आरज़ू से आरज़ू

आरज़ू से आरज़ू कविता और शायरी

09/06/2026

उसका का दुःख केवल उसका नहीं था,
वह उस हर स्त्री का दुःख था
जिसे परिस्थितियों ने दोषी बना दिया,
जबकि उसका अपराध केवल मौन था।
रिश्तों की दीवारों के बीच
उसका मन धीरे-धीरे टूटता रहा,
और वह संसार की नज़रों में नहीं,
अपने ही दर्द में हारती रही।
वह रोई भी तो ख़ामोशी से,
ताकि किसी का भ्रम न टूटे।
उसकी कहानी बताती है,
कभी कभी सबसे बड़े घाव दिखाई नहीं देते।
जुस्तजू @ जुस्तजू

04/06/2026

"कुछ नाम किताबों के पन्नों पर नहीं
दिल की धड़कनों पर लिखें....

उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद का प्रसिद्ध उपन्यास" निर्मला "
31/05/2026

उपन्यासकार मुंशी प्रेमचंद का प्रसिद्ध उपन्यास" निर्मला "

25/05/2026

*कविता: वो चेहरा*

वो लेटे हुए थे
अस्पताल के बेड पर
हम देख रहे थे बस चेहरा

सफ़ेद चादर पर
उनकी साँसें गिन रहा था वक़्त
और हम गिन रहे थे
उनके साथ बिताए लम्हे

नज़रें मिलीं तो लगा
हज़ार बातें कह दीं उन्होंने
बिना एक लफ़्ज़ बोले
बस आँखों से रो दिए हम

डॉक्टर की पर्ची पर
उम्मीद लिखी थी
पर दिल की धड़कन पर
डर का नाम लिखा था

इक तरफ़ मशीनें थीं
जो ज़िंदगी नाप रही थीं
दूसरी तरफ़ हम थे
जो दुआओं में उन्हें माँग रहे थे

वो लेटे हुए थे
अस्पताल के बेड पर
और हम बस देख रहे थे चेहरा
इस डर से कि कहीं
पलक झपकते ही
ये चेहरा याद न बन जाए

क्योंकि कुछ चेहरे
सिर्फ़ चेहरे नहीं होते
वो पूरी दुनिया होते हैं
और दुनिया का उजड़ना
खामोशी से देखा नहीं जाता!

20/05/2026

*अस्पताल के बेड पर वो*

वो लेटी हुई थी
अस्पताल के बेड पर
मैं देख रहा था बस चेहरा
वो चेहरा... जो मेरी सुबह थी

जिस माथे पर मैं हर शाम
थकान रख दिया करता था
आज उस पर पट्टी थी
और मैं बेबस खड़ा था

जिन हाथों ने मेरे लिए
हज़ार बार खाना परोसा था
आज उन हाथों में सुई थी
और मैं बस दुआ कर रहा था

जिस आवाज़ से घर गूँजता था
"सुनो, खाना लगा दूँ?"
आज वो आवाज़ खामोश थी
और कमरा मशीनों से भर गया था

याद आया...
बुखार में जब मैं पड़ा था
तो यही चेहरा रात-भर जागा था
पानी की पट्टी रखते-रखते
खुद बीमार हो गया था

आज जब वो लेटी है
तो लगता है घर की दीवारें
साँसें रोक कर खड़ी हैं
जैसे पूछ रही हों मुझसे
"तेरी दुनिया ठीक तो है न?"

मैंने उसका हाथ थामा
ठंडा था... पर अपना था
मैंने कहा नहीं कुछ
बस माथा चूम लिया
क्योंकि मर्द रोते नहीं
वो बस टूट जाते हैं... खामोशी से

वो लेटी हुई है
अस्पताल के बेड पर
और मैं देख रहा हूँ बस चेहरा
वो चेहरा जो मेरी पत्नी का नहीं
मेरी पूरी ज़िंदगी का है

डॉक्टर कहते हैं "सब ठीक होगा"
मैं कहता हूँ "उसे ठीक होना ही है"
क्योंकि उसके बिना
ये घर, ये मैं, ये साँसें
सब अधूरे हैं

(आरजू से आरजू)

26/04/2026
दीवारों पर टंगी तस्वीरें भी बहुत कुछ बोल जाती है बस देखने वालें का नज़रिया क्या है।मौन और निर्जीव तस्वीरें अपनी आरज़ू बत...
30/03/2025

दीवारों पर टंगी तस्वीरें भी बहुत कुछ बोल जाती है
बस देखने वालें का नज़रिया क्या है।
मौन और निर्जीव तस्वीरें अपनी आरज़ू बता जाती है।

मौन सबसे ख़तरनाक होता है और मौन को केवल और केवल किताबों से प्यार होगा ।तभी मौन ज़िन्दा दिली के साथ ज़िंदगी जी सकता है नह...
30/03/2025

मौन सबसे ख़तरनाक होता है और मौन को केवल और केवल किताबों से प्यार होगा ।तभी मौन ज़िन्दा दिली के साथ ज़िंदगी जी सकता है नहीं तो...........

14/03/2025

आरज़ू की आरज़ू है आरज़ू ही आरज़ू है।
पहाड़ की आरज़ू है रेत के समंदर की आरज़ू है ।
सूर्य की आरज़ू है चांद की आरज़ू है।
धरती की आरज़ू है आसमान की आरज़ू है।
हवा की आरज़ू है पानी की आरज़ू है।
पाने की आरज़ू है उसमें खो जाने की आरज़ू है।
दर्द की आरज़ू है गम में डूब जाने की आरज़ू है।
दुनिया को भूल जाने की आरज़ू है।
उसके दुःखों को पाने की आरज़ू है।
उसे खुशियां देने की आरज़ू है।

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