10/06/2026
ED ने JC वर्ल्ड हॉस्पिटैलिटी प्रा. लि. और इन्वेस्टर्स क्लिनिक इन्फ्राटेक प्रा. लि. की 100 करोड़ रुपए की संपत्ति अटैच की।
जेपी विशटाउन और जेपी ग्रीन्स प्रोजेक्ट्स के घर खरीदारों से धोखाधड़ी का मामला।
घर खरीदारों से इकट्ठा किए थे लगभग 32,825 करोड़ रुपये ।
डायरेक्टोरेट ऑफ़ एनफोर्समेंट, दिल्ली ज़ोनल ऑफ़िस ने प्रिवेंशन ऑफ़ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के तहत J C वर्ल्ड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड और इन्वेस्टर्स क्लिनिक इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से ज़ब्त किया है। इनकी मौजूदा बाज़ार कीमत क्रमशः लगभग 40 करोड़ रुपये और 60 करोड़ रुपये है। यह ज़ब्ती जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड , जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड और उनसे जुड़ी कंपनियों के ख़िलाफ़ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच का हिस्सा है। यह जांच बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और जनता के पैसे के दुरुपयोग से जुड़ी है।
E D ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश पुलिस की इकोनॉमिक ऑफ़ेंस विंग द्वारा दर्ज कई F I R के आधार पर जेपी ग्रुप के ख़िलाफ़ जांच शुरू की थी। ये F I R जेपी विशटाउन और जेपी ग्रीन्स प्रोजेक्ट्स के घर खरीदारों की शिकायतों पर दर्ज की गई थीं, जिनमें कंपनी और उसके प्रमोटरों पर आपराधिक साज़िश, धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात का आरोप लगाया गया था। आरोप है कि आवासीय प्रोजेक्ट्स के निर्माण और उन्हें पूरा करने के लिए हज़ारों घर खरीदारों से इकट्ठा किए गए पैसे को निर्माण के अलावा दूसरे कामों में लगा दिया गया, जिससे घर खरीदारों के साथ धोखाधड़ी हुई और उनके प्रोजेक्ट अधूरे रह गए।
E D की जांच से पता चला है कि J A L और J I L ने घर खरीदारों से लगभग 32 हजार 825 करोड़ रुपये इकट्ठा किए थे । इसमें से बड़ी रकम निर्माण के अलावा दूसरे कामों में लगाई गई और J C वर्ल्ड हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड जैसी जुड़ी हुई कंपनियों को भेज दी गई। इसके अलावा, जांच में यह भी पता चला है कि अपराध से हुई कमाई, ज़मीन के रूप में, को इन्वेस्टर्स क्लिनिक इन्फ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड में रखा गया था।
इससे पहले इस मामले में, जेपी इन्फ्राटेक लिमिटेड और जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर मनोज गौड़ की भूमिका अहम पाई गई थी। उन्होंने जेपी ग्रुप और उससे जुड़ी कंपनियों के बीच लेन-देन के एक जटिल जाल के ज़रिए पैसे को दूसरी जगह भेजने की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में मुख्य भूमिका निभाई थी। इसके बाद, मनोज गौर को P M L A की धारा 19 के तहत 13 नवंबर 2025 को गिरफ़्तार किया गया और वे अभी न्यायिक हिरासत में हैं।
इसके बाद, 7 जनवरी 2026 को एक प्रोविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर जारी किया गया, जिसके तहत अपराध से हुई कमाई को ज़ब्त किया गया, जिसकी मौजूदा बाज़ार कीमत लगभग 400 करोड़ रुपये है।
इसके बाद, माननीय विशेष न्यायालय P M L A के समक्ष मनोज गौर को आरोपी बनाते हुए 8 जनवरी 2026 को एक अभियोजन शिकायत) दायर की गई।
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