Shushil pathak fens club

Shushil pathak fens club he is a well educated social worker. he is a security of *avirl dhara snshodhan seva sansthan* .his view if we want and determine "we change the society."

we want your support for it. you give me your support to me because I do it

14/09/2021

चलिए हजारो साल पुराना इतिहास पढ़ते हैं।

सम्राट शांतनु ने विवाह किया एक मछुवारे की पुत्री सत्यवती से।उनका बेटा ही राजा बने इसलिए भीष्म ने विवाह न करके,आजीवन संतानहीन रहने की भीष्म प्रतिज्ञा की।

सत्यवती के बेटे बाद में क्षत्रिय बन गए, जिनके लिए भीष्म आजीवन अविवाहित रहे, क्या उनका शोषण होता होगा?

महाभारत लिखने वाले वेद व्यास भी मछवारे थे , पर महर्षि बन गए, गुरुकुल चलाते थे वो।

विदुर, जिन्हें महा पंडित कहा जाता है वो एक दासी के पुत्र थे , हस्तिनापुर के महामंत्री बने, उनकी लिखी हुई विदुर नीति, राजनीति का एक महाग्रन्थ है।

भीम ने वनवासी हिडिम्बा से विवाह किया।

श्रीकृष्ण दूध का व्यवसाय करने वालों के परिवार से थे,

उनके भाई बलराम खेती करते थे , हमेशा हल साथ रखते थे।

यादव क्षत्रिय रहे हैं, कई प्रान्तों पर शासन किया और श्रीकृषण सबके पूजनीय हैं, गीता जैसा ग्रन्थ विश्व को दिया।

राम के साथ वनवासी निषादराज गुरुकुल में पढ़ते थे‌ ।

उनके पुत्र लव कुश महर्षि वाल्मीकि के गुरुकुल में पढ़े जो वनवासी थे और पहले डाकू थे।

तो ये हो गयी वैदिक काल की बात, स्पष्ट है कोई किसी का शोषण नहीं करता था,सबको शिक्षा का अधिकार था, कोई भी पद तक पहुंच सकता था अपनी योग्यता के अनुसार।

वर्ण सिर्फ काम के आधार पर थे वो बदले जा सकते थे जिसको आज इकोनॉमिक्स में डिवीज़न ऑफ़ लेबर कहते हैं वो ही।

प्राचीन भारत की बात करें, तो भारत के सबसे बड़े जनपद मगध पर जिस नन्द वंश का राज रहा वो जाति से नाई थे ।

नन्द वंश की शुरुवात महापद्मनंद ने की थी जो की राजा नाई थे। बाद में वो राजा बन गए फिर उनके बेटे भी, बाद में सभी क्षत्रिय ही कहलाये ।

उसके बाद मौर्य वंश का पूरे देश पर राज हुआ, जिसकी शुरुआत चन्द्रगुप्त से हुई,जो कि एक मोर पालने वाले परिवार से थे
और एक ब्राह्मण चाणक्य ने उन्हें पूरे देश का सम्राट बनाया । 506 साल देश पर मौर्यों का राज रहा।

फिर गुप्त वंश का राज हुआ, जो कि घोड़े का अस्तबल चलाते थे और घोड़ों का व्यापार करते थे।
140 साल देश पर गुप्ताओं का राज रहा।

केवल पुष्यमित्र शुंग के 36 साल के राज को छोड़ कर *92% समय प्राचीन काल में देश में शासन उन्ही का रहा, जिन्हें आज दलित पिछड़ा कहते हैं तो शोषण कहां से हो गया?
यहां भी कोई शोषण वाली बात नहीं है।

फिर शुरू होता है मध्यकालीन भारत का समय जो सन 1100- 1750 तक है, इस दौरान अधिकतर समय, अधिकतर जगह मुस्लिम शासन रहा।

अंत में मराठों का उदय हुआ, बाजी राव पेशवा जो कि ब्राह्मण थे, ने गाय चराने वाले गायकवाड़ को गुजरात का राजा बनाया,
चरवाहा जाति के होलकर को मालवा का राजा बनाया।

अहिल्या बाई होलकर खुद बहुत बड़ी शिवभक्त थी।
ढेरों मंदिर गुरुकुल उन्होंने बनवाये।

मीरा बाई जो कि राजपूत थी, उनके गुरु एक चर्मकार रविदास थे
और रविदास के गुरु ब्राह्मण रामानंद थे|।

यहां भी शोषण वाली बात कहीं नहीं है।

मुग़ल काल से देश में गंदगी शुरू हो गई और यहां से
पर्दा प्रथा, गुलाम प्रथा, बाल विवाह जैसी चीजें शुरू होती हैं।

1800-1947 तक अंग्रेजो के शासन रहा और यहीं से जातिवाद शुरू हुआ ।
जो उन्होंने फूट डालो और राज करो की नीति के तहत किया।

अंग्रेज अधिकारी निकोलस डार्क की किताब
"कास्ट ऑफ़ माइंड" में मिल जाएगा कि कैसे अंग्रेजों ने जातिवाद, छुआछूत को बढ़ाया और कैसे स्वार्थी भारतीय नेताओं ने अपने स्वार्थ में इसका राजनीतिकरण किया।

इन हजारों सालों के इतिहास में
देश में कई विदेशी आये जिन्होंने भारत की सामाजिक स्थिति पर किताबें लिखी हैं, जैसे कि मेगास्थनीज ने इंडिका लिखी, फाहियान , ह्यू सांग और ‌अलबरूनी जैसे कई। किसी ने भी नहीं लिखा की यहां किसी का शोषण होता था।

योगी आदित्यनाथ
जो ब्राह्मण नहीं हैं, गोरखपुर मंदिर के महंत हैं, पिछड़ी जाति की उमा भारती महा मंडलेश्वर रही हैं।
जन्म आधारित जातीय व्यवस्था हिन्दुओ को कमजोर करने के लिए लाई गई थी।

इसलिए भारतीय होने पर गर्व करें और घृणा, द्वेष और भेदभाव के षड्यंत्र से खुद भी बचें और औरों को भी बचाएं।।🙏🌺🙏🌺

05/09/2021

शिक्षक धर्म के पुरोधा व समाज के दिशा निर्देशक विप्र बन्धुओं ओर समस्त शिक्षकों को शिक्षक दिवस की हार्दिक बधाई ओर शुभकामनायें

सभी सम्मानित साथियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभ मंगलकामनायें
14/08/2021

सभी सम्मानित साथियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभ मंगलकामनायें

*यह रचना दिल को छू गई।*तीन   पहर   तो   बीत   गये,बस  एक  पहर ही बाकी है।जीवन हाथों से फिसल गया,बस  खाली  मुट्ठी  बाकी  ...
30/07/2021

*यह रचना दिल को छू गई।*

तीन पहर तो बीत गये,
बस एक पहर ही बाकी है।
जीवन हाथों से फिसल गया,
बस खाली मुट्ठी बाकी है।

सब कुछ पाया इस जीवन में,
फिर भी इच्छाएं बाकी हैं
दुनिया से हमने क्या पाया,
यह लेखा - जोखा बहुत हुआ,
इस जग ने हमसे क्या पाया,
बस ये गणनाएं बाकी हैं।

इस भाग-दौड़ की दुनिया में
हमको इक पल का होश नहीं,
वैसे तो जीवन सुखमय है,
पर फिर भी क्यों संतोष नहीं !
क्या यूं ही जीवन बीतेगा,
क्या यूं ही सांसें बंद होंगी ?
औरों की पीड़ा देख समझ
कब अपनी आंखें नम होंगी ?
मन के अंतर में कहीं छिपे
इस प्रश्न का उत्तर बाकी है।

मेरी खुशियां, मेरे सपने
मेरे बच्चे, मेरे अपने
यह करते - करते शाम हुई
इससे पहले तम छा जाए
इससे पहले कि शाम ढले
कुछ दूर परायी बस्ती में
इक दीप जलाना बाकी है।
तीन पहर तो बीत गये,
बस एक पहर ही बाकी है।
जीवन हाथों से फिसल गया,
बस खाली मुट्ठी बाकी है।
साभार

😊👏👏

30/07/2021

वीर भूमि बुंदेलखण्ड की धरा पर जन्मे मेरे साथियो आप सभी ने अपने पौरुष ओर सामर्थ से जो सामर्थ प्राप्त किया है वो तब तक सार्थक नहीं हो सकता जब तक कि हम आप सभी अपनी मातृभूमि व यहाँ की जनता (सम्पूर्ण बुन्देलखण्ड) के विकास के लिए एक साथ मिलकर कार्य नही करेंगे।
आज बुन्देलखण्ड की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक अशिक्षा पर आप का ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा।
हमारे हर गांव व शहर में बहुत से विद्यालय है पर उनसे निकलने वाले बच्चे क्या अपने भविष्य को लेकर निश्चिंत हो पाते है ,मेरे कहने का अर्थ उनके रोजगार से ओर उनके जीवन स्तर में सुधार से है।
किसी समाज का विकास बिना अच्छी शिक्षा के सम्भव नही है,आज बुन्देलखण्ड में कोन सा ऐसा विद्यालय/महाविद्यालय/यूनिवर्सिटी है जो राष्ट्रीय स्तर की हो या उच्च स्तर के स्कॉलर निकाल रही हो मुझे ऐसा दूर दूर तक दिखलाई नही देता।
इसका सबसे महत्वपूर्ण कारण राजनैतिक इच्छाशक्ति की कमी है आज बुन्देखण्ड में ऐसा कोई भी नेतृत्वकर्ता दूर दूर तक नहीं दिखता जो राष्ट्रीय परिदृश्य में अपने को प्रतिस्थापित कर पाया हो दूसरी ओर जनता का सुशुप्तावस्था में रहना भी एक महत्वपूर्ण घटक है।
जनता को जाति धर्म के नाम पर छोटे छोटे ग्रुप में विभाजित कर दिया गया है (जैसे कि कभी अरब में कबीले हुआ करते थे) जिसके कारण क्षेत्र के लोग अपनी बात मुखर रूप से नही उठा पाते और सर्वाधिक राजस्व देने के बाद भी बुन्देलखण्ड उपेक्षा का शिकार है।
साथियो यदि हमें अपने क्षेत्र का विकास करना है तो सबसे पहले बच्चों की शिक्षा के लिए हमें सार्थक कदम उठाते हुए अपने अधिकारों के लिए मिलकर लड़ना होगा ओर समाज को एकजुट करना होगा।
क्या आप तैय्यार है यदि हाँ तो आप इस दिशा में अपने विचार अवस्य दीजिये उनका स्वागत है , यदि हम मिलकर कार्य करेंगे तो निश्चित रूप से क्षेत्र के विकास में सहयोगी होंगे।
जय मात्रभूमि
जय बुन्देलखण्ड

जय बुंदेलखंड
28/07/2021

जय बुंदेलखंड

विचार-विचार का कोई रूप व स्वरूप नही होता है । इसका कारण यह है इसका अपना कोई अस्तित्व नही होता है । यह दूसरी चीजो के अस्त...
26/07/2021

विचार-विचार का कोई रूप व स्वरूप नही होता है । इसका कारण यह है इसका अपना कोई अस्तित्व नही होता है । यह दूसरी चीजो के अस्तित्व को व्यक्त करता है और मानव को इसका बोध कराता है । यह जिस के रूप व स्वरूप को व्यक्त करता है उसी के रूप व स्वरूप को धारण कर लेता है । यही कारण है कि मानव हर क्षण विचार का किसी न किसी रूप में उपयोग करते हुए इसके वास्तविक स्वरूप व रूप से अनभिज्ञ होता है।
जय मातृभूमि

साभार

25/07/2021

किसी भी सामाजिक कार्य की शुरुवात एक सदविचार से होती है,इसलिए सकारात्मक विचार ओर नवीन प्रकल्प पर कार्य दोनों एक साथ चलने दीजिये।

आओ बृक्ष लगायें।अपनी धरा बचायें।।
24/07/2021

आओ बृक्ष लगायें।
अपनी धरा बचायें।।

तुलसीदास जी ने सुन्दर कांड में,  जब हनुमान जी ने लंका मे आग लगाई थी, उस प्रसंग पर लिखा है -**हरि प्रेरित तेहि अवसर चले म...
24/07/2021

तुलसीदास जी ने सुन्दर कांड में, जब हनुमान जी ने लंका मे आग लगाई थी, उस प्रसंग पर लिखा है -*

*हरि प्रेरित तेहि अवसर चले मरुत उनचास।*
*अट्टहास करि गर्जा कपि बढ़ि लाग अकास।।25।।*

अर्थात : जब हनुमान जी ने लंका को अग्नि के हवाले कर दिया तो --
*भगवान की प्रेरणा से उनपचासों पवन चलने लगे।*
*हनुमान जी अट्टहास करके गर्जे और आकार बढ़ाकर आकाश से जा लगे।*

*मैंने सोचा कि इन उनचास मरुत का क्या अर्थ है ? यह तुलसी दास जी ने भी नहीं लिखा। फिर मैंने सुंदरकांड पूरा करने के बाद समय निकालकर 49 प्रकार की वायु के बारे में जानकारी खोजी और अध्ययन करने पर सनातन धर्म पर अत्यंत गर्व हुआ। तुलसीदासजी के वायु ज्ञान पर सुखद आश्चर्य हुआ, जिससे शायद आधुनिक मौसम विज्ञान भी अनभिज्ञ है ।*

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि *वेदों में वायु की 7 शाखाओं के बारे में विस्तार से वर्णन मिलता है*। अधिकतर लोग यही समझते हैं कि वायु तो एक ही प्रकार की होती है, लेकिन उसका रूप बदलता रहता है, जैसे कि ठंडी वायु, गर्म वायु और समान वायु, लेकिन ऐसा नहीं है।
साभार -

*दरअसल, जल के भीतर जो वायु है उसका वेद-पुराणों में अलग नाम दिया गया है और आकाश में स्थित जो वायु है उसका नाम अलग है। अंतरिक्ष में जो वायु है उसका नाम अलग और पाताल में स्थित वायु का नाम अलग है। नाम अलग होने का मतलब यह कि उसका गुण और व्यवहार भी अलग ही होता है। इस तरह वेदों में 7 प्रकार की वायु का वर्णन मिलता है।*

*ये 7 प्रकार हैं- 1.प्रवह, 2.आवह, 3.उद्वह, 4. संवह, 5.विवह, 6.परिवह और 7.परावह।*

1. प्रवह : पृथ्वी को लांघकर मेघमंडलपर्यंत जो वायु स्थित है, उसका नाम प्रवह है। इस प्रवह के भी प्रकार हैं। यह वायु अत्यंत शक्तिमान है और वही बादलों को इधर-उधर उड़ाकर ले जाती है। धूप तथा गर्मी से उत्पन्न होने वाले मेघों को यह प्रवह वायु ही समुद्र जल से परिपूर्ण करती है जिससे ये मेघ काली घटा के रूप में परिणत हो जाते हैं और अतिशय वर्षा करने वाले होते हैं।

2. आवह : आवह सूर्यमंडल में बंधी हुई है। उसी के द्वारा ध्रुव से आबद्ध होकर सूर्यमंडल घुमाया जाता है।

3. उद्वह : वायु की तीसरी शाखा का नाम उद्वह है, जो चन्द्रलोक में प्रतिष्ठित है। इसी के द्वारा ध्रुव से संबद्ध होकर यह चन्द्र मंडल घुमाया जाता है।

4. संवह : वायु की चौथी शाखा का नाम संवह है, जो नक्षत्र मंडल में स्थित है। उसी से ध्रुव से आबद्ध होकर संपूर्ण नक्षत्र मंडल घूमता रहता है।

5. विवह : पांचवीं शाखा का नाम विवह है और यह ग्रह मंडल में स्थित है। उसके ही द्वारा यह ग्रह चक्र ध्रुव से संबद्ध होकर घूमता रहता है।

6. परिवह : वायु की छठी शाखा का नाम परिवह है, जो सप्तर्षिमंडल में स्थित है। इसी के द्वारा ध्रुव से संबद्ध हो सप्तर्षि आकाश में भ्रमण करते हैं।

7. परावह : वायु के सातवें स्कंध का नाम परावह है, जो ध्रुव में आबद्ध है। इसी के द्वारा ध्रुव चक्र तथा अन्यान्य मंडल एक स्थान पर स्थापित रहते हैं।

*इन सातो वायु के सात सात गण हैं जो निम्न जगह में विचरण करते हैं-*

ब्रह्मलोक, इंद्रलोक, अंतरिक्ष, भूलों की पूर्व दिशा, भूलोक की पश्चिम दिशा, भूलोक की उत्तर दिशा और भूलोक कि दक्षिण दिशा। इस तरह
*7 *7=49। कुल 49* मरुत हो जाते हैं जो देव रूप में विचरण करते रहते हैं।

*है ना अद्भुत ज्ञान। हम अक्सर रामायण, भगवद् गीता पढ़ तो लेते हैं परंतु उनमें लिखी छोटी-छोटी बातों का गहन अध्ययन करने पर अनेक गूढ़ एवं ज्ञानवर्धक बातें ज्ञात होती हैं।*
*🙏🚩 जय श्री राम*

बाधायें आति है आये,घिरे प्रलय की घोर घटायेहाथो के नीचे अंगारे,सिर पर बरसे यदि ज्वालायें-------------------------कदम मिला...
23/07/2021

बाधायें आति है आये,घिरे प्रलय की घोर घटाये
हाथो के नीचे अंगारे,सिर पर बरसे यदि ज्वालायें-------------------------
कदम मिलाकर चलना होगा।

धर्मो रक्षति रक्षताजीव सेवा ईश्वर सेवा
22/07/2021

धर्मो रक्षति रक्षता
जीव सेवा ईश्वर सेवा

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