26/08/2022
निराकारमोङ्कारमूलं तुरीयं । गिराज्ञानगोतीतमीशं गिरीशम्।
करालं महाकालकालं कृपालं । गुणागारसंसारपारं नतोऽहम्।।
अर्थात –
हे निराकार, ओंकार के मूल, तुरीय अर्थात तीनों गुणों [वाणी, ज्ञान और इन्द्रियों ]से परे, कैलाशपति, विकराल, महाकाल के भी काल, कृपालु, गुणों के धाम, संसार से परे परमेशवर को मैं नमस्कार करता हूं।
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