10/09/2022
🎋संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा गलत ज्ञान व गलत धारणाओं का खंडन🎋
कबीर परमात्मा अवतार रूप में पृथ्वी पर अपने बारे में संपूर्ण ज्ञान देने आते हैं और अपनी प्यारी आत्माओं को मिलते हैं लेकिन लोग उन्हें न पहचानकर एक साधारण मनुष्य समझने की भूल अपनी अज्ञान सोच और गलत धारणाओं से कर बैठते हैं। ऐसे ही कुछ गलत धारणाओं का खंडन संत रामपाल जी महाराज जी ने प्रमाण सहित किया है
लोगों का कहना है कि परमात्मा निराकार है?
खंडन: परमात्मा साकार है, नर स्वरुप है अर्थात् मनुष्य जैसे आकार का है। एक तरफ जहां सभी संत बताते हैं कि परमात्मा निराकार है वहीं संत रामपाल जी महाराज जी ने वेदों से प्रमाणित करके बताया है कि परमात्मा साकार है।
प्रमाण के लिए देखिए पवित्र ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 86 मन्त्र 26-27, ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 82 मन्त्र 1-2, ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मन्त्र 16-20, ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 94 मन्त्र 1, ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 95 मन्त्र 2, ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 54 मन्त्र 3, ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 20 मन्त्र 1 इन वेद मन्त्रों में साफ और स्पष्ट लिखा है कि परमात्मा साकार यानि नर आकार है। परमेश्वर का तेजोमय शरीर है, वह द्युलोक अर्थात सतलोक के तृतीय पृष्ठ पर विराजमान है। परमात्मा मनुष्य जैसा नराकार (नर आकार) है। श्रीमद्भगवत् गीता अध्याय 4 श्लोक 32 तथा 34 में भी इसका प्रमाण है।
गीता का ज्ञान श्रीकृष्ण ने बोला!
खंडन: अन्य सभी संत कहते हैं कि गीता का ज्ञान श्री कृष्ण जी ने बोला, लेकिन श्रीमद भगवत गीता अध्याय 11 श्लोक 32 में बताया गया है कि काल भगवान कह रहा है कि मैं सर्व लोकों का नाश करने वाला बढ़ा हुआ काल हूँ। इस समय लोकों को नष्ट करने के लिए आया (प्रकट हुआ) हूँ।
श्रीमद्भगवत् गीता का ज्ञान श्री कृष्ण जी के शरीर में प्रवेश करके काल भगवान ने (जिसे वेदों व गीता में “ब्रह्म” नाम से भी जाना जाता है) अर्जुन को सुनाया। जिस समय कौरव तथा पाण्डव अपनी सम्पत्ति अर्थात् दिल्ली के राज्य पर अपने-अपने हक का दावा करके युद्ध करने के लिए तैयार हो गए थे, दोनों की सेनाएं आमने-सामने कुरूक्षेत्र के मैदान में खड़ी थीं। अर्जुन ने देखा कि सामने वाली सेना में भीष्म पितामह, गुरू द्रोणाचार्य, रिश्तेदार, कौरवों के बच्चे, दामाद, बहनोई, ससुर आदि-आदि लड़ने-मरने के लिए खड़े हैं। कौरव और पाण्डव आपस में चचेरे भाई थे। अर्जुन में साधु भाव जागृत हो गया तथा विचार किया कि जिस राज्य को प्राप्त करने के लिए हमें अपने चचेरे भाईयों, भतीजों, दामादों, बहनोइयों, भीष्मपितामह तथा गुरूजनों को मारेंगे। यह भी नहीं पता कि हम कितने दिन संसार में रहेंगे? इसलिए इस प्रकार से प्राप्त राज्य के भोग से अच्छा तो हम भिक्षा माँगकर अपना निर्वाह कर लेंगे, परन्तु युद्ध नहीं करेंगे। यह विचार करके अर्जुन ने धनुष-बाण हाथ से छोड़ दिया तथा रथ के पिछले भाग में बैठ गया।
लोगो का कहना है की संत रामपाल जी महाराज देवी देवताओं की भक्ति छुड़वाते हैं?
खंडन: तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी सभी देवी देवताओं जैसे कि श्री ब्रह्मा जी, श्री शिव जी तथा श्री विष्णु जी की सत्य साधना बताते हैं। इनके मूल मंत्रों को बताते हैं, मंत्रों के प्रभाव से, यह सभी प्रभु जितना भी लाभ दे सकते हैं यह एक सच्चे संत के साधक को देते हैं। वे अपने सत्संग में हमें बताते हैं कि तीनों देवा एक पेड़ की तीन शाखाएं हैं, और अगर कोई भी पेड़ की शाखा काट दे तो वह फल नही प्राप्त कर सकता अर्थात किए गए कर्म का फल देने वाले यही तीन देवता हैं, किंतु यह देवता तभी फल देते हैं जब हम शास्त्र अनुकूल साधना करते हैं। कुल मिलाकर संत रामपाल जी महाराज ब्रह्मा विष्णु महेश जी को छुड़ाते नहीं है बल्कि इनकी सत साधना करना बताते हैं।
ऐसे ही अनेकों गलत धारणाओं का खंडन संत रामपाल जी महाराज जी ने प्रमाण सहित किया है
जग सारा रोगिया रे जिन सतगुरु वैद्य न जाना, जग सारा रोगिया रे।
जन्म मरण का रोग लगा है तृष्णा बढ़ रही खासी।
आवागमण की डोर गले में ये पड़ी काल की फांसी।
जग सारा रोगिया रे।।
जो लोग लोकवेद आधारित पूजा भक्ति करके अपना अनमोल मनुष्य जन्म नष्ट कर जाते हैं और मृत्यु पश्चात 84 लाख योनियों की में जन्मते और मरते रहते हैं। यदि मनुष्य जीवन में ही मनुष्य सतगुरू, तत्वदर्शी संत की खोज कर सतभक्ति आरंभ कर लेता है तो वह अपने मानव जीवन को सफल कर सकता है।
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