18/02/2024
क्या आपको पता है, चिकन दुनिया की सबसे एब्यूज़्ड जाति है? हर मिनट दुनिया में 1 लाख 40 हज़ार चिकन का क़त्ल किया जाता है! हर मिनट! यानी एक दिन में दो करोड़ बच्चों की हत्या! स्थिति यह है कि 'चिकन' शब्द सुनकर आपके दिमाग़ में भोजन का विचार आता है, किसी जीवन का नहीं!
जबकि यह बहुत बुद्धिमान और संवेदनशील पक्षी है। चिकन चेहरों को याद रख सकते हैं। वे सपने देखते हैं। वे ट्रिक्स सीख सकते हैं। वे बहुत क्यूरियस होते हैं। उनकी अपनी पसंद-नापसंद होती है। और वे बहुत सोशल होते हैं। उनकी बुद्धिमत्ता का स्तर एक मनुष्य के बच्चे जितना होता है!
इस प्राणपुंज को हर रोज़ मनुष्य के द्वारा निर्ममता- और उससे भी बदतर- उदासीनता से कुचल देना क्या ईश्वर के कृतित्त्व का अपमान नहीं है?
आज दुनिया में लगभग 33 अरब फ़ार्म चिकन हैं, यानी मनुष्यों से चार गुना। इनमें से लगभग कोई भी प्राकृतिक मौत नहीं मरेगा।
एग इंडस्ट्री के द्वारा अरबों की संख्या में चूज़ों यानी मेल चिक्स को जीवित ही कुचलकर या जलाकर मार डाला जाता है। यूट्यूब पर इस लोमहर्षक दृश्य के वीडियो मौजूद हैं।
क्या आपका एक समय का ऑप्शनल भोजन इस सुंदर पक्षी के जीवन से अधिक महत्त्वपूर्ण है? आपके पास और भी भोजन हैं, पर उसके पास एक ही जीवन है!
1. सबसे पीड़ित प्रजाति है ये... स्वाभाविक मौत तो इनकी प्रजाति में किसी को नहीं मिलती... ऐसी जिंदगी से बेहतर होता कि इनका कोई जीवन ही नहीं होता...जो लोग अपने बच्चों की हल्की सी बीमारी से भी घबरा जाते हैं वो लोग भी इनके बच्चों को मारकर खा जाते हैं...इंसानी प्रजाति इनके मामले में पूरी तरह से संवेदनहीन बन चुकी है... उनके लिए ये भोजन से अधिक नहीं है...
2. आजकल नॉन वेज एक स्टेटस सिंबल, फैशन सा बन गया है पता नही खाते हुए गले से कैसे उतरता है ..
वास्तव में वो नॉनवेज नहीं है, एक बच्चे का क़त्ल करके पाया गया माँस है। नॉनवेज सुनकर ऐसा भी लग सकता है क्या कि खाने-पीने की किसी चीज़ की बात हो रही है...
हमारे पास वेज में इतने सारे विकल्प है कि गिनती नहीं पर फिर भी..
जिनको खाना है उनको खाना ही है ।
3. इस इंडस्ट्री के कुकर्म और सुनिए..... आप इन फैक्ट्रियों के पास से रात को गुजरें तो बेहद तेज 1000 वाट के बल्ब सारी रात जलते हैं. क्यों? क्योंकि मुर्गियों को सोने न देने से उन्हें बहुत भूख लगती है. भूख रेगुलेट करने वाले हॉर्मोन बिगड़ जाते हैं (ऐसा इंसानो में भी होता है). यह तेजी से मुटाने का सस्ता उपाय है। मुझे यह एक ऐसे व्यक्ति ने बताया जिन्होंने बहुत विक्षुब्ध होकर यह इंडस्ट्री छोड़ दी. केवल यही नहीं, सारी मीट इंडस्ट्री में पशुओं को लगातार एंटीबायोटिक दी जाती हैं. क्यों? बीमारियो से बचाने के लिए नहीं, बल्कि मोटाने के लिए। यह एंटीबायोटिक का साइड इफेक्ट है। आज पूरी दुनिया में 80% एंटीबॉयोटिक्स का प्रयोग इस काम के लिए है. इसके मानव स्वास्थ्य पर बुरे प्रभाव हैं. सबसे खतरनाक तो है - अभी तक खोजी गई करीब 100 antibiotics का तेजी से बेअसर होता जाना (bacteria में प्रतिरोधक क्षमता बढ़ते जाना). कुल मिलाकर, मानव जाति की भयंकर बीमारियो पर विजय के सबसे कारगर हथियार का बर्बाद होता जाना. भविष्य क्या कुछ दिखाएगा, कोई नहीं जानता. पर आसार अच्छे तो नहीं ही हैं...