19/06/2026
*मुहर्रम का महीना और हज़रत इमाम हुसैन رضي الله عنه का बयान*
# # # *1. इमाम हुसैन رضي الله عنه कौन थे?*
- *नाम*: हुसैन इब्न अली
- *निस्बत*: नबी करीम ﷺ के नवासे, हज़रत अली और हज़रत फ़ातिमा رضي الله عنهما के बेटे
- *लक़ब*: "सैय्यद-उश-शुहदा" यानी शहीदों के सरदार
- नबी ﷺ ने फरमाया: _"हुसैन मुझसे है और मैं हुसैन से हूँ. अल्लाह उससे मोहब्बत करे जो हुसैन से मोहब्बत करे"_
# # # *2. कर्बला का वाक़िया – 10 मुहर्रम 61 हिजरी*
यज़ीद की बैअत से इनकार के बाद इमाम हुसैन अपने अहल-ए-बैत और 72 साथियों के साथ मक्का से कूफ़ा रवाना हुए. कूफ़ा वालों ने धोखा दिया. कर्बला के मैदान में 3 दिन भूखे-प्यासे रखने के बाद 10 मुहर्रम को इमाम हुसैन और उनके साथियों को शहीद कर दिया गया.
*इमाम हुसैन का पैग़ाम*:
_"मैं हुकूमत या फ़साद के लिए नहीं निकला. मैं सिर्फ़ अपने नाना की उम्मत की इस्लाह के लिए निकला हूँ. अम्र बिल मारूफ़ और नही अनिल मुंकर करना चाहता हूँ"_
यानी: मेरा मक़सद सत्ता नहीं, बल्कि दीन को बचाना और हक़ पर क़ायम रहना है.
# # # *3. कर्बला से हमें क्या सबक़ मिलता है?*
सबक़ तफ़्सील
**हक़ पर डट जाना** ज़ुल्म के आगे झुकना नहीं, चाहे जान ही क्यों न चली जाए
**नमाज़ की अहमियत** कर्बला में तीरों की बारिश में भी इमाम हुसैन ने नमाज़ क़ज़ा नहीं की
**सब्र और कुर्बानी** 6 महीने के अली असग़र से लेकर 72 साथियों तक की कुर्बानी दी, पर बातिल से समझौता नहीं किया
**औरतों का किरदार** हज़रत ज़ैनब رضي الله عنها ने यज़ीद के दरबार में हक़ का खुत्बा देकर इस्लाम को ज़िंदा रखा
# # # *4. मुहर्रम में हमें क्या करना चाहिए?*
1. *आशूरा का रोज़ा*: 9-10 या 10-11 मुहर्रम का रोज़ा रखो. नबी ﷺ ने इसका हुक्म दिया
2. *सब्र और इबादत*: नोहा-मातम इस्लाम में नहीं है. सब्र, क़ुरआन, दुरूद और सदक़ा बेहतर है
3. *हुसैनी किरदार*: झूठ, ज़ुल्म, हराम से बचो. हक़ बात कहो चाहे कड़वी लगे
4. *पानी पिलाना*: इमाम हुसैन प्यासे शहीद हुए थे, इसलिए प्यासों को पानी पिलाना बड़ा सवाब है
*खुलासा*: मुहर्रम ग़म का नहीं, _अज़्म का महीना_ है. इमाम हुसैन ने सिखाया कि ज़िंदा क़ौमें सर कटा सकती हैं, पर सर झुका नहीं सकतीं.
_"क़त्ल-ए-हुसैन असल में मर्ग-ए-यज़ीद है,
इस्लाम ज़िंदा होता है हर कर्बला के बाद"_
अल्लाह हमें हुसैनी किरदार अपनाने की तौफ़ीक़ दे. अमीन 🤲
तुम आशूरा के दिन क्या ख़ास अमल करते हो?