04/01/2026
ताइवान को लेकर चीन ने एक बार फिर अपना सख्त और स्पष्ट रुख दुनिया के सामने रखा है। भारत में चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने कहा है कि ताइवान प्राचीन काल से चीन का हिस्सा रहा है और यह कभी भी एक स्वतंत्र संप्रभु देश नहीं रहा। उन्होंने दो टूक कहा कि चीन और ताइवान के एक होने से कोई ताकत नहीं रोक सकती।
राजदूत शू फेइहोंग के मुताबिक, साल 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) की स्थापना के बाद भी चीन की अंतरराष्ट्रीय कानूनी स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। सरकार बदली, लेकिन देश वही रहा। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत PRC सरकार पूरे चीन की एकमात्र वैध प्रतिनिधि है, जिसमें ताइवान भी शामिल है।
उन्होंने यह भी कहा कि गृहयुद्ध और बाहरी ताकतों के दखल के कारण ताइवान जलडमरूमध्य के दोनों किनारों के बीच राजनीतिक मतभेद जरूर बने रहे, लेकिन इससे चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर कोई असर नहीं पड़ा। चीन कभी बंटा नहीं था और न ही भविष्य में कभी बंटेगा।
राजदूत ने साफ शब्दों में कहा कि ताइवान न तो अतीत में, न वर्तमान में और न ही भविष्य में स्वतंत्र देश रहा है। ताइवान में सत्तारूढ़ डीपीपी प्रशासन चाहे जो भी दावे करे, लेकिन चीन का दोबारा एकीकरण तय है और इसे कोई रोक नहीं सकता।