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07/08/2026

पानी ने सब छीन लिया... पर माँ ने अपने बच्चे को नहीं छोड़ा।जबलपुर के बरगी बांध में 30 अप्रैल 2026 की शाम जो मंजर दिखा, उस...
02/05/2026

पानी ने सब छीन लिया... पर माँ ने अपने बच्चे को नहीं छोड़ा।

जबलपुर के बरगी बांध में 30 अप्रैल 2026 की शाम जो मंजर दिखा, उसने पूरे देश का दिल दहला दिया। एक तरफ कुदरत का कहर था और दूसरी तरफ इंसान की लापरवाही, लेकिन इन सबके बीच मानवता और ममता की एक ऐसी कहानी सामने आई जिसे सुनकर हर किसी की आँखें नम हैं। तेज तूफान और हवाओं की वजह से जब पर्यटकों से भरा क्रूज नर्मदा के गहरे पानी में समाने लगा, तब हर कोई अपनी जान बचाने की जद्दोजहद कर रहा था। लेकिन रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान जब गोताखोरों ने एक माँ और उसके मासूम बच्चे के शव बाहर निकाले, तो मंजर देख सबकी रूह कांप गई। वह माँ अपने चार साल के बेटे को आखरी दम तक सीने से लगाए हुए थी; उनके शव इस तरह एक-दूसरे से लिपटे थे कि मौत भी उन्हें जुदा नहीं कर सकी। यह हृदयविदारक घटना न केवल सुरक्षा इंतजामों और खराब मौसम में क्रूज चलाने जैसी लापरवाही पर बड़े सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी साबित करती है कि एक माँ का आंचल दुनिया का सबसे सुरक्षित कवच होता है। 9 लोगों की जान लेने वाले इस हादसे ने कई परिवारों को तबाह कर दिया, लेकिन उस माँ-बेटे के आखिरी आलिंगन (Hug) की तस्वीर अब इस पूरी त्रासदी की पहचान बन गई है। शासन ने मुआवजे और जांच की घोषणा तो कर दी है, पर उस बेमिसाल ममता की भरपाई दुनिया की कोई भी ताकत नहीं कर सकती।

क्योंझर में इंसानियत शर्मसार: बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा भाई, अब मिली राहतओडिशा के क्योंझर से आई इस घटना ने पूरे सिस्...
29/04/2026

क्योंझर में इंसानियत शर्मसार: बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा भाई, अब मिली राहत

ओडिशा के क्योंझर से आई इस घटना ने पूरे सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। 💔

एक भाई, जीतू मुंडा, अपनी मृत बहन के खाते से महज 19 हजार रुपये निकालने के लिए दर-दर भटकता रहा… लेकिन नियमों के आगे उसकी मजबूरी हार गई।

जब बैंक ने डेथ सर्टिफिकेट मांगा, तो वो अपनी बहन का कंकाल ही कंधे पर उठाकर बैंक पहुंच गया… 😢

ये सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता की तस्वीर है।

हालांकि अब प्रशासन हरकत में आया है—

✔️ बैंक ने 19,000 रुपये लौटा दिए
✔️ रेड क्रॉस ने 20,000 रुपये की सहायता दी

लेकिन सवाल अभी भी बाकी है…

क्या इंसानियत से बड़ा कोई नियम हो सकता है? 🤔

ओड़िसा के आदिवासी इलाके मल्लीपासी गाँव में रहने वाला जीतू मुंडा किसी के लिए हीरो नहीं है।न उसके पास बड़े-बड़े सपने हैं, ...
28/04/2026

ओड़िसा के आदिवासी इलाके मल्लीपासी गाँव में रहने वाला जीतू मुंडा किसी के लिए हीरो नहीं है।
न उसके पास बड़े-बड़े सपने हैं, न चमचमाते शब्द।
उसके पास बस एक बहन थी — कलारा मुंडा।
जो अब नहीं है।

दो महीने पहले कलारा की मौत हुई।
बैंक में उसके नाम पर महज़ 19,300 रुपए थे।
जीतू उन पैसों को निकालना चाहता था। बहन के नाम पर मिले वो रुपए — शायद उसकी याद में, या फिर घर चलाने के लिए।

लेकिन जीतू अनपढ़ है।
हस्ताक्षर भी नहीं कर सकता। बैंक वालों के सामने बस एक फरियाद लेकर खड़ा होता —
“बहन मर गई है। पैसे दे दो।”

बैंक कर्मचारी का जवाब था —
“जिसके नाम पर खाता है, वही आएगा, हस्ताक्षर करेगा, तभी पैसे मिलेंगे।”
जीतू हर बार कहता — “मर गई वो।”
लेकिन कानों तक आवाज़ पहुँची ही नहीं।
नियम की दीवार के आगे एक मर चुकी बहन का रोना हवा थी।

दो महीने बीत गए।
गाँव वालों ने उसे पागल कहना शुरू कर दिया। बैंक वाले झुँझला उठे।
एक दिन जीतू के दिमाग़ में कुछ टूट गया —
या शायद एक आखिरी समझ आई:
“अगर बहन का कंकाल ही बता सकता है कि वो मर चुकी है…”

उसने अपनी मृत बहन को ज़मीन से निकाला।
वो कंकाल — दो महीने पहले की ममता और यादों का ढाँचा — उठाया, और सीधे बैंक पहुँच गया।

वहाँ हंगामा मच गया।
बैंक के लोग घबरा गए।
किसी ने पुलिस बुला ली।
लोगों की भीड़ जमा हुई — हँसने वाले थे, सहमने वाले थे, मज़ाक उड़ाने वाले थे।

और जीतू?
वो चुपचाप खड़ा था — एक कंकाल थामे —
जैसे पूछ रहा हो:
“अब मानोगे कि मेरी बहन मर चुकी है?”
vyv


22/04/2026

baiga simran

आकांक्षा के साथ छत्तीसगढ़ के लोगों की आकांक्षाएं हैं, जिसको एक भाई हाथ थामकर आगे बढ़ा रहे हैं  छत्तीसगढ़ के 3 करोड़ की ज...
22/01/2026

आकांक्षा के साथ छत्तीसगढ़ के लोगों की आकांक्षाएं हैं, जिसको एक भाई हाथ थामकर आगे बढ़ा रहे हैं छत्तीसगढ़ के 3 करोड़ की जनता आपके साथ है डरने की जरूरत नहीं है?

कुछ लोगों को आकांक्षा टोंपो का सही कार्य काटे की तरह चुभ रहा है जबकि ओ भी सरगुजा संभाग की एक बेटी है अगर बुरा भला बोल भी...
18/01/2026

कुछ लोगों को आकांक्षा टोंपो का सही कार्य काटे की तरह चुभ रहा है जबकि ओ भी सरगुजा संभाग की एक बेटी है अगर बुरा भला बोल भी दी तो क्या इसमें बुराई है, जब छतीसगढ़ का किसान इतना परेशान है तो उनको दिखाई नहीं देता है अब जनता को फैसला खुद करना होगा नेताओं पर अब भरोसा उठ गया है, आने वाला समय में सब साफ हो जायेगी सता के घमंड में आकर अहंकारी बन गए हैं, आकांक्षा की बात कौनसी बुरी लगती है, मोदी को तो कितने लोग गाली देते हैं, ओ तो कुछ नही बोलता है,

छत्तीसगढ़ कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने आखिर छत्तीसगढ़ के लिए आज तक क्या किया है? धान टोकन के समय किसान परेशान था टेक्न...
18/01/2026

छत्तीसगढ़ कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने आखिर छत्तीसगढ़ के लिए आज तक क्या किया है? धान टोकन के समय किसान परेशान था टेक्निकल इशू था जबकि कांग्रेस के सरकार में ऐसा बिल्कुल नहीं था आज जब जनता उससे सवाल पूछ रही है तो सवालों से मुकर रहा है जनता से हंस के बात नहीं कर सकता है जब वोट लेना था तो सबके पाव छू रहा था आप बताओ यह मंत्री बने लायक है क्या? 2028 में इसका भविष्य खत्म होने वाला है? आकांक्षा टोप्पो जो आवाज उठाई है वह जनता के लिए सही है कितना भी हो केश दर्ज हो जाएआकांक्षा टोप्पो के साथ पूरी जनता खड़ी रहेगी एक आदिवासी बेटी होने के नाते जन समस्याओं को दिखा रही है तो इन नेताओं को दिक्कत हो रहा है 2028 में सब बीजेपी के नेताओं को मुंह बंद कर लेना चाहिए ? जो की लोगों की समस्याओं को नहीं सुनते हैं

फकीर तो झोला लेकर चला जाएगा।लेकिन देश पर 249 ला@ख करोड़ का कर्ज कर दियावो कौन भरेगा ? पूछता हे भारत
17/01/2026

फकीर तो झोला लेकर चला जाएगा।
लेकिन देश पर 249 ला@ख करोड़ का कर्ज कर दिया
वो कौन भरेगा ? पूछता हे भारत

जो देश की सरकार एक 14 साल के बच्चे से डर जाए, वो डरपोक सरकार ट्रम्प का क्या ही जवाब देगी।।🤒मैं बात कर रहा हूं लखनऊ के आश...
17/01/2026

जो देश की सरकार एक 14 साल के बच्चे से डर जाए, वो डरपोक सरकार ट्रम्प का क्या ही जवाब देगी।।🤒

मैं बात कर रहा हूं लखनऊ के आश्वामित गौतम की।

इसके इंस्ट्राग्राम पर 666K फॉलोवर्स हैं, यह लड़का एक क्रांति हैं जो सवाल करता है उस घटिया सिस्टम से जो करप्ट है, ये बाबा साहब अंबेडकर जी,भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आज़ाद, कार्ल मार्क्स, लेनिन और चे ग्वेरा जैसे विचारकों को पढ़ता-समझता रहा और उनसे जुड़े विचारों का विश्लेषण सोशल मीडिया पर साझा करता था।

हालांकि, फिलहाल में उसकी सोशल मीडिया की गतिविधियों को लेकर प्रशासन ने आपत्ति जताई और FIR दर्ज की गई।
सरकार एक 14 साल के लड़के के सवालों से डर गई, जबकि सरकार, नौकरशाही, फौज तुम्हारी फिर भी इतना डर क्यों।

क्योंकि सरकार नहीं चाहती कि तुम पढ़ लिख कर सरकार से सवाल करो,
लेकिन अगर आप में क्रांति है आप में युवाओं वाले जोश हैं जिसे Gen Z कहते हैं तो सवाल करो इस घटिया राजनीति घटिया समाज और घटिया सिस्टम से वरना मरना एक दिन सबको ही है तो क्यों न आजादी से मरा जाए ।
गुलामी में तो गधे भी मरते हैं।।
जय भीम।जय भारत। जय संविधान।।



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