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सर्वहित पार्टी का चुनाव निशान ।ट्रैक्टर किसान ।
27/06/2019

सर्वहित पार्टी का चुनाव निशान ।

ट्रैक्टर किसान ।

21/10/2017
कैथल में लगभग 250 आर्य परिवारो ने अपने अपने घर पर यज्ञ करके मनाया नव स्येष्टि(दीपावली) पर्व। अपनी परम्पराओ की तरफ बढ़ता ह...
20/10/2017

कैथल में लगभग 250 आर्य परिवारो ने अपने अपने घर पर यज्ञ करके मनाया नव स्येष्टि(दीपावली) पर्व। अपनी परम्पराओ की तरफ बढ़ता हमारा राष्ट्र।
जय आर्यावर्त

दिपावली यज्ञ निर्देशन नमस्ते जी,सभी आर्यो , आर्याओं से प्रार्थना है की सभी अपने घर दिपावली को नवश्येसषटी यज्ञ अवश्य करे।...
17/10/2017

दिपावली यज्ञ निर्देशन
नमस्ते जी,
सभी आर्यो , आर्याओं से प्रार्थना है की सभी अपने घर दिपावली को नवश्येसषटी यज्ञ अवश्य करे। यज्ञ की विधि के लिये निचे बने लिंक पे जायें।

आर्य !आर्याओं ! नमस्ते जी । 'दीपावली' का महापर्व कार्त्तिक कृष्ण पक्ष अमावस्या को (दिनांक-19/10/2017) मनाया जाने वाला है। हमारे लिए इस पर्व के साथ वेदों के पुनर्प्रतिष्ठापक,सत्यपथान्वेषक ऋषिवर दयानन्द के पावन बलिदान की स्मृति भी जुड़ी हुई है।साथ ही हम उस यज्ञीय परम्परा के वाहक भी हैं जिस परम्परा म

15/10/2017

शंका :- क्या आर्य समाज हिन्दू धर्म से अलग कोई नया पंथ या सम्प्रदाय है ?

समाधान :- पहली बात तो ये है कि आर्य समाज न तो सम्प्रदाय या पंथ या अलग कोई धर्म है । आर्य समाज प्राचीन वैदिक धर्म की रक्षा करने वाली एक हिन्दू संस्था है, जैसे बाकी की संस्थाएँ विहिप, बजरंगदल आदि हैं ठीक वैसे ही आर्य समाज भी है । बाकी संस्थाओं से आर्य समाज का अंतर केवल इतना ही है कि आर्य समाज वेद और वैदिक ग्रंथों पर आधारित जो हमारे ऋषि मुनियों और महापुरुषों का प्राचीन वैदिक धर्म था उसे पुनः स्थापित करने की बात कहता है । क्योंकि उस प्राचीन वैदिक धर्म को स्थापित किये बिना हिन्दू समाज अपने अस्तित्व की रक्षा भी नहीं कर पायेगा । आर्य समाज का मानना है कि हिन्दू अपने मूल प्राचीन वैदिक धर्म से दूर जा चुका है इसी कारण इसके हाथ से बहुत सी भूमी खिसकती चली गई है और पूरे विश्व का चक्रवर्ती शासन चला गया है । वही प्राचीन काल की आर्य जनता आज हिन्दू नाम से बदनाम हुई पड़ी है ।

हिन्दू समाज के लिये धर्म मात्र मंदिर जाकर प्रतिमाओं पर माथा टेकना, श्राध, व्रत आदि करना मात्र ही रह गया है इसीलिये आर्य समाज ये कहता है कि वेद, दर्शन, उपनिषद्, ब्राह्मण, वेदांग, स्मृति आदि सत्य शास्त्रों का पढ़ना पढ़ाना हिन्दू समाज में पुनः चालू हो और इसी आधार पर गुरुकुल शिक्षा, योगाभ्यास आदि परम्पराएँ पुनः स्थापित हो जाएँ । जिससे कि ये हिन्दू समाज अपने खोए हुए वैभव को पुनः प्राप्त कर पाए और शीघ्र ही पूरे विश्व का चक्रवर्ती शासन प्राप्त करने का प्रयास करे । अब आप बताएँ इसमें कौनसे नए धर्म या पंथ की बात कह दी गई है ?

आप ही बताइए क्या गुरुकुल शिक्षा, योगाभ्यास, आर्ष ग्रंथों का पठन पाठन, अग्निहोत्र, मनुस्मृति आधारित राजतंत्र आदि ये सब क्या हिन्दू कहे जाने वाले धर्म में नहीं आते ? क्या ये सब किसी नए पंथ से संबंधित हैं ?

ऋषि दयानंद ने जितने भी ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश, ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका आदि लिखे हैं उनमें स्थान स्थान पर वेदमंत्र, मनुस्मृति, दर्शनों के सूत्रादि के प्रमाण चप्पे चप्पे पर दिए हैं । ऋषि ने अपना कोई मत न रखते हुए वेद और प्राचीन ऋषियों के ही मत सामने रखे जिनके द्वारा हमारा प्राचीन आर्यावर्त सुखों से परिपूर्ण था । तो क्या ऐसा करके ऋषि दयानंद जी ने कोई नया पंथ चला लिया ?

यदि इस स्पष्टिकरण के बाद भी हिन्दू समाज आर्य समाज को शंकित दृष्टि से देखना चाहता है या तो हिन्दू समाज वेद, दर्शन, स्मृतियों आदि वैदिक ग्रंथों का पूरा बहिष्कार कर दे और ऐसा नहीं कर सकता तो आर्य समाज के मन्तव्य को समझ ले ।

14/10/2017

👉👉 सभी भाइयों के लिए विशेष सूचना ईश्वर और भगवान में👈👈
👉ईश्वर और भगवान का खंडन मंडन👈👈
🏹🏹🏹भगवान्— पहले आर्यव्रत में गुरु शिष्य की परंपरा को चलाने वाले को ऋषि व महर्षि लगा कर संबोधित करते थे इसी तरह जो व्यक्ति विद्या व शिक्षा में निपुण होकर राजधर्म का पालन करते हुए सत्य सत्य आचरण करते हुए जिन राजा ने वैदिक व्यवस्था को बनाए रखने में अपना संपूर्ण जीवन लगा देना उन महापुरुषों को भगवान की उपाधि से विभूषित किया जाता था जैसे भगवान श्री राम भगवान श्री कृष्ण आदि लेकिन उन्हीं को सृष्टि का रचयिता समझ लेना यानी कि राम को श्री कृष्ण को सृष्टि का रचयिता ईश्वर समझ लेना हम लोगों की सबसे बड़ी भूल थी और है भी इसी कारण से वेद विज्ञान से विमुख हो गए हम लोगों ने ब्रह्मा विष्णु महेश की मूर्तियां बनाकर अपने को ईश्वर समझ लिया और उनकी पूजा अर्चना शुरू कर दी इसी तरह वेद में लिखा भी है यजुर्वेद अध्याय 32 मंत्र 3 में लिखा है
👉👉‘न तस्य प्रतिमा अस्ति’ 👈👈
अथार्त ईश्वर की कोई मूर्ति व आकृती नहीं है वह अजन्मा है👈👈👈👇👇
🏹🏹🏹 भगवान् की संपूर्ण परिभाषा— वह व्यक्ति जो इन 6 गुणों से पुर्ण हो संपूर्ण ऐश्वर्य, धर्म, यश, शरीर, ज्ञान, और वैराग्य को धारण करने वाला महापुरुष भगवान् शब्द से संबोधित किया जाता है

• भगवान् एक उपाधि दी है— जैसे ब्राह्मण, ऋषि, महर्षि, ब्रह्मर्षि इत्यादि

इस भगवान् शब्द को परिभाषित किया है एक सुप्रसिद्ध श्लोक द्वारा👇👇👇
(‘ ऐश्वर्य समग्रस्य धर्म यशसशिश्रय: ज्ञानवैराग्ययोशचैव षण्णाँ भग इतिरणा’)
🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩
ऐश्वर्य— जिसके पास सब प्रकार के सुख साधन हो धर्म-- धार्मिक यश-- कीर्ति श्री-- धन संपदा अथवा लक्ष्मी ज्ञान-- यथार्थ बोध होना वैराग्य-- राग द्वेष आदि से रहित होना यह उपरोक्त 6 गुण जिसके पास एक साथ विद्यमान हो वह भगवान् की श्रेणी में माना जाता है
👇 👇 👇👇 👇👇 👇
• जिस प्रकार बल वाले व्यक्ति को ‘बलवान’ धन संपन्न वाले व्यक्ति को ‘धनवान’ विद्या युक्त व्यक्ति को ‘विद्वान’ कहते हैं उसी प्रकार भग वाले व्यक्ति को भगवान् कहते हैं
⛳⛳⛳
👉👉ईश्वर— हमें ईश्वर के स्वरूप को ठीक-ठीक जानना है अगर हम दुखो से मुक्ति चाहते हैं तो सुख शांति चाहते हैं तो धर्म अर्थ काम और मोक्ष की प्राप्ति चाहते हैं तो हमें ईश्वर के स्वरूप को ठीक ठीक जानना होगा वेदों के प्रकांड विद्वान महर्षि दयानंद सरस्वती में आर्य समाज के दूसरे नियम में ईश्वर के जिन गुणों की व्याख्या की है वह स्पष्ट है महर्षि जी लिखते हैं—

👌👌👌👌👌( ईश्वर सच्चिदानंद स्वरूप निराकार सर्वशक्तिमान न्यायकारी दयालु अजन्मा अनंत निर्विकार अनादि अनुपम सर्वाधार सर्वेश्वर सर्वव्यापक सर्व अंतर्यामी अजर अमर नित्य अभय पवित्र और सृष्टि करता है उसी की उपासना करनी योग करें उपरोक्त गुणों को धारण करने वाले को ईश्वर कहते हैं यानी कि वह ईश्वर कहलाता है👇👇👇
• आइए ईश्वर शब्द की व्याख्या को समझने का प्रयास करते हैं निराकार ईश्वर जो संपूर्ण मूल प्रकृति से समस्त सृष्टि को रचकर धारण करता है

• और मनुष्य का शरीर पांच तत्वों पृथ्वी जल, अग्नि, वायु, और आकाश से बना है कहने का तात्पर्य है कि आत्मा पंचमहाभूतों से बने शरीर को ईश्वरीय व्यवस्था के द्वारा शरीर को धारण करता है और मनुष्य संसार में आकर श्रेष्ठ कर्म करता है वह भगवान् तो कहला सकता है वह ईश्वर नहीं ईश्वर और भगवान में बहुत अंतर है जैसा मैंने ऊपर बताया है ईश्वर कभी जन्म नहीं लेता क्यों नहीं लेता क्योंकि वह विकारों से रहित है और श्रेष्ठ कर्म करके भगवान कहलाने वाला संसार में जन्मा मनुष्य कभी ईश्वर नहीं बन सकता क्योंकि जन्म जीवात्मा का होता है जिस में भी का रोते हैं शास्त्रों का प्रमाण भी है कि ईश्वर का स्वरूप कैसा है उदाहरणस्वरूप--👇👇👇
• 👉👉 क्लेशकर्मविपाकाशयैरपरामृष्ट: पुरुषविशेष ईश्वर: 👈👈 (योग दर्शन अध्याय 1 मंत्र 24 का प्रमाण है)

अथार्त जो अविधा, क्लेश, कुशल- अकुशल ईस्ट -अनिष्ट और मित्र फलदायक कर्मों की वासना से रहित है वह सब जीवो विशेष ईश्वर कहता है
🏹 ‘जन्माधस्य यत्:'👈
(वैशेषिक दर्शन 1.12)

• इस प्रकार संपूर्ण घटकों के द्वारा सिद्ध कर दिया है कि भग शब्द के अर्थ वाले घटक मनुष्य के साथ परमात्मा में घट सकते हैं परंतु ईश्वर शब्द के अर्थ मनुष्य में घटना असंभव है
• अथार्त जिसे संसार की उत्पत्ति स्थिति और प्रलय होती हैं उस चेतन सत्ता को उस चेतन सत्ता का नाम ईश्वर है
👇👇👇
(ई शावास्यमिदं सर्वम यत्किं च जगत्यां जगत्’) (यजुर्वेद 40.1)

ईश्वर इस ब्रह्मांड की प्रत्येक वस्तु के कण कण में विद्यमान है वह सब वस्तुओं के बाहर भीतर ओतप्रोत रहता है इस प्रकार ईश्वर अतुलनीय है समस्त संसार के समस्त पदार्थों का आदिमूल है अतः महापुरुषों को ईश्वर कहना गलती नहीं बल्कि अतार्किक भी है यह मैंने ऊपर लिखे तर्को द्वारा सिद्ध कर दिया है अंत में पाठकों से यही निवेदन है कि राम कृष्ण के आगे लगने वाले भगवान शब्द के कारण ईश्वर बताकर राम कृष्ण को हनुमान को मिथ्या भ्रम पैदा करने वालों के चक्कर में पड़कर अज्ञान में ने भटके और भगवान कहलाने वाले आदर्श स्वरुप महापुरुषों की मूर्ति पूजा में समय नष्ट न करें भगवान शब्द ईश्वर के लिए भी गोणिक नाम के रुप में इस्तेमाल होता है या हो सकता है लेकिन महापुरुषों के लिए ईश्वर शब्द प्रयुक्त नहीं हो सकता जैसा कि उपरोक्त विवरण में आ चुका है जैसे मैंने आप लोगों के ऊपर पहले ही बता दिया है अतः जीवन में सुख शांति चाहते हो और दुखों से दूर रहना चाहते हो तो परमेश्वर की सच्ची उपासना के लिए नित्य प्रति हाथ मुंह धो कर अपने आस पास के किसी आर्य समाज भवन में जाकर आर्यों के संपर्क में रहकर बड़े विद्वानों हैं आचार्यों से ईश्वर की उपासना करनी सीखें और उस परमात्मा का निज नाम है ‘ओउम’ इसी को ध्यान में रखकर अपने लक्ष्य की ओर अग्रसर हो

अगर किसी को मेरी बात ही बात में थोड़ा सा भी संदेह है है तो इस नंबर पर कॉल कीजिए या फिर मेरी सेट ड्रेस पर संपर्क करें

मेरा नाम
‘(आर्य सचिन उर्फ (आर्य श्री राम)’ के नाम से संबोधित किया जाता है कि से संपर्क करें 7357136042

11/10/2017

*करवा चौथ का व्रत रखना चाहिए या नहीं?*

धर्म की जिज्ञासा वाले के लिए वेद ही परम प्रमाण है ,अतः हमें वेद में ही देखना चाहिए कि वेद का इस विषय में क्या आदेश है ?

वेद का आदेश है— _व्रतं कृणुत !_( यजुर्वेद ४-११ )

*व्रत करो , व्रत रखो , व्रत का पालन करो।ऐसा वेद का स्पष्ट आदेश है ,परन्तु कैसे व्रत करें ? वेद का व्रत से क्या तात्पर्य है ?* वेद अपने अर्थों को स्वयं प्रकट करता है..

वेद में व्रत का अर्थ है—-
_अग्ने व्रतपते व्रतं चरिष्यामि तच्छ्केयं तन्मे राध्यतां इदमहमनृतात् सत्यमुपैमि !!_
( यजुर्वेद १–५ )

हे व्रतों के पालक प्रभो ! मैं व्रत धारण करूँगा , मैं उसे पूरा कर सकूँ , आप मुझे ऐसी शक्ति प्रदान करें… *मेरा व्रत है—-मैं असत्य को छोड़कर सत्य को ग्रहण करता रहूँ।*इस मन्त्र से स्पष्ट है कि वेद के अनुसार किसी बुराई को छोड़कर भलाई को ग्रहण करने का नाम व्रत है..शरीर को सुखाने का , देर रात्रि तक भूखे मरने का नाम व्रत नहीं है..

चारों वेदों में एक भी ऐसा मन्त्र नहीं मिलेगा जिसमे ऐसा विधान हो कि एकादशी , पूर्णमासी या करवा चौथ आदि का व्रत रखना चाहिए और ऐसा करने से पति की आयु बढ़ जायेगी … हाँ, व्रतों के करने से आयु घटेगी ऐसा मनुस्मृति में लिखा है

_पत्यौ जीवति तु या स्त्री उपवासव्रतं_
_चरेत् !आयुष्यं बाधते भर्तुर्नरकं चैव गच्छति !!_
जो पति के जीवित रहते भूखा मरनेवाला व्रत करती है वह पति की आयु को कम करती है और मर कर नरक में जाती है

…अब देखें *आचार्य चाणक्य क्या कहते है* —
_पत्युराज्ञां विना नारी उपोष्य व्रतचारिणी !_
_आयुष्यं हरते भर्तुः सा नारी नरकं व्रजेत् !!_
( चाणक्य नीति – १७–९ )
जो स्त्री पति की आज्ञा के बिना भूखों मरनेवाला व्रत रखती है , वह पति की आयु घटाती है और स्वयं महान कष्ट भोगती है …

अतः इस तर्कशून्य , अशास्त्रीय , *वेदविरुद्ध करवा चौथ की प्रथा का परित्याग कर सच्चे व्रतों को अपने जीवन में धारण करते हुए* अपने जीवन को सफल बनाने का प्रयत्न करें ।

*क्या राम के लिए सीता ने, कृष्ण के लिए रुकमनी ने, करवा चौथ का व्रत किया था???*
उतर है- नही।

क्यो पत्नी के लिए कोई व्रत नही रखता पति?
जबकि वेद ने दोनो को समान दर्जा दिया है आर्थात वेद की आज्ञा का भंग!

विचारणीय-
जिन व्यक्तियों यक्तिओ की दुर्घटना मे मौत हो जाती है क्या उनकी पत्नीओ ने करवा चौथ का व्रत नही रखा था!!
रखा था।
कितने ही व्यक्ती रोङ दुर्घटना मे ,
हर्ट अटेक बीमारी से , सीमा पर सैनिक आदि मारे जाते है। *जिसका जन्म है उसकी मौत निश्चित ही होगी इसमे कोई संशय नही है क्योकि शरीर अनित्य है* उसको नित्य मानना अविद्या है। केवल निराकार परमात्मा का आदेश सत्य बोलने का व्रत रखिये(ऐसा संकल्प ले)
सत्य को ग्रहण करो
असत्य को छोङो
और छुङाओ

30/10/2016

*दीपावली के पावन पर्व पर आप और आपके पूरे परिवार को मेरी और मेरे परिवार की तरफ़ से हार्दिक शुभकामनाएँ*

Regards
Sandeep Singh Baru

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