शिक्षित बनो, संगठित हो, संघर्ष करो।

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शिक्षित बनो, संगठित हो, संघर्ष करो। समाजिक कुरीतियों से मुक्त व्यक्तित्व का निर्माण

28/07/2026
दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों की लड़ाई लड़ते हुए पुलिस की बर्बरता का शिकार होने वाले अनिल सिंह इस पूरे आंदोलन के सबसे च...
26/07/2026

दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों की लड़ाई लड़ते हुए पुलिस की बर्बरता का शिकार होने वाले अनिल सिंह इस पूरे आंदोलन के सबसे चर्चित चेहरों में से एक बनकर सामने आए।
अनिल सिंह मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले (मझिगवां गाँव) के रहने वाले हैं। वे दसवीं तक की पढ़ाई करने के बाद खेती-किसानी के काम में लग गए, लेकिन उन्हें अक्सर देश और छात्रों के भविष्य की चिंता रहती थी। अपने बच्चों के भविष्य को लेकर भी वे लगातार चिंतित रहते थे।
इसी चिंता के चलते 17 जुलाई को वे मऊगंज स्थित अपने गांव मझिगवां से दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे, जहां उन्हें पुलिस की लाठियों का सामना करना पड़ा।
अनिल सिंह के दो बच्चे हैं। उनका छह वर्षीय बेटा श्रेयांश पहली कक्षा में और चार वर्षीय बेटी अंशिका एलकेजी में पढ़ती है। अनिल सिंह दोनों बच्चों को घर पर छोड़कर जंतर-मंतर गए थे। प्रदर्शन समाप्त होने के बाद बच्चों ने कहा, “पापा, जल्दी घर आ जाओ।”
आपके बहादुर को देश के करोड़ों युवा युगों युगों तक याद रखेंगे। आप जल्द स्वस्थ हों इसी कामनाओं के साथ बार बार सहस्त्र बार धन्यवाद, प्रणाम।

With Srishti Ambedkar – I just got recognized as one of their top fans! 🎉
25/07/2026

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1968 में ललई सिंह यादव ने 'दि रामायना: ए ट्रू रीडिंग' का हिन्दी अनुवाद 'सच्ची रामायण' नाम से प्रकाशित कराया। पुस्तक प्रक...
04/07/2026

1968 में ललई सिंह यादव ने 'दि रामायना: ए ट्रू रीडिंग' का हिन्दी अनुवाद 'सच्ची रामायण' नाम से प्रकाशित कराया। पुस्तक प्रकाशित होते ही इसका व्यापक विरोध हुआ और कई धार्मिक संगठनों ने इसके खिलाफ प्रदर्शन किए।

तत्कालीन उत्तर प्रदेश सरकार ने 8 दिसम्बर 1969 को धार्मिक भावनाएँ भड़काने के आरोप में इस पुस्तक को जब्त कर लिया। इसके बाद मामला न्यायालय पहुँचा, जहाँ अधिवक्ता बनवारी लाल यादव ने पुस्तक के पक्ष में प्रभावशाली पैरवी की। 19 जनवरी 1971 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जब्ती का आदेश निरस्त करते हुए सरकार को सभी जब्त प्रतियाँ वापस करने तथा ललई सिंह यादव को ₹300 वाद-व्यय देने का निर्देश दिया।

बाद में यह मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुँचा। न्यायालय ने यह माना कि रामायण को ऐतिहासिक रूप से सिद्ध घटना नहीं माना जा सकता, बल्कि यह एक साहित्यिक महाकाव्य है। अंततः ललई सिंह यादव इस कानूनी लड़ाई में सफल रहे और पुस्तक पर लगी जब्ती समाप्त कर दी गई।



03/07/2026

ईश्वर के अस्तित्व पर अगर सक है तो इनके जिम्मेदार सिर्फ और सिर्फ ईश्वर को मानने वाले हैं।

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