26/09/2023
अभी भी यकीन नहीं हो रहा है। क्या कहूं । किससे कहूं । हमेशा तमाम सोचते विचारते मेरे हर काम को शब्दों में पिरोते और फिर यह पूछ भी लेते की सर यह ठीक रहेगा । डाल दूं पोस्ट। तुम्हारे काम को देखकर तो लगता था की क्यों बार-बार पूछते हो। तुमसे बेहतर कोई नहीं कर सकता । मैं क्या जानता था कि तुम जो मेरे लिए कर रहे हो एक दिन तुम्हारे लिए वही मुझे लिखना पड़ेगा। श्रेष्ठ तुम अपने काम में सर्वश्रेष्ठ थे ।जीवन में कुछ लोग ही ऐसे आते हैं जो कभी भूलते नहीं। मैंने तो कभी सोचा भी नहीं था की कभी तुम्हें भी श्रद्धांजलि देनी पड़ेगी। निश्चल और सहज स्वभाव, हर व्यक्ति से मुस्कुराते हुए प्यार से मिलना उसी ने तुम्हें श्रेष्ठतम बना दिया था। तुम्हारे कारण ही मैं निश्चिंत था की जब श्रेष्ठ हैं तो वह सर्वश्रेष्ठ ही करेंगे सर्वश्रेष्ठ ही लिखेंगे। श्रेष्ठ तुम्हारे लिए इतनी बड़ी दुनिया कैसे छोटी पड़ गई। तुम्हारे जैसे कुछ ही लोग होते हैं। मेरे पास तुम्हारे लिए उतने शब्द नहीं है जितने आंसू हैं। मैं कैसे लिखूं कि श्रेष्ठ तुम्हें शत-शत नमन। हृदय से श्रद्धांजलि । कुछ दिन में तुमने केवल मेरे दिल में नहीं बल्कि हजारों लोगों के मन में जगह बना ली थी। वह जगह हमेशा रहेगी । जहां भी रहो जिस दुनियां में रहो सुखी रहो । भगवान तुम्हें अपने चरणों में स्थान दें बस यही बार-बार प्रार्थना है।