खराब पड़ी पाइपलाइनों और जल योजनाओं को युद्ध स्तर पर दुरुस्त किया जाए। जलदाय विभाग की लापरवाही की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।पशुओं और पक्षियों के लिए भी विशेष जल व्यवस्था की जाए।लूणी क्षेत्र के लिए दीर्घकालीन और स्थायी जल प्रबंधन योजना लागू की जाए।
मैं लूणी की जनता को विश्वास दिलाता हूं कि आपकी आवाज़ को हर मंच पर मजबूती से उठाया जाएगा। यह लड़ाई राजनीति की नहीं, जनता के अधिकार और जीवन की लड़ाई है। पानी कोई एहसान नहीं, हर नागरिक का मूल अधिकार है।
यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं किया, तो लूणी की जनता के साथ मिलकर बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा और जनता की आवाज़ सड़क से लेकर सदन तक बुलंद की जाएगी।
लूणी अब और उपेक्षा सहन नहीं करेगा। जनता अब जवाब मांग रही है। जनता अब समाधान चाहती है।
CMO Rajasthan
District Collector & Magistrate, Jodhpur
Bhajanlal Sharma