03/06/2026
मेरे पति 6 महीने बाद परदेश से गांव आये। जैसे ही आकर बैठे मेरी सासू जी ने आकर कहा- "आ गया मेरा लाल! कितना दुबला पतला लग रहा है रे! खाली काम के चक्कर में रहता है? आराम भी नहीं करता क्या!
""दस घंटे की शिफ्ट है अम्मा जी, बैठकर थोड़े काम करते हैं! ये लो, तुम्हारी पसंदीदा शाल!" --कहकर उन्होंने शाल का पैकेट सासू जी को थमा दिया।
"कितने का है?
""700 सौ का!""
इतना मंहगा शाल लाने की क्या जरूरत थी? इसके पैसे से तू खुद के लिए फल ले लेता! देख , तू कितना कमजोर हो गया है? अब तो सर्दी का मौसम भी आ गया है!"- -मां जी ने शिकायत भरे लहजे मे कहा....
पूरा दिन घरवालों से मिलने में बीत गया! रात हुई, तो एकांत में उसने बैग खोलकर एक छोटा पैकेट निकाला और मेरी ओर बढ़ाया--
"क्या है ये?"
"तुम्हारी पसंदीदा विदेशी चाकलेट, खास तेरे लिए!"
"केवल मेरे लिए ही क्यों!"
"अरे समझा करो। सबके लिए मिठाई तो लाया ही हूं!"
"कितने का है?"
"पांच सौ का!"
"हाय रे!" "इम्पोर्टेड ब्रांड है!"
"तो क्या फर्क पड़ता!" "तू नहीं समझेगी!
खाकर के देखना!"
"पर घर में और लोग भी हैं। माँ, बाबूजी, दो भाई, सब यूज कर लेते तो क्या बिगड़ जाता!"
"अरे यार बहुत मंहगी है?, बस एक ही पैकेट मिली ही हैं इसमें, सबके लिए कहाँ से लाता!"
"तो शेयर करके यूज कर लेते!"
"और तू!"
"बहुत चाहते हो मुझे?"
"ये भी कोई पूछने वाली बात है!"
"वाह! कितनी लकी हूँ मैं जो तू मेरा पति है!
"मेरी आँखें नम हो गईं...
"तुम्हारे जैसा पति बहुत किस्मत से मिलता है!"
"सच कह रही हूं.... लेकिन जानते हैं, ये खुशकिस्मती मुझे किसने दी?"
"किसने?"
"तुम्हारे माँ और बाबूजी ने! उन्होंने ही तुझे इतना हँसमुख, मेहनती और चाहने वाला इंसान बनाया!
सोचों...., तुम्हारे जन्म पर खुशी मनाने के लिए मैं नहीं थी, एक मासूम बच्चे से जवान बनने तक, पढ़ाने-लिखाने और कमाने लायक बनाने तक मैं नहीं थी। मैं तुम्हारे जीवन में आऊँ, इस लायक भी उन्होंने ही तुझे तराशा!"
"तू आखिर क्या कहना चाहती है?"
"यही कि ये पैकेट कल सुबह खुलेगा!
एक मां है, जो 700 सौ की शाल पर भी इसलिए दुखी होती है कि उसके बेटे ने खुद पर खर्च नहीं किया!
और वो बेटा पांच सौ की चाकलेट चुपके से अपनी बीबी को दे, ये सही लग रहा है तुम्हे!"
वो खामोश हो गया!
मैंने बात जारी रखी..."माँ-बाबूजी गाँव में रहते हैं! तू ही एकमात्र कमाने वाला शहरी है। बहुत सारी चीजें ऐसी होंगी, जो उन्हें कभी नसीब न होंगी, नाम भी न सुन पाएँगे! भगवान ने तुझे ये मौका दिया है कि तू उन्हें ये अनोखी खुशियाँ दे!
वैसे कल को हमारे भी बच्चे होंगे! अगर यही वे करेंगे तो......!
"अचानक उन्हें होश आ गया। चाकलेट का पैकेट वापस बैग में रखकर वो बिस्तर पर लेटा और आँसू पोंछने लगा!
"क्या हुआ? बुरा लगा?"
"मर्दों को कमजोरी नहीं दिखानी चाहिए! अपनी असली खुशी को पहचानो! जिंदगी का सच्चा मजा अपनों को हँसते देखने में है!
समझे पतिदेव.