काल निर्णय एवं मुहूर्त

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काल निर्णय एवं मुहूर्त कुण्डली
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9956672166

02/08/2026

॥ॐ श्रीगणेशाय नम:॥

*॥श्रीसूर्यसिद्धान्तीय 🌞 काशीस्थ पञ्चाङ्ग॥*

* विक्रम सम्वत - २०८३ "रौद्र नामक संवत्सर"
* शक सम्वत - १९४८

* ऋतु - वर्षा

* मास व पक्ष – श्रावणकृष्णपक्ष

*वार* - *रविवार*

*तिथि* - *चतुर्थी* (२१:०३ बजे तक)
नक्षत्र* - *पूर्वाभाद्रपद* (२०:३७ बजे तक)
- (चन्द्रमा *कुम्भ राशि* में १४:३३ बजे तक तदुपरान्त *मीन राशि* में)

*करण १* - बव (प्रातः ०९:१६ बजे तक)
*करण २* - बालव (२१:०३ बजे तक)
*करण ३* - कौलव (सूर्योदयपर्यन्त)

*योग* - *अतिगण्ड* (रात्रि २२:२९ बजे तक)

* सूर्योदय - ०५:२६ बजे
* सूर्यास्त - १८:४१ बजे

* दिशाशूल - पश्चिम

ख्रिष्टीय वर्षानुसार दिनांक *०२ अगस्त २०२६* ई०

॥तन्मेमनः शिवसङ्कल्पमस्तु॥
*****************************
(कृपया समय २४ घण्टे के प्रारूप में पढ़ें)

01/08/2026

🪐 27 नक्षत्रों में शनि के फल
शनि जहाँ बैठता है, वहाँ समय, परीक्षा, धैर्य और कर्म का हिसाब शुरू हो जाता है
शनि केवल दुःख नहीं देता।
शनि व्यक्ति को उस क्षेत्र में परिपक्व बनाता है जहाँ आत्मा अभी अपरिपक्व है।
जिस नक्षत्र में शनि बैठा हो, वहीं से जीवन की सबसे बड़ी परीक्षा और सबसे बड़ी उपलब्धि दोनों निकलती हैं।
🐎 अश्विनी में शनि
अश्विनी गति चाहता है।
शनि धीमा चलाता है।
इसलिए जीवनभर व्यक्ति को प्रतीक्षा की परीक्षा मिलती है।
सब कुछ देर से मिलता है लेकिन स्थायी मिलता है।
🌺 भरणी में शनि
जीवन में जिम्मेदारियाँ जल्दी आती हैं।
व्यक्ति दूसरों का बोझ उठाता है।
कई बार अपनी इच्छाओं का त्याग करना पड़ता है।
🔥 कृत्तिका में शनि
सत्य की कठोर परीक्षा।
व्यक्ति को बार-बार ऐसे अनुभव मिलते हैं जहाँ उसे सही और गलत के बीच कठिन चुनाव करना पड़ता है।
🌹 रोहिणी में शनि
प्रेम और सुखों में देरी।
व्यक्ति को भावनात्मक परिपक्वता सीखनी पड़ती है।
कई बार प्रेम जीवन देर से स्थिर होता है।
🦌 मृगशिरा में शनि
जीवनभर खोज चलती रहती है।
ज्ञान, करियर, संबंध...
सबमें व्यक्ति को धैर्य सीखना पड़ता है।
⚡ आर्द्रा में शनि
यह स्थिति आत्मा को भीतर तक बदल देती है।
अचानक घटनाएँ, टूटन और परिवर्तन जीवन का हिस्सा बन सकते हैं।
लेकिन यही व्यक्ति को असाधारण गहराई देता है।
☀️ पुनर्वसु में शनि
जो खोया है उसे वापस पाने में समय लगता है।
लेकिन अंततः शनि यहाँ पुनर्निर्माण की शक्ति देता है।
🌸 पुष्य में शनि
कर्तव्य बहुत अधिक।
व्यक्ति दूसरों की जिम्मेदारी उठाता है।
अक्सर परिवार के लिए त्याग करता है।
🐍 आश्लेषा में शनि
विश्वासघात का डर।
लोगों पर भरोसा करने में समय लगता है।
जीवन सिखाता है कि हर व्यक्ति शत्रु नहीं होता।
👑 मघा में शनि
पूर्वजों के कर्मों का प्रभाव।
सम्मान पाने के लिए अत्यधिक संघर्ष करना पड़ सकता है।
🌺 पूर्वाफाल्गुनी में शनि
प्रेम और आनंद में धैर्य की परीक्षा।
व्यक्ति को सीखना पड़ता है कि सुख केवल मनोरंजन नहीं है।
🤝 उत्तराफाल्गुनी में शनि
संबंधों की जिम्मेदारी।
विवाह और साझेदारी को लेकर गंभीर दृष्टिकोण।
✋ हस्त में शनि
जीवन बार-बार बताता है कि सब कुछ नियंत्रण में नहीं हो सकता।
लेकिन व्यक्ति अद्भुत कौशल विकसित करता है।
💎 चित्रा में शनि
पूर्णता की तलाश।
व्यक्ति अपने काम में अत्यंत मेहनती और सूक्ष्म हो सकता है।
🌬️ स्वाति में शनि
स्वतंत्रता और जिम्मेदारी के बीच संघर्ष।
जीवन सिखाता है कि स्वतंत्रता का अर्थ अनुशासनहीनता नहीं है।
🎯 विशाखा में शनि
लक्ष्य देर से पूरे होते हैं।
लेकिन जब पूरे होते हैं तो बड़े स्तर पर पहचान दिलाते हैं।
🌸 अनुराधा में शनि
मित्रता और निष्ठा की परीक्षा।
जीवन में कुछ गहरे लेकिन सीमित संबंध बनते हैं।
🛡️ ज्येष्ठा में शनि
बहुत जिम्मेदारियाँ।
कई बार व्यक्ति को परिवार का आधार बनना पड़ता है।
🌳 मूल में शनि
कर्मों की जड़ तक ले जाने वाली स्थिति।
जीवन बार-बार पुरानी संरचनाएँ तोड़ सकता है।
🌊 पूर्वाषाढ़ा में शनि
अहंकार की परीक्षा।
जीत से पहले विनम्रता सीखनी पड़ती है।
🏔️ उत्तराषाढ़ा में शनि
महान उपलब्धियों का योग।
लेकिन सफलता देर से और कठोर परिश्रम के बाद मिलती है।
👂 श्रवण में शनि
जीवन शिक्षक बन जाता है।
व्यक्ति अनुभवों से सीखता है और धीरे-धीरे ज्ञानवान बनता है।
🥁 धनिष्ठा में शनि
धन और प्रतिष्ठा धीरे-धीरे बढ़ती है।
शुरुआती संघर्ष बाद में बड़ी स्थिरता देते हैं।
🌌 शतभिषा में शनि
अकेलेपन की परीक्षा।
लेकिन यही अकेलापन व्यक्ति को गहन शोध, उपचार और आध्यात्मिकता की ओर ले जाता है।
🔥 पूर्वाभाद्रपद में शनि
आध्यात्मिक और भौतिक जीवन के बीच संघर्ष।
व्यक्ति जीवन के अंतिम सत्य को जानना चाहता है।
🌊 उत्तराभाद्रपद में शनि
गहरी सहनशक्ति।
यहाँ शनि व्यक्ति को भीतर से पर्वत जैसा मजबूत बना देता है।
🐟 रेवती में शनि
दूसरों के लिए जिम्मेदारी।
व्यक्ति अक्सर मार्गदर्शक, शिक्षक या संरक्षक की भूमिका निभाता है।
🌑 अंतिम गूढ़ रहस्य
शनि जिस नक्षत्र में बैठा हो...
वहीं आपकी आत्मा का सबसे कठिन पाठ छिपा होता है।
वहीं आपका सबसे बड़ा संघर्ष होता है।
और आश्चर्य की बात यह है कि...
वही स्थान आपकी सबसे बड़ी उपलब्धि भी बनता है।
क्योंकि शनि कभी कुछ बिना कारण नहीं रोकता।
वह केवल इतना चाहता है कि जब आपको सफलता मिले...
तो आप उसे संभालने योग्य बन चुके हों।
शनि दंड नहीं है...
शनि समय के रूप में बैठा हुआ गुरु है।

19/04/2026

॥ॐ श्रीगणेशाय नम:॥

*॥श्रीसूर्यसिद्धान्तीय 🌞 काशीस्थ पञ्चाङ्ग॥*

* विक्रम सम्वत - २०८३ "रौद्र नामक संवत्सर"
* शक सम्वत - १९४८

* ऋतु - वसन्त

* मास व पक्ष – वैशाखशुक्लपक्ष

*वार* - *सोमवार*

*तिथि* - *तृतीया* (१३:१८ बजे तक)

*नक्षत्र* - *कृत्तिका* (१०:५७ बजे तक)
- [चन्द्रमा *वृषभ राशि* में अहोरात्र]

*करण १* - गर (१०:५७ बजे तक)
*करण २* - वणिज (रात्रि २१:४३ बजे तक)
*करण २* - विष्टि *(भद्रा)* (सूर्योदयपर्यन्त)

*योग* - *सौभाग्य* (रात्रि १९:५१ बजे तक)

* सूर्योदय - ०५:३७ बजे
* सूर्यास्त - १८:१८ बजे

* दिशाशूल - पूर्व

*विशेष: अक्षयतृतीया आज*

ख्रिष्टीय वर्षानुसार दिनांक *२० अप्रैल २०२६* ई०

॥तन्मेमनः शिवसङ्कल्पमस्तु॥
*****************************
(कृपया समय २४ घण्टे के प्रारूप में पढ़ें, पञ्चाङ्ग में कालगणना सूर्योदय के पश्चात होती है।)

19/04/2026

॥ॐ श्रीगणेशाय नम:॥

*॥श्रीसूर्यसिद्धान्तीय 🌞 काशीस्थ पञ्चाङ्ग॥*

* विक्रम सम्वत - २०८३ "रौद्र नामक संवत्सर"
* शक सम्वत - १९४८

* ऋतु - वसन्त

* मास व पक्ष – वैशाखशुक्लपक्ष

*वार* - *रविवार*

*तिथि* - *द्वितीया* (१३:१८ बजे तक)

*नक्षत्र* - *भरणी* (०९:२७ बजे तक)
- [चन्द्रमा *मेष राशि* में १५:०४ बजे तक तदुपरान्त *वृषभ राशि* में]

*करण १* - कौलव (१३:१८ बजे तक)
*करण २* - तैतिल (रात्रि ००:०८ बजे तक)
*करण २* - गर (सूर्योदयपर्यन्त)

*योग* - *आयुष्मान* (रात्रि २२:५५ बजे तक)

* सूर्योदय - ०५:३८ बजे
* सूर्यास्त - १८:१८ बजे

* दिशाशूल - पश्चिम

ख्रिष्टीय वर्षानुसार दिनांक *१९ अप्रैल २०२६* ई०

॥तन्मेमनः शिवसङ्कल्पमस्तु॥
*****************************
(कृपया समय २४ घण्टे के प्रारूप में पढ़ें, पञ्चाङ्ग में कालगणना सूर्योदय के पश्चात होती है।)

18/04/2026

➡ *20 अप्रैल 2026 सोमवार को अक्षय तृतीया है ।*
🙏🏻 *वैशाख शुक्ल तृतीया की महिमा मत्स्य, स्कंद, भविष्य, नारद पुराणों व महाभारत आदि ग्रंथो में है । इस दिन किये गये पुण्यकर्म अक्षय (जिसका क्षय न हो) व अनंत फलदायी होते हैं, अत: इसे 'अक्षय तृतीया' कहते है । यह सर्व सौभाग्यप्रद है ।*
🙏🏻 *यह युगादि तिथि यानी सतयुग व त्रेतायुग की प्रारम्भ तिथि है । श्रीविष्णु का नर-नारायण, हयग्रीव और परशुरामजी के रूप में अवतरण व महाभारत युद्ध का अंत इसी तिथि को हुआ था ।*
👉🏻 *इस दिन बिना कोई शुभ मुहूर्त देखे कोई भी शुभ कार्य प्रारम्भ या सम्पन्न किया जा सकता है । जैसे - विवाह, गृह - प्रवेश या वस्त्र -आभूषण, घर, वाहन, भूखंड आदि की खरीददारी, कृषिकार्य का प्रारम्भ आदि सुख-समृद्धि प्रदायक है ।*

🌷 *प्रात:स्नान, पूजन, हवन का महत्त्व* 🌷
🙏🏻 *इस दिन गंगा-स्नान करने से सारे तीर्थ करने का फल मिलता है । गंगाजी का सुमिरन एवं जल में आवाहन करके ब्राम्हमुहूर्त में पुण्यस्नान तो सभी कर सकते है । स्नान के पश्चात् प्रार्थना करें :*
🌷 *माधवे मेषगे भानौं मुरारे मधुसुदन ।*
*प्रात: स्नानेन में नाथ फलद: पापहा भव ॥*
🙏🏻 *'हे मुरारे ! हे मधुसुदन ! वैशाख मास में मेष के सूर्य में हे नाथ ! इस प्रात: स्नान से मुझे फल देनेवाले हो जाओ और पापों का नाश करों ।'*
👉🏻 *सप्तधान्य उबटन व गोझरण मिश्रित जल से स्नान पुण्यदायी है । पुष्प, धूप-दीप, चंदनम अक्षत (साबुत चावल) आदि से लक्ष्मी-नारायण का पूजन व अक्षत से हवन अक्षय फलदायी है ।*
🌷 *जप, उपवास व दान का महत्त्व* 🌷
🙏🏻 *इस दिन किया गया उपवास, जप, ध्यान, स्वाध्याय भी अक्षय फलदायी होता है । एक बार हल्का भोजन करके भी उपवास कर सकते है । 'भविष्य पुराण' में आता है कि इस दिन दिया गया दान अक्षय हो जाता है । इस दिन पानी के घड़े, पंखे, (खांड के लड्डू), पादत्राण (जूते-चप्पल), छाता, जौ, गेहूँ, चावल, गौ, वस्त्र आदि का दान पुण्यदायी है । परंतु दान सुपात्र को ही देना चाहिए ।*
🌷 *पितृ-तर्पण का महत्त्व व विधि* 🌷
🙏🏻 *इस दिन पितृ-तर्पण करना अक्षय फलदायी है । पितरों के तृप्त होने पर घर में सुख-शांति-समृद्धि व दिव्य संताने आती है ।*
💥 *विधि : इस दिन तिल एवं अक्षत लेकर र्विष्णु एवं ब्रम्हाजी को तत्त्वरूप से पधारने की प्रार्थना करें । फिर पूर्वजों का मानसिक आवाहन कर उनके चरणों में तिल, अक्षत व जल अर्पित करने की भावना करते हुए धीरे से सामग्री किसी पात्र में छोड़ दें तथा भगवान दत्तात्रेय, ब्रम्हाजी व विष्णुजी से पूर्वजों की सदगति हेतु प्रार्थना करें ।*
🌷 *आशीर्वाद पाने का दिन* 🌷
🙏🏻 *इस दिन माता-पिता, गुरुजनों की सेवा कर उनकी विशेष प्रसन्नता, संतुष्टि व आशीर्वाद प्राप्त करें । इसका फल भी अक्षय होता है ।*
🌷 *अक्षय तृतीया का तात्त्विक संदेश* 🌷
🙏🏻 *'अक्षय' यानी जिसका कभी नाश न हो । शरीर एवं संसार की समस्त वस्तुएँ नाशवान है, अविनाशी तो केवल परमात्मा ही है । यह दिन हमें आत्म विवेचन की प्रेरणा देता है । अक्षय आत्मतत्त्व पर दृष्टी रखने का दृष्टिकोण देता है । महापुरुषों व धर्म के प्रति हमारी श्रद्धा और परमात्म प्राप्ति का हमारा संकल्प अटूट व अक्षय हो - यही अक्षय तृतीया का संदेश मान सकते हो ।*

18/04/2026

॥ॐ श्रीगणेशाय नम:॥

*॥श्रीसूर्यसिद्धान्तीय 🌞 काशीस्थ पञ्चाङ्ग॥*

* विक्रम सम्वत - २०८३ "रौद्र नामक संवत्सर"
* शक सम्वत - १९४८

* ऋतु - वसन्त

* मास व पक्ष – वैशाखशुक्लपक्ष

*वार* - *शनिवार*

*तिथि* - *प्रतिपदा* (१५:३० बजे तक)

*नक्षत्र* - *अश्विनी* (१०:५२ बजे तक)
- [चन्द्रमा *मेष राशि* में अहोरात्र]

*करण १* - बव (१५:३० बजे तक)
*करण २* - बालव (रात्रि ०२:२५ बजे तक)
*करण २* - कौलव (सूर्योदयपर्यन्त)

*योग* - *प्रीति* (रात्रि ०१:५३ बजे तक)

* सूर्योदय - ०५:३९ बजे
* सूर्यास्त - १८:१७ बजे

* दिशाशूल - पूर्व

ख्रिष्टीय वर्षानुसार दिनांक *१८ अप्रैल २०२६* ई०

॥तन्मेमनः शिवसङ्कल्पमस्तु॥
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(कृपया समय २४ घण्टे के प्रारूप में पढ़ें, पञ्चाङ्ग में कालगणना सूर्योदय के पश्चात होती है।)

14/04/2026

॥ॐ श्रीगणेशाय नम:॥

*॥श्रीसूर्यसिद्धान्तीय 🌞 काशीस्थ पञ्चाङ्ग॥*

* विक्रम सम्वत - २०८३ "रौद्र नामक संवत्सर"
* शक सम्वत - १९४८

* ऋतु - वसन्त

* मास व पक्ष – वैशाखकृष्णपक्ष

*वार* - *भौमवार*

*तिथि* - *द्वादशी* (२१:१८ बजे तक)

*नक्षत्र* - *शतभिषा* (१३:२२ बजे तक)
- [चन्द्रमा *कुम्भ राशि* में अहोरात्र]

*करण १* - कौलव (०९:३४ बजे तक)
*करण २* - तैतिल (२१:१८ बजे तक)
*करण २* - गर (सूर्योदयपर्यन्त)

*योग* - *शुक्ल* (१३:१६ बजे तक)

* सूर्योदय - ०५:४२ बजे
* सूर्यास्त - १८:१५ बजे

* दिशाशूल - उत्तर

ख्रिष्टीय वर्षानुसार दिनांक *१४ अप्रैल २०२६* ई०

॥तन्मेमनः शिवसङ्कल्पमस्तु॥
*****************************
(कृपया समय २४ घण्टे के प्रारूप में पढ़ें, पञ्चाङ्ग में कालगणना सूर्योदय के पश्चात होती है।)

12/04/2026

॥ॐ श्रीगणेशाय नम:॥

*॥श्रीसूर्यसिद्धान्तीय 🌞 काशीस्थ पञ्चाङ्ग॥*

* विक्रम सम्वत - २०८३ "रौद्र नामक संवत्सर"
* शक सम्वत - १९४८

* ऋतु - वसन्त

* मास व पक्ष – वैशाखकृष्णपक्ष

*वार* - *रविवार*

*तिथि* - *दशमी* (२१:३५ बजे तक)

*नक्षत्र* - *श्रवण* (११:५८ बजे तक)
- [चन्द्रमा *मकर राशि* में ००:३० बजे तक तदुपरान्त *कुम्भ राशि* में]

*करण १* - वणिज (०९:२० बजे तक)
*करण २* - विष्टि *(भद्रा)* (२१:३५ बजे तक)
*करण २* - बव (सूर्योदयपर्यन्त)

*योग* - *साध्य* (१५:२४ बजे तक)

* सूर्योदय - ०५:४४ बजे
* सूर्यास्त - १८:१४ बजे

* दिशाशूल - पश्चिम

ख्रिष्टीय वर्षानुसार दिनांक *१२ अप्रैल २०२६* ई०

॥तन्मेमनः शिवसङ्कल्पमस्तु॥
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(कृपया समय २४ घण्टे के प्रारूप में पढ़ें, पञ्चाङ्ग में कालगणना सूर्योदय के पश्चात होती है।)

10/04/2026

॥ॐ श्रीगणेशाय नम:॥

*॥श्रीसूर्यसिद्धान्तीय 🌞 काशीस्थ पञ्चाङ्ग॥*

* विक्रम सम्वत - २०८३ "रौद्र नामक संवत्सर"
* शक सम्वत - १९४८

* ऋतु - वसन्त

* मास व पक्ष – वैशाखकृष्णपक्ष

*वार* - *शुक्रवार*

*तिथि* - *अष्टमी* (१९:५० बजे तक)

*नक्षत्र* - *पूर्वाषाढ़* (प्रातः ०८:३८ बजे तक)
- [चन्द्रमा *धनु राशि* में १५:०९ बजे तक तदुपरान्त *मकर राशि* में]

*करण १* - बालव (प्रातः ०७:०६ बजे तक)
*करण २* - कौलव (१९:५० बजे तक)
*करण २* - तैतिल (सूर्योदयपर्यन्त)

*योग* - *शिव* (१५:५८ बजे तक)

* सूर्योदय - ०५:४६ बजे
* सूर्यास्त - १८:१३ बजे

* दिशाशूल - पश्चिम

ख्रिष्टीय वर्षानुसार दिनांक *१० अप्रैल २०२६* ई०

॥तन्मेमनः शिवसङ्कल्पमस्तु॥
*****************************
(कृपया समय २४ घण्टे के प्रारूप में पढ़ें, पञ्चाङ्ग में कालगणना सूर्योदय के पश्चात होती है।)

08/04/2026

॥ॐ श्रीगणेशाय नम:॥

*॥श्रीसूर्यसिद्धान्तीय 🌞 काशीस्थ पञ्चाङ्ग॥*

* विक्रम सम्वत - २०८३ "रौद्र नामक संवत्सर"
* शक सम्वत - १९४८

* ऋतु - वसन्त

* मास व पक्ष – वैशाखकृष्णपक्ष

*वार* - *बृहस्पतिवार*

*तिथि* - *सप्तमी* (१८:१७ बजे तक)

*नक्षत्र* - *मूल* (प्रातः ०६:२३ बजे तक,नक्षत्रवृद्धि)
- [चन्द्रमा *धनु राशि* में अहोरात्र]

*करण १* - बव (१८:१७ बजे तक)
*करण २* - बालव (सूर्योदयपर्यन्त)

*योग* - *परिघ* (१५:४५ बजे तक)

* सूर्योदय - ०५:४७ बजे
* सूर्यास्त - १८:१३ बजे

* दिशाशूल - दक्षिण

ख्रिष्टीय वर्षानुसार दिनांक *०९ अप्रैल २०२६* ई०

॥तन्मेमनः शिवसङ्कल्पमस्तु॥
*********
(कृपया समय २४ घण्टे के प्रारूप में पढ़ें, पञ्चाङ्ग में कालगणना सूर्योदय के पश्चात होती है।)

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राधा निकुंज गोपाल विहार बगदौधी बांगर मन्धना
Kanpur
209217

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