ज्योतिष एवं वास्तु

ज्योतिष एवं वास्तु Mrs Mamta sharma ( Ph.D. in Vastu & Astrology )
Astrology / Vaedic vastu /scientific vastu / Aura enhancement / Geopathic stress / Chakra healer

15/12/2022

रुद्राक्ष की माला पहनने से शारीरिक-मानसिक मजबूती, घर-परिवार में सुख-शांति रहती है। मान्यता के अनुसार रुद्राक्ष धारण करने से स्वास्थ्य से लेकर करियर तक में सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। कुंडली में शनि के अशुभ प्रभाव, स्वास्थ्य की समस्या, रोजगार की समस्या, घर की समस्या आदि चीजें से फायदा मिलता है।
Dr. R.D. BHARDWAJ
Astrologer & Vastu Consultant
+91 94635 40584

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24/10/2022

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12/10/2022
दिवाली दशहरा से 21वे दिन ही क्यों आती है ★★★★★★★★★★★★★★★★डॉ आर डी भारद्वाज वास्तु एवं ज्योतिष विशेषज्ञ94635-40584जालन्धर...
07/10/2022

दिवाली दशहरा से 21वे दिन ही क्यों आती है
★★★★★★★★★★★★★★★★

डॉ आर डी भारद्वाज
वास्तु एवं ज्योतिष विशेषज्ञ
94635-40584
जालन्धर

प्रति वर्ष दशहरे के बाद ठीक 21 दिन बाद ही दीपावली क्यों आती है ? क्या कभी आपने इस पर विचार किया है। विश्वास न हो तो कैलेंडर देख लीजिएगा। रामायण में वाल्मिकी ऋषि ने लिखा है कि प्रभु श्री राम को अपनी पूरी सेना को श्रीलंका से अयोध्या तक पैदल चलकर आने में 21दिन (इक्कीस दिन यानी 504 घंटे) लगे!!!!अब हम 504 घंटे को 24घंटे से भाग दें तो उत्तर 21 आता है यानी इक्कीस दिन !!! मुझे भी आश्चर्य हुआ । कुछ भी बताया है यह सोचकर कौतूहल वश गूगल मैप पर सर्च किया। उसमें दर्शाता है कि श्रीलंका से अयोध्या की पैदल दूरी 3135 किलोमीटर और लगने वाला समय 504 घंटे।।। हैं न आश्चर्यजनक बात। वर्तमान समय में गूगल मैप को पूरी तरह विश्वनीय माना जाता है। लेकिन हम भारतीय लोग तो दशहरा और दीपावली त्रेतायुग से चली आ रही परंपरानुसार मनाते आ रहे हैं।समय के इस गणित पर आपको विश्वास न हो रहा हो तो गूगल सर्च कर देख सकते हैं तथा औरों को भी दीजिए यह रोचक जानकारी।और वाल्मिकी ऋषि ने तो रामायण की रचना श्रीराम के जन्म से पहले ही कर दी थी।!!! उनका भविष्यवाणी और आगे घटने वाली घटनाओं का वर्णन कितना सटीक था। अपनी सनातन हिन्दू संस्कृति कितनी महान है। हमें गर्व है ऐसी महान हिन्दू संस्कृति में जन्म लेने पर।
🚩🚩जय सियाराम जय सियाराम जय सियाराम 🚩🚩
...🙏

नमस्कार आप अपने घर , दुकान , फेक्टरी , ऑफिस आदि का वास्तु निरीक्षण करवाने के लिए सम्पर्क कर सकते है । जो कि पूर्णता वैज्...
06/10/2022

नमस्कार
आप अपने घर , दुकान , फेक्टरी , ऑफिस आदि का वास्तु निरीक्षण करवाने के लिए सम्पर्क कर सकते है ।
जो कि पूर्णता वैज्ञानिक आधार पर होगा । तोड़-फोड़ में हम विश्वास नही रखते ।

Dr.RD.BHARDWAJ ( VASTU CONSULTANT)
94635 40584
#वास्तु

02/10/2022

जय श्री राम

श्राद्ध किसे खिलाएं  ???मिसिज़ ममता शर्माज्योतिषी और वास्तु सलाहकारमो. 94171 20584▶ जो सद्गृहस्थ शरीर छोड़ते हैं वे पितृल...
11/09/2022

श्राद्ध किसे खिलाएं ???

मिसिज़ ममता शर्मा
ज्योतिषी और वास्तु सलाहकार
मो. 94171 20584

▶ जो सद्गृहस्थ शरीर छोड़ते हैं
वे पितृलोक में सूक्ष्म शरीर से रहते हैं |

▶ पितृलोक का एक दिन
पृथ्वीलोक के एक वर्ष के बराबर होता है
वर्ष में एक दिन होने वाला श्राद्ध
वहाँ प्रतिदिन प्राप्त होता है |

▶ अग्नि देव -
देवताओं व भगवान की कोरियर - सेवा
करते हैं |

▶ जिस देवता के मंत्र से हवन होगा वह
उस देवता के पहुंचाना अग्निदेव की ड्यूटी है |

▶ गोपाल मंत्र से अग्नि में हवन करो तो
श्री गोपाल के पास वह घृत समिधा पहुँचा
देते हैं

▶ पितृ क्योंकि देवताओं से कनिष्ठ हैं
और अग्नि देवता है, इसलिये पितृलोक में
कोरियर का काम 'अग्निदेव 'की अंश रूपा
मानव के शरीर में स्थित 'जठराग्नि' करती है

▶ इसलिये हम श्राद्ध का अन्न किसी
श्रेष्ठ ब्राह्मण को खिलते हैं, उसकी पेट की
'जठराग्नि' वह अन्न - भोजन हमारे पितरों
तक पहुंचा देती है |

▶ ब्राह्मण या शुद्र या क्षत्रिय या वैश्य -
एक तो जन्म से होते है - एक कर्म से

▶ जन्म से ब्राह्मण हो और उसके कर्म
शुद्र जैसे हों तो उससे बेहतर है एक शुद्र -
जिसके कर्म कार्य ब्राह्मण जैसे हों |

▶ श्रेष्ठ कर्म वाले, सदाचारी, सात्विक
भगवतभक्त - जिसका कहीं न कहीं सत्य,
अध्यात्म, ईश्वर से कोई संबंध हो
उसे श्राद्ध अन्न खिलाया जाता है |

▶ महाप्रभु श्री चैतन्य ने अपने पिता का
श्राद्ध यवन जाति के नामनिष्ठ नामाचार्य
श्री हरिदास को खिलाया था |

▶ लेकिन, न तो ब्राह्मण, न धर्म,
न सदाचार भजन, भगवान से जिसका
वास्ता है - जैसे कोढ़ी, गरीब, फूटपाथ
वाले को भोजन देने से वह - गरीब भोजन
है श्राद्ध नहीं |

▶ उसकी जठराग्नि की पहुंच नहीं की
वह इस अन्न भोजन को हमारे पितरों तक
पहुंचा सके | वो ब्राह्मण नहीं है। न जन्म
से, न कर्म से |

▶ एक ब्राह्मण यदि कर्म से ब्राह्मण नहीं हैं
तो जन्म से तो है ही - वह इनसे श्रेष्ठ पात्र है
- शायद सर्वश्रेष्ठ नहीं |

▶ सर्वश्रेष्ठ वही है - जो जन्म एवं कर्म
दोनों से ब्राह्मण हो,
▶ मध्यम वह है जो किसी एक से श्रेष्ठ हो।
▶ जो न जन्म से, न कर्म से वह अधम है
वह श्राद्ध का पात्र ही नहीं है |
▶ यह सब अति सूक्ष्म सिस्टम है -
▶ समझ आए न आये काम करता है

▶ जैसे मोबाइल में एक नंबर दबाने से
यु. एस. में भाई से । दूसरा नंबर दबाने से
दिल्ली । कोई और नंबर दबाने से अपने ही
घर में दूसरे कमरे में अपनी पत्नी से बात
हो जाती है । सिस्टम काम करता है । हमें
समझ आये न आये | अवश्य कुछ लोग हैं
जिन्हें सिस्टम भी समझ आता है |

▶ तुम सिस्टम फोलो करो सिस्टम समझ
में आ जाये तो ठीक न आये तो ठीक | बात
तो हो ही जायेंगी |

▶ और उलटे सीधे मनमाने ढंग से बटन
दबाओगे - तो बात नहीं होगी श्राद्ध नहीं
होगा -श्राद्ध नहीं होगा |

मिसिज़ ममता शर्मा
ज्योतिषी और वास्तु सलाहकार
मो. 94171 20584

Address

C/O RAJESH KUMAR , H NO 556
Jalandhar
144022

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