09/06/2026
उसका का दुःख केवल उसका नहीं था,
वह उस हर स्त्री का दुःख था
जिसे परिस्थितियों ने दोषी बना दिया,
जबकि उसका अपराध केवल मौन था।
रिश्तों की दीवारों के बीच
उसका मन धीरे-धीरे टूटता रहा,
और वह संसार की नज़रों में नहीं,
अपने ही दर्द में हारती रही।
वह रोई भी तो ख़ामोशी से,
ताकि किसी का भ्रम न टूटे।
उसकी कहानी बताती है,
कभी कभी सबसे बड़े घाव दिखाई नहीं देते।
जुस्तजू @ जुस्तजू