03/03/2026
विपिन रावत की मृत्यु पर रोना नहीं आया,
मेजर मोहित शर्मा के बलिदान पर रोना नहीं आया,
पहलगाम नरसंहार पर रोना नहीं आया,
कश्मीर नरसंहार पर रोना नहीं आया,
संभल दंगों में जिंदा जलाए गए बेगुनाहों पर रोना नहीं आया,
पुलवामा पर रोना नहीं आया,
दंतेवाड़ा पर रोना नहीं आया,
अहमदाबाद विमान दुर्घटना पर रोना नहीं आया,
कश्मीर में देश के लिए तमाम सैनिकों के बलिदान पर रोना नहीं आया
और तो और अब्दुल कलाम तो मुस्लिम थे उनकी मृत्यु पर भी रोना नहीं आया लेकिन... विदेश में बैठे एक नेता जिसे युद्ध में मारा गया है उसके लिए ऐसा करुणा क्रंदन ऐसा बेवा विलाप जैसे पता नहीं क्या हो गया।
सड़कों पे प्रदर्शन, बाजार बंद, नारेबाजी, आंसुओं का सैलाब, आंखों में गुस्सा, ट्रंप और नेतन्याहू की कबर खोदने को तैयार भीड़... ऐसे छाती पीट रहे हैं जैसे खामनेई ने इनके घर के कितने चिराग रौशन कर दिए थे।
जब से खूंखार दड़ियल खामनेई को 72 हूर जहाँ भेजा है यहाँ के सड़ी के चचा और विपक्ष के चिमगादड़ तार पे लटक के चीख रहे हैं कि हाय खामनेयी मार दिया ये सब मूड़ी ने किया है जब से मूड़ी इसरायल होकर आया वह हमारे दुश्मन नेतान्याहु को बोलकर आया है कि ईरान को ठोक दो हद है पेण चोर आज ईरान इनके पहले के अब्बाईयों अरब uae कतर ओमान बहरीन मिश्र जॉर्डन पर मिसाइलें ठोक रहा वहां के रहायिशी इलाके जला रहा तब इन मादर खोद के पिल्लोँ के गांव का भूसा नहीं जला वहां ईरान के बहुतायत लोग जो इस हत्यारे निर्दयी के मारे जाने पर ला लाहोट हैं और यहाँ के ये कठ मुए ऐसे विलाप रहे हैं जैसे इनका सगा अब्बा निकल लिया हो जबकि खुद कभी खामनई इन टोपी बाज़ो को कोई भाव नहीं दिया उल्टा इन्हे खूब गालियों से नवाजता था
सद्दाम का हश्र याद है , जब उसे फाँ..सी चढाया गया ?????
लीबिया के तानाशाह मुअम्मर अल गद्दाफी का हश्र तो याद ही होगा ना , कैसे गिडगिडा रहा था वो ??????
अच्छा छोडो , जब पाकिस्तान मे , ओसामा बिन लादेन औरतो के पीछे छिपकर भी मा...रा गया था वो तो याद ही होगा ना ??????
अबू बक्र अल बगदादी नाम का काले कपडो वाला जोकर तो जरूर याद होगा , जब अमेरिकी कुत्तो ने गुफा मे दबोच लिया था , और मरीन्स ने बकरियों के पास भेजा था ।
अयमान अल जवाहिरी , अबू मुसाफ अल जरकावी , जो IS•IS के चीफ थे , वो तो याद ही होंगे ना ??????
वो पिलपिलिस्तीन का ईस्माईल हानियां का तो याद ही होगा बाबा???
एक गलती जरूर की है इस बार ईजराइल ने , मिसाईल नही ठोकनी थी , जिंदा पकडना था , जलील करना था , जुलूस निकालकर दुर्गति करनी थी , तब फाँ...सी पर टांगना था ।
अबे जाओ बे, आज तक फटी टाँझ नही उखडी तुमसे अमेरिका , या ईजराइल की ।
बस सडको पर उतरकर छाती पीट लो, होगा अब भी कुछ नही , बस खर्चे पानी लायक चंदा मिल जायेगा ।
भक्क नामर्द ब्रिगेड
केवल मासूमों पर औरतों, बच्चों, निहत्थे लोगों पर हथियार चला सकते हो तुम
Dilip singh