04/06/2022
महाराजा सूरजमल से वीरों की याद दिलाता हूँ
अमर प्रेम था देशभक्ति का जिनके सिर चढ़कर बोला
माटी की रक्षा की खातिर जिनका खून हमेशा था खौला
चेहरे पर जिसके ओज हमेशा सूर्योदय सा चमक गया
अफगानी आक्रांता अब्दाली जिसका खत पढ़कर ही धमक गया
राजनीति और कूटनीति के बेहद अपार वह ज्ञानी थे
अंग्रेज-मुगल-अफगानी जिसके आगे भरते पानी थे
भारत माता का वीर पुत्र वह हिंदू धर्म का रक्षक था
सत्यप्रिय,था न्यायप्रिय,अन्यायी दानव का भक्षक था
जितने भी उसने युद्ध किए थे कभी नहीं वह हारा था
फितरत दिखलायी मुगलों ने धोखे से उसको मारा था
मातृभूमि का प्यारा सपूत एक अमिट छाप था छोड़ गया
सुदृढ़ शासक, वीर, साहसी, पुत्र जवाहर छोड़ गया
वही वीरता, वही सुशासन, कूटनीति रग-रग में थी
देखो यश गाथा आज भरतपुर की फैली सारे जग में थी
ना कभी झुका है ये ना कभी झुकेगा
ये हिन्दू का सिर है गर्व से उठेगा
फक्र है हमें सूरजमल के संस्कारों पे
भगवा ना झुका है भगवा ना झुकेगा।।