11/12/2025
महागामा के नए पार्क की कहानी भी किसी बॉलीवुड फ़िल्म जैसी निकली — बड़ा शोर-शराबा, खूब फोटोसेशन, फिर अंत में "टू बी कंटीन्यूड..."
पार्क महीनों पहले बन गया, पर उद्घाटन रुक गया — शायद नेताजी सोच रहे हैं कि रिबन कटेगा तो झूला अपने आप जुड़ जाएगा, रेलिंग चमक उठेगी और कूड़ा हवा में उड़कर डस्टबिन में पहुँच जाएगा। वाह! क्या “स्वच्छ भारत” का आइडिया है!
पार्क के बगल में माँ काली का मंदिर है, और उसके सामने पूरा प्लास्टिक का मेला। थर्माकोल, गंदगी और धुआँ का ऐसा संगम, कि लगता है नगर पंचायत ने नया स्लोगन लॉन्च किया है —
“पार्क में हरियाली नहीं, धूल और डेंगू फ्री मिलेगी!”
बोर्ड लग गया, फ़ोटो खिंच गई, नेताजी की कुर्सी गर्म हो गई — अब पार्क टूटता रहे तो टूटे, बच्चों को मलेरिया बोनस में मिलता रहे, क्या फ़र्क पड़ता है! आखिर ऑक्सीजन नेताजी को तो सिर्फ़ वोटिंग डे पर चाहिए, बाकी वक्त तो AC में ही गुज़र जाता है।
महागामा का यह “स्वच्छ भारत मिशन” देखकर अब तो लगता है, हम “अमृत काल” में नहीं, “जंग काल” में जी रहे हैं — जहाँ लोहे की रेलिंग भी शर्म से जंग खा रही है।
तो माननीय जी, उद्घाटन कर दो या फिर पार्क पर बड़ा सा ताला लगवा दो। बाहर बोर्ड लगवा दो —
“यहाँ केवल फोटो खिंचवाने के लिए आना! खेलने की कोशिश की तो मलेरिया घर फ्री पहुँचेगा।”
जय हो नगर पंचायत! जय हो विकास!