Likhmesh sau jaisalmer

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 #राजस्थान के थार  #रेगिस्तान में "रुपये क्या आक पर उगते हैं" वाली पारंपरिक कहावत अब हकीकत में बदल चुकी है। रुमा देवी फा...
18/05/2026

#राजस्थान के थार #रेगिस्तान में "रुपये क्या आक पर उगते हैं" वाली पारंपरिक कहावत अब हकीकत में बदल चुकी है। रुमा देवी फाउंडेशन और उत्तर भारत वस्त्र अनुसंधान संघ (निट्रा) की 'आक से आमदनी' पहल के तहत बेकार समझे जाने वाले आक (मदार) के पौधे के पोड्स (आकपाड़िए) से कीमती प्राकृतिक रेशा निकाला जा रहा है। वजन में बेहद हल्के और अत्यधिक गर्माहट देने वाले इस अनूठे रेशे से जैकेट, शॉल, स्वेटर और आकर्षक बैग तैयार किए जा रहे हैं। कपड़ा विशेषज्ञों के अनुसार, इस रेशे से बने गर्म कपड़े -20°C से -40°C तक के हाड़ कंपाने वाले भीषण ठंडे तापमान में भी शरीर को पूरी तरह गर्म रखने में सक्षम हैं, जिसके कारण इसकी मांग विदेशों तक पहुंच गई है।
सूखी और अनुपजाऊ जमीन पर बिना पानी और विशेष देखभाल के उगने वाला यह पौधा लगाने के पहले साल से ही पोड्स देना शुरू कर देता है और अगले 10 से 12 साल तक लगातार उत्पादन देता है। बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर और बीकानेर सहित कई जिलों की ग्रामीण महिलाएं अब बड़े पैमाने पर इस मुहिम से जुड़कर घर बैठे बेहतरीन रोजगार पा रही हैं। फाउंडेशन सीधे इन महिलाओं से आक के पोड्स खरीद रहा है, जिससे उन्हें आमदनी का एक स्थाई और आत्मनिर्भर जरिया मिल गया है। जो पौधा कभी अनुपयोगी खरपतवार माना जाता था, वह आज थार के रेगिस्तान में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और महिलाओं को सशक्त बनाने का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है।

 #नीट जैसी  #परीक्षा का पेपर लीक हो जाना न केवल एक परीक्षा का प्रश्न है बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न...
13/05/2026

#नीट जैसी #परीक्षा का पेपर लीक हो जाना न केवल एक परीक्षा का प्रश्न है बल्कि पूरे सिस्टम की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न है। नीट पेपर के लीक होने से मेहनत करने वाले लाखों #विद्यार्थियों और उनके परिवारों का भरोसा टूटा है। जिन बच्चों ने दिन-रात मेहनत की, उनके सपनों के साथ खिलवाड़ किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
यह मामला सिर्फ एक परीक्षा रद्द होने तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि इतनी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था आखिर क्यों विफल हुई ? हर बार मेहनतकश करने वाले छात्रों को ही कीमत क्यों चुकानी पड़ती है ?
आज इस परीक्षा से जुड़े अभ्यर्थियों और उनके परिजनों का एक ही प्रश्न है कि विद्यार्थियों के मानसिक, आर्थिक और शैक्षणिक नुकसान की भरपाई कैसे होगी ?
PMO India , इस #प्रकरण की जांच कर रही केंद्रीय एजेंसी को जल्द से जल्द जांच करके दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्यवाही करने हेतु विशेष निर्देश जारी करें |

 #धार्मिक  #शास्त्रों के अनुसार, ललाट (माथे) पर तिल का होना  #भाग्य, उच्च बुद्धि, और नेतृत्व क्षमता का संकेत माना जाता ह...
13/05/2026

#धार्मिक #शास्त्रों के अनुसार, ललाट (माथे) पर तिल का होना #भाग्य, उच्च बुद्धि, और नेतृत्व क्षमता का संकेत माना जाता है। यह अक्सर समृद्धि, ज्ञान और जीवन में सम्मान पाने का प्रतीक है। और संघर्ष है

क्या ये सत्य है????
राजस्थान के यह शेर राजस्थान में कुछ बड़ा कर सकते हैं।।
Bhati

 #लूणी आज अपने  #इतिहास के सबसे भीषण जल संकट से गुजर रहा है… हर गांव, हर ढाणी और हर गली से सिर्फ एक ही आवाज़ सुनाई दे रह...
12/05/2026

#लूणी आज अपने #इतिहास के सबसे भीषण जल संकट से गुजर रहा है… हर गांव, हर ढाणी और हर गली से सिर्फ एक ही आवाज़ सुनाई दे रही है — “पानी पानी पानी…”

भीषण गर्मी ने आमजन का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। सुबह होते ही माताएं-बहनें सिर पर मटके उठाकर पानी की तलाश में निकल पड़ती हैं। कहीं 2 किलोमीटर तो कहीं 4-5 किलोमीटर दूर तक सिर्फ इस उम्मीद में जाना पड़ रहा है कि शायद आज घर के लिए दो बाल्टी पानी मिल जाए। टैंकर आते हैं तो वहां इंसानों की नहीं, मजबूरी की भीड़ दिखाई देती है। घंटों धूप में खड़े रहकर लोग अपनी बारी का इंतजार करते हैं। छोटे-छोटे बच्चे, बुजुर्ग, किसान, मजदूर — हर वर्ग आज पानी की समस्या से त्रस्त है।

यह स्थिति केवल शहरों तक सीमित नहीं है, बल्कि गांव-गांव में हालात भयावह होते जा रहे हैं। कई जगह पाइपलाइनों में दिनों तक पानी नहीं पहुंचता। कई गांवों में टैंकर ही एकमात्र सहारा बन चुके हैं। तालाब सूख चुके हैं, कुएं जवाब दे चुके हैं, हैंडपंप बंद पड़े हैं और सरकारी दावों की पोल पूरी तरह खुल चुकी है।

सबसे दुखद और शर्मनाक बात यह है कि लूणी का प्रतिनिधित्व करने वाला व्यक्ति आज राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री है। इसके बावजूद लूणी की जनता प्यास से तड़प रही है। जनता ने उम्मीद की थी कि सरकार में मजबूत भागीदारी होने से क्षेत्र में विकास होगा, पानी जैसी मूलभूत समस्या का स्थायी समाधान निकलेगा, लेकिन आज हालात पहले से भी ज्यादा खराब दिखाई दे रहे हैं।

“डबल इंजन सरकार” के बड़े-बड़े विज्ञापन और दावे आज धरातल पर पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। यदि सरकार सच में संवेदनशील होती, तो आज माताओं-बहनों को मटके लेकर सड़कों पर भटकना नहीं पड़ता। यदि सरकार गंभीर होती, तो पशुओं को प्यास से दम नहीं तोड़ना पड़ता।

आज लूणी में इंसान ही नहीं, जीव-जंतु और पशु-पक्षियों की हालत भी बेहद दयनीय हो चुकी है। गांवों में पशुपालक अपने पशुओं के लिए पानी की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। पक्षी प्यास से इधर-उधर भटक रहे हैं। कई स्थानों पर पशुधन को बचाना भी मुश्किल हो गया है। यह केवल जल संकट नहीं, बल्कि जीवन संकट बन चुका है।

चुनाव के समय जनता से बड़े-बड़े वादे किए गए थे — हर घर पानी पहुंचेगा… क्षेत्र में विकास होगा… जल योजनाओं को मजबूत किया जाएगा… लेकिन आज सच्चाई यह है कि जनता अपने अधिकार के पानी के लिए संघर्ष कर रही है और सरकार केवल आंकड़ों और भाषणों में व्यस्त है।

राजस्थान पत्रिका सहित कई समाचार माध्यमों ने भी जमीनी हकीकत उजागर की है कि लूणी क्षेत्र में लोग पानी के लिए किस तरह संघर्ष कर रहे हैं। 120 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन होने के बावजूद गांवों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा। टैंकरों के भरोसे जीवन चल रहा है। आंगनबाड़ी केंद्र तक पानी के अभाव से जूझ रहे हैं। यह स्थिति सरकार की विफलता और प्रशासनिक लापरवाही का स्पष्ट प्रमाण है।

मैं,राजस्थान सरकार से मांग करता हूं कि —
लूणी क्षेत्र में तुरंत प्रभाव से पर्याप्त पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।हर गांव और ढाणी में नियमित एवं पारदर्शी टैंकर व्यवस्था लागू की जाए। खराब पड़ी पाइपलाइनों और जल योजनाओं को युद्ध स्तर पर दुरुस्त किया जाए। जलदाय विभाग की लापरवाही की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए।पशुओं और पक्षियों के लिए भी विशेष जल व्यवस्था की जाए।लूणी क्षेत्र के लिए दीर्घकालीन और स्थायी जल प्रबंधन योजना लागू की जाए।

मैं लूणी की जनता को विश्वास दिलाता हूं कि आपकी आवाज़ को हर मंच पर मजबूती से उठाया जाएगा। यह लड़ाई राजनीति की नहीं, जनता के अधिकार और जीवन की लड़ाई है। पानी कोई एहसान नहीं, हर नागरिक का मूल अधिकार है।

यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं किया, तो लूणी की जनता के साथ मिलकर बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा और जनता की आवाज़ सड़क से लेकर सदन तक बुलंद की जाएगी।

लूणी अब और उपेक्षा सहन नहीं करेगा। जनता अब जवाब मांग रही है। जनता अब समाधान चाहती है।

CMO Rajasthan
District Collector & Magistrate, Jodhpur
Bhajanlal Sharma

12/05/2026

#मोदी जी के आदेश का पालन शुरू अब सोना चांदी #सोरूम और दुकानों नहीं रहैगा तो तो क्या खरीदें गी पब्लिक

काम बिगड़ा हो तो सुधार जाता है बात बिगड़ी हो तो बन जाती है लेकिन जिस व्यक्ति की सोच  ही बिगड़ जाएं  उसका कोई इलाज़ नहीं ...
12/05/2026

काम बिगड़ा हो तो सुधार जाता है बात बिगड़ी हो तो बन जाती है लेकिन जिस व्यक्ति की सोच ही बिगड़ जाएं उसका कोई इलाज़ नहीं होता #जयमहाकाल 🤔💭📸

23/04/2026

पिछले हफ़्ते मुझे अपनी एक पोस्ट पर 30 से ज़्यादा रिएक्शन मिले! मुझे सपोर्ट करने के लिए आप सभी का धन्यवाद! 🎉

हंसकर जीना ही दस्तूर है जिंदगी का, एक यही किस्सा मशहूर है जिंदगी का👍 ✌️
23/04/2026

हंसकर जीना ही दस्तूर है जिंदगी का, एक यही किस्सा मशहूर है जिंदगी का👍 ✌️

 #ऑक्सीजन की कमी देखी है  #कैश की कमी देखी है  #गैस की कमी भी देख ली लेकिन #शराब की कमी आज तक नहीं देखी ? आप क्या कहते ह...
13/04/2026

#ऑक्सीजन की कमी देखी है
#कैश की कमी देखी है
#गैस की कमी भी देख ली लेकिन
#शराब की कमी आज तक नहीं देखी
? आप क्या कहते है?

13/04/2026

पिछले हफ़्ते मुझे अपनी पोस्ट्स पर 50 से ज़्यादा रिएक्शन मिले! मुझे सपोर्ट करने के लिए आप सभी का धन्यवाद! 🎉

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