11/09/2022
श्राद्ध किसे खिलाएं ???
मिसिज़ ममता शर्मा
ज्योतिषी और वास्तु सलाहकार
मो. 94171 20584
▶ जो सद्गृहस्थ शरीर छोड़ते हैं
वे पितृलोक में सूक्ष्म शरीर से रहते हैं |
▶ पितृलोक का एक दिन
पृथ्वीलोक के एक वर्ष के बराबर होता है
वर्ष में एक दिन होने वाला श्राद्ध
वहाँ प्रतिदिन प्राप्त होता है |
▶ अग्नि देव -
देवताओं व भगवान की कोरियर - सेवा
करते हैं |
▶ जिस देवता के मंत्र से हवन होगा वह
उस देवता के पहुंचाना अग्निदेव की ड्यूटी है |
▶ गोपाल मंत्र से अग्नि में हवन करो तो
श्री गोपाल के पास वह घृत समिधा पहुँचा
देते हैं
▶ पितृ क्योंकि देवताओं से कनिष्ठ हैं
और अग्नि देवता है, इसलिये पितृलोक में
कोरियर का काम 'अग्निदेव 'की अंश रूपा
मानव के शरीर में स्थित 'जठराग्नि' करती है
▶ इसलिये हम श्राद्ध का अन्न किसी
श्रेष्ठ ब्राह्मण को खिलते हैं, उसकी पेट की
'जठराग्नि' वह अन्न - भोजन हमारे पितरों
तक पहुंचा देती है |
▶ ब्राह्मण या शुद्र या क्षत्रिय या वैश्य -
एक तो जन्म से होते है - एक कर्म से
▶ जन्म से ब्राह्मण हो और उसके कर्म
शुद्र जैसे हों तो उससे बेहतर है एक शुद्र -
जिसके कर्म कार्य ब्राह्मण जैसे हों |
▶ श्रेष्ठ कर्म वाले, सदाचारी, सात्विक
भगवतभक्त - जिसका कहीं न कहीं सत्य,
अध्यात्म, ईश्वर से कोई संबंध हो
उसे श्राद्ध अन्न खिलाया जाता है |
▶ महाप्रभु श्री चैतन्य ने अपने पिता का
श्राद्ध यवन जाति के नामनिष्ठ नामाचार्य
श्री हरिदास को खिलाया था |
▶ लेकिन, न तो ब्राह्मण, न धर्म,
न सदाचार भजन, भगवान से जिसका
वास्ता है - जैसे कोढ़ी, गरीब, फूटपाथ
वाले को भोजन देने से वह - गरीब भोजन
है श्राद्ध नहीं |
▶ उसकी जठराग्नि की पहुंच नहीं की
वह इस अन्न भोजन को हमारे पितरों तक
पहुंचा सके | वो ब्राह्मण नहीं है। न जन्म
से, न कर्म से |
▶ एक ब्राह्मण यदि कर्म से ब्राह्मण नहीं हैं
तो जन्म से तो है ही - वह इनसे श्रेष्ठ पात्र है
- शायद सर्वश्रेष्ठ नहीं |
▶ सर्वश्रेष्ठ वही है - जो जन्म एवं कर्म
दोनों से ब्राह्मण हो,
▶ मध्यम वह है जो किसी एक से श्रेष्ठ हो।
▶ जो न जन्म से, न कर्म से वह अधम है
वह श्राद्ध का पात्र ही नहीं है |
▶ यह सब अति सूक्ष्म सिस्टम है -
▶ समझ आए न आये काम करता है
▶ जैसे मोबाइल में एक नंबर दबाने से
यु. एस. में भाई से । दूसरा नंबर दबाने से
दिल्ली । कोई और नंबर दबाने से अपने ही
घर में दूसरे कमरे में अपनी पत्नी से बात
हो जाती है । सिस्टम काम करता है । हमें
समझ आये न आये | अवश्य कुछ लोग हैं
जिन्हें सिस्टम भी समझ आता है |
▶ तुम सिस्टम फोलो करो सिस्टम समझ
में आ जाये तो ठीक न आये तो ठीक | बात
तो हो ही जायेंगी |
▶ और उलटे सीधे मनमाने ढंग से बटन
दबाओगे - तो बात नहीं होगी श्राद्ध नहीं
होगा -श्राद्ध नहीं होगा |
मिसिज़ ममता शर्मा
ज्योतिषी और वास्तु सलाहकार
मो. 94171 20584