Mascot Realtors

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सरकारी कारिंदों को अच्छी खबर, आशियाना खरीदने के लिए 30 प्रतिशत छूटराज्य कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों के लिए बनाई गई आवा...
12/01/2013

सरकारी कारिंदों को अच्छी खबर, आशियाना खरीदने के लिए 30 प्रतिशत छूट
राज्य कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों के लिए बनाई गई आवास नीति को शुक्रवार को मंजूरी दे दी है। इससे कर्मचारियों को ग्रुप हाउसिंग में 27 से 30 प्रतिशत कम लागत पर आवास उपलब्ध हो सकेंगे। इसके लिए कर्मचारियों को अपनी गृह निर्माण सोसायटी बनानी होगी। इसके माध्यम से वे ग्रुप हाउसिंग के लिए जमीन लेकर खुद भी आवास बना सकेंगे अथवा हाउसिंग बोर्ड या अन्य स्थानीय निकायों से भी मकान बनवा सकेंगे। स्थानीय निकाय समस्त विकास कार्य कराने के बाद कर्मचारियों की सोसायटी को भूमि आवंटित कर सकेंगे।


कैबिनेट की इस बैठक में प्रदेश की बालिका नीति और युवा नीति को भी मंजूरी दी गई।


कर्मचारी एक बार ही फ्लैट्स आवंटन कराने के लिए पात्र होंगे। आवंटित फ्लैट्स को 10 साल तक बेचा नहीं जा सकेगा। उसके पास 1 लाख आबादी वाले शहर में 150 वर्गगज से अधिक का भूखंड अथवा मकान नहीं होना चाहिए। नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल ने बताया कि आवास नीति के तहत आर्थिक दृष्टि से कमजोर आय वर्ग और अल्प आय वर्ग को आवास आवंटन में भूमि की आरक्षित दर पर 20 और 10 प्रतिशत की रियायत दी जाएगी। सोसायटीज के तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को फ्लैट्स आवंटन में प्राथमिकता रहेगी।


यह खास प्रावधान

कर्मचारियों को राजस्थान सोसायटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत सोसायटी का पंजीयन कराना होगा।
ग्रुप हाउसिंग के लिए आवेदन ग्रुप हाउस बिल्डिंग सोसायटी से लिए जाएंगे।
भूमि का कब्जा 25 प्रतिशत राशि जमा कराने पर सोसायटी को दिया जाएगा।
साथ ही ग्रुप हाउस निर्माण की स्वीकृति भी जारी की जाएगी। बाकी 75 प्रतिशत राशि 2 साल के अंदर 4 समान किस्तों में बिना ब्याज के जमा कराई जा सकेगी। इसके बाद 12 प्रतिशत ब्याज देय होगा।
राजस्थान आवासन मंडल के माध्यम से फ्लैट्स अथवा ग्रुप हाउस आवंटित किए जाएंगे। कर्मचारी समूह खुद निर्माण करना चाहें तो उन्हें खाली भूखंड का आवंटन किया जा सकेगा।
ग्रुप हाउसिंग के लिए परियोजना की 10 प्रतिशत राशि पंजीकरण पर देय होगी। बाकी 90 प्रतिशत राशि 7 किस्तों में 19 माह की अवधि में जमा कराई जा सकेगी।
मकान निर्माण के लिए कर्मचारियों को बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थाओं से कुल लागत का 70 प्रतिशत तक ऋण दिलवाया जा सकेगा।

इन छूटों के कारण सस्ते मिलेंगे मकान

कर्मचारियों की सहकारी समिति अगर स्थानीय निकाय के माध्यम से ग्रुप हाउस का निर्माण कराती है तो उसे प्रशासनिक शुल्क 10 प्रतिशत, एडिशनल सीईआर 8 प्रतिशत और प्रोजेक्ट की अवधि में निर्माण लागत पर ब्याज नहीं लिया जाएगा। अल्प आय वर्ग को खुले क्षेत्र की पार्किंग राशि से भी छूट दी जाएगी। इससे 30 प्रतिशत तक कम राशि पर मकान मिल सकेंगे।

युवा नीति पर मुहर

राज्य मंत्रिमंडल ने प्रदेश की नई युवा नीति पर भी मुहर लगा दी। इसमें सभी विभागों से कहा गया है कि वे सामाजिक क्षेत्र में युवा विकास कार्यक्रमों के लिए बजट आवंटन की व्यवस्था करेंगे। इसके लिए राज्य युवा विकास निधि की स्थापना भी की जाएगी। इस नीति की 5 साल बाद समीक्षा की जाएगी।
बालिका नीति भी मंजूर : बालिका नीति को भी मंजूरी मिल गई है। इसका उद्देश्य बालिकाओं को गरिमामय जीवन व्यतीत करने के लिए भेदभाव रहित सकारात्मक वातावरण उपलब्ध कराना है।
घटते लिंगानुपात को ठीक करने के साथ ही बालिकाओं और महिलाओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है।

साल 2012 में दिल्ली-एनसीआर की प्रॉपर्टी का लेख-जोखासोहना रोड पर कॉमर्शियल स्पेस की मांग बढीदिल्ली के साकेत में ऑफिस स्पे...
25/12/2012

साल 2012 में दिल्ली-एनसीआर की प्रॉपर्टी का लेख-जोखा
सोहना रोड पर कॉमर्शियल स्पेस की मांग बढी
दिल्ली के साकेत में ऑफिस स्पेस की मांग में आया उछाल
ग्रेटर नोएडा के कॉमर्शियल रियल एस्टेट में नहीं दिखी निवेशकों की दिलचस्पी
नोएडा एक्सटेंशन और नोएडा एक्सप्रेस वे में निवेशकों ने काफी दिलचस्पी दिखाई
नोएडा एक्सटेंशन के किफायती दामों की वजह से निवेशकों ने यहां प्रॉपर्टी की खरीदारी में दिलचस्पी दिखाई

रेजीडेंशियल प्रॉपर्टी मार्केट में फरीदाबाद का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा। नहरपार का इलाका अपने पिछले रिकॉर्ड को पूरा नहीं कर पाया और साल 2012 के दौरान इसकी कीमतों में मामूली इजाफा हुआ

साल 2012 की बात करें तो गुडग़ांव की सोहना रोड पर किफायती ऑफिस स्पेस होने की वजह से इसकी खपत में काफी इजाफा हुआ है। गुडग़ांव में ऐसे कई विकल्प मौजूद हैं जो काफी महंगे थे और इनका किराया प्रति वर्गफुट 70 रुपये था। इसके मुकाबले सोहना में काफी अच्छी ऑफिस प्रॉपर्टी 30 से 40 रुपये प्रति वर्ग फुट पर उपलब्ध है। किफायती दामों और रेडी टू मूव रेजीडेंशियल विकल्पों के चलते यह इलाका पसंदीदा बिजनेस डेस्टिनेशन के तौर पर उभरा।

कॉमर्शियल स्पेस-डीएलएफ साइबर सिटी
डीएलएफ साइबर सिटी ने एनसीआर बेल्ट में पसंदीदा कारोबारी ठिकाने के तौर पर अपनी साख बनाए रखी। इस इलाके की खास बात है कि यहां कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां मौजूद हैं। साथ ही यहां काफी सुविधाएं भी हैं तो ऐसे में ऑफिस प्रॉपर्टी के लिए यह लोकेशन उपयुक्त है। हालांकि डीएलएफ साइबर सिटी में ढांचागत सुविधाओं को सुधारने की काफी संभावनाएं मौजूद है। जहां तक दिल्ली की बात है तो निश्चित तौर पर लीज पर ऑफिस स्पेस देने के मामले में साकेत सबसे आगे रहा है। इस इलाके में भी ऑफिस रियल एस्टेट की सप्लाई और खपत में काफी इजाफा हुआ है। साकेत को कुछ चीजों से काफी फायदा मिला।
* यह दिल्ली का सबसे हैपेनिंग ठिकाना माना जाता है
* दिल्ली के अन्य इलाकों से और गुडग़ांव,नोएडा से इसकी कनेक्टिविटी काफी अच्छी है
* यहां काफी अच्छी प्रॉपर्टी की सप्लाई मौजूद है

बुरे प्रदर्शन वाले इलाके
ऑफिस स्पेस की खपत के मामले में कुछ इलाकों का प्रदर्शन साल 2012 के दौरान काफी बुरा रहा है
एनएच-8 (गुडग़ांव राजीव चौक के बाद)
इस इलाके में ऑफिस स्पेस की सप्लाई और दामों में कोई दिक्कत नहीं थी। यहां खपत न होने की प्रमुख वजह रही कनेक्टिविटी। साथ ही घटिया रोड, ट्रैफिक जाम और पानी के जमाव ने स्थिति को बदतर बना दिया।

गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन
इस इलाके में सप्लाई काफी सीमित है। यहां खपत कम होने की प्रमुख वजह रही रेडी टू मूव रेजीडेंशियल विकल्पों की कमी रही। साल 2012 के दौरान इस इलाके के ज्यादातर रेजीडेंशियल प्रोजेक्ट निर्माणाधीन रहे। ऐसे में कॉरपोरेट ने यहां ऑफिस स्पेस खरीदने में दिलचस्पी नहीं दिखाई ।

ग्रेटर नोएडा और सेक्टर-62
साल 2012 के दौरान ऑफिस स्पेस की खपत की बात करें तो नोएडा काफी पीछे रहा। कारण यह है कि नोएडा के अन्य इलाकों में किफायती दामों में रेंटल प्रॉपर्टी के विकल्प मौजूद हैं। ग्रेटर नोएडा के मौजूदा कॉमर्शियल प्रॉपर्टी वाले इलाकों का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा है, जिसका प्रमुख कारण है कि नोएडा एक्सप्रेस वे में अच्छी क्वालिटी की ऑफिस प्रॉपर्टी की सप्लाई है।

साल 2012 के दौरान दिल्ली एनसीआर की रीटेल रियल एस्टेट की सप्लाई प्रभावित रही। साथ ही जो सप्लाई मौजूद है उसकी क्वालिटी अच्छी नहीं है। दिल्ली एनसीआर में जो भी मॉल मौजूद हैं, आधे दशक पुराने हैं। इसके बावजूद कुछ प्रीमियम मॉल का प्रदर्शन साल 2011 की तुलना में काफी अच्छा रहा है।

रेजीडेंशियल रियल एस्टेट का प्रदर्शन
साल 2012 के दौरान रेजीडेंशियल रियल एस्टेट सेक्टर का प्रदर्शन संतोषजनक रहा है। हालांकि गुडग़ांव के हर इलाके का प्रदर्शन ऐसा नहीं रहा है। कुछ प्रोजेक्ट में बिक्री कम होने की वजह इनवेंट्री काफी ज्यादा हो गई। गोल्फ कोर्स रोड, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड की तुलना में दाम कम होने की वजह से सोहना रोड की प्रॉपर्टी के दामों में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई। गुडग़ांव के इन इलाकों में प्रदर्शन अच्छा इसलिए रहा क्योंकि एनएच 8 और एमजी रोड के जरिए दिल्ली से इनकी कनेक्टिविटी काफी अच्छी है। यहां से नई दिल्ली के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंचना आसान है।

इसके अलावा 2012 के दौरान दिल्ली एनसीआर में द्वारका एक्सप्रेस वे का प्रदर्शन जबरदस्त रहा। अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से इसकी कनेक्टिविटी और प्रस्तावित डिप्लोमेटिक एनक्लेव, ढांचागत सुविधाएं और पश्चिमी दिल्ली और गुडग़ांव से अच्छी कनेक्टिविटी के चलते यह इलाका काफी रफ्तार से विकसित हो रहा है। इस इलाके में निवेशकों की बढ़ रही दिलचस्पी के चलते यहां रियल एस्टेट प्रॉपर्टी की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है। मौजूदा साल की शुरुआत में यहां प्रॉपर्टी की कीमतें 4,000 रुपये प्रति वर्ग फुट थी हालांकि साल के अंत तक इसकी कीमतें 7,000 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गई।

सोहना रोड
गोल्फ कोर्स रोड और गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड से ज्यादा किफायती होने की वजह से सोहना की प्रॉपर्टी दामों में संतोषजनक इजाफा दर्ज किया गया। इसका एक कारण यह भी था कि यहां रेडी टू मूव यूनिट की सप्लाई अच्छी रही। ऐसे में यह इलाका निवेशकों को काफी पसंद आया। सोहना रोड के प्रोजेक्ट में 1,500 से 2,000 रुपये प्रति वर्ग फुट का इजाफा दर्ज किया गया। फिलहाल इसके दाम बढ़कर 8,000 से 9500 रुपये प्रति वर्ग फुट पर पहुंच गए हैं।

साल 2012 के दौरान रेजीडेंशियल रियल एस्टेट के मामले में नोएडा का प्रदर्शन भी काफी अच्छा रहा है। खासतौर पर नोएडा एक्सटेंशन और नोएडा एक्सप्रेस वे में निवेशकों ने काफी दिलचस्पी दिखाई। नोएडा एक्सटेंशन के किफायती दामों की वजह से निवेशकों ने यहां प्रॉपर्टी की खरीदारी में दिलचस्पी दिखाई। इस इलाके के कुछ प्रोजेक्ट के दामों में 25 फीसदी से ज्यादा इजाफा हुआ।

इसके अलावा नोएडा एक्सप्रेस वे कॉमर्शियल हब के तौर पर निवेशकों को लुभाता रहा । प्रमुख वजह है कि यह इलाका गुडग़ांव और दिल्ली से ज्यादा किफायती है। कुल मिलाकर साल 2012 के दौरान नोएडा के रेजीडेंशियल रियल एस्टेट मार्केट में 20 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया।

हालांकि इस अवधि में दिल्ली के प्रॉपर्टी मार्केट में ज्यादा इजाफा दर्ज नहीं किया गया। आसमान छूती कीमतें और सीमित सप्लाई इसकी प्रमुख वजह रही। प्रॉपर्टी के दामों के खास चमक नहीं देखी गई। जहां तक कीमतों की बात है तो दक्षिणी दिल्ली की रियल एस्टेट प्रॉपर्टी के दामों में खास इजाफा नहीं हुआ, इसके उलट दामों में मामूली गिरावट ही दर्ज की गई।

दिल्ली एनसीआर के रेजीडेंशियल प्रॉपर्टी मार्केट में फरीदाबाद का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा। नहरपार का इलाका अपने पिछले रिकॉर्ड को पूरा नहीं कर पाया और साल 2012 के दौरान इसकी कीमतों में मामूली इजाफा हुआ। मौजूदा साल फरीदाबाद के प्रॉपर्टी बाजार में औसतन 10 फीसदी का इजाफा दर्ज किया गया।

चालू वित्त वर्ष 19 फीसदी तक बढ़ेगा हाउसिंग फाइनेंस मार्केटप्रॉपर्टी की ऊंची कीमतों से आ रही है दिक्कतइसके बावजूद होगा 17...
16/12/2012

चालू वित्त वर्ष 19 फीसदी तक बढ़ेगा हाउसिंग फाइनेंस मार्केट



प्रॉपर्टी की ऊंची कीमतों से आ रही है दिक्कत
इसके बावजूद होगा 17 से 19 फीसदी का इजाफा
ब्याज दरों को घटाने में नहीं है फायदा
पुन: पूंजीकरण पर देना चाहिए जोर

रेटिंग एजेंसी इकरा ने कहा है कि प्रॉपर्टी की ऊंची कीमतों के बावजूद मौजूदा वित्त वर्ष घरेलू फाइनेंस मार्केट में 17 से 19 फीसदी का इजाफा होगा। यह बात एजेंसी की एक रिपोर्ट में कही गई है।

इकरा ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि प्रॉपर्टी की ऊंची कीमतों के चलते प्रॉपर्टी की खरीद फरोख्त में काफी दिक्कत आ रही है। बावजूद इसके बैंकों द्वारा दी जा रही होम लोन की आवश्यक योजनाओं के चलते और होम लोन की दरों में नर्मी लाने से बाजार में इजाफा देखा जाएगा।

इकरा के आकलन के मुताबिक पिछले वित्त वर्ष हाउसिंग क्रेडिट आउटस्टैंडिंग करीब 6,26,100 करोड़ रुपये रहा। हालांकि मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में इसमें करीब 10 फीसदी का इजाफा हुआ है। गौरतलब है कि पिछले वित्त वर्ष होम फाइनेंस की श्रेणी में करीब 17 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

एजेंसी के मुताबिक ज्यादा प्रतिस्पर्धा वाली श्रेणियों में डेवलपर्स को कम आय, उच्च मुद्रास्फीति और ऊंची ब्याज दरों के चलते काफी परेशानी आ रही है। जहां तक ब्याज दरों में कटौती की बात है तो इस संबंध में इकरा ने बताया कि इस तरह का कदम हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों के लिए फायदेमंद नहीं रहेगा क्योंकि उनके द्वारा दिए जा रहे कर्ज का प्रमुख हिस्सा फ्लोटिंग रेट पर आधारित है।

इकरा का अंदाजा है कि अगले पांच साल तक के लिए होम लोन कंपनियों के खातों में सालाना 25 फीसदी का इजाफा दर्ज किया जाएगा। साथ ही एजेंसी ने पुन:पूंजीकरण पर जोर दिया क्योंकि इन कंपनियों को अपनी कोर कैपिटल बचाने के लिए 44,000 करोड़ रुपये के कर्ज की जरूरत पड़ेगी।

इसमें से 27,000 करोड़ रुपये आंतरिक स्रोत से जुटाए जा सकते हैं बाकी के फंड का इंतजाम बाहरी स्रोत से करना होगा। जहां तक एसेट क्वालिटी की बात है तो फिलहाल इन होम फाइनेंस कंपनियों का ग्रॉस एनपीए 0.77 फीसदी है जो सरकारी बैंक की तुलना में बेहतर है।

12/12/2012
12/12/2012

ट्रेफिक हवलदार - लायसेंस बताओ!
चालक - नहीं है साब!
ट्रेफिक हवलदार - क्या तुमने ड्रायविंग लायसेंस बनवाया है?
चालक - नहीं।
ट्रेफिक हवलदार - क्यों?
चालक - मैं बनवाने गया था, पर वो पहचान पत्र माँगते हैं। वो मेरे पास नही है।
ट्रेफिक हवलदार - तो तुममतदाता पहचान पत्र बनवा लो।
चालक - मै वहाँ गया था साब! वो राशनकार्ड माँगते है। वो मेरे पास नहीं है।
ट्रेफिक हवलदार - तो पहले राशन कार्ड बनवा लो।
चालक - मैं म्युनिसिपल भी गया था साब! वो पासबुक माँगते हैं।
ट्रेफिक हवलदार - तो मेरे बाप बैंक खाता खुलवा ले।
चालक - मैं बैंक गया था साब! बैंकवाले ड्रायविंग लायसेंस माँगते हैं।

अब नहीं दी जाएगी अपार्टमेंट कॉमर्शियल एक्टिविटी को अनुमति:-जयपुर.राजस्थान अपार्टमेंट ओनरशिप बिल 2012 पर सवाल उठने के बाद...
01/12/2012

अब नहीं दी जाएगी अपार्टमेंट कॉमर्शियल एक्टिविटी को अनुमति:-
जयपुर.राजस्थान अपार्टमेंट ओनरशिप बिल 2012 पर सवाल उठने के बाद राज्य शहरी आयोग ने शुक्रवार को बिल का दूसरा ड्राफ्ट तैयार किया। जेडीए के सीटीपी ऑफिस में हुई बैठक में बिल्डर्स, प्रमोटर्स, विधि से जुड़े विशेषज्ञों व अधिकारियों ने भाग लिया।

इसमें तय हुआ कि अब अपार्टमेंट में कॉमर्शियल एक्टिविटी की अनुमति नहीं दी जाएगी। अपार्टमेंट केवल रेजीडेंशियल ही रहेंगे। इसके अलावा दो दर्जन से ज्यादा सुझावों पर अमल करते हुए आयोग अधिकारियों ने बिल का सैकंड ड्राफ्ट तैयार किया। अब और सुझाव मांगे गए हैं। उसके बाद अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।

शहरी आयोग के अध्यक्ष के के भटनागर की अध्यक्षता में हुई बैठक में बिल्डर्स और प्रमोटर्स की जिम्मेदारी तय की गई। कई लोगों ने सुझाव दिया कि एग्रीमेंट टू सेल पजेशन से पहले नहीं होना चाहिए। एग्रीमेंट टू सेल तब हो जब बिल्डर पजेशन दे दे। अभी एग्रीमेंट करके बिल्डर किश्तें शुरू कर देता है, लेकिन सालों तक पजेशन नहीं देता। इसके अलावा यह सुझाव आया कि अपार्टमेंट की कुल लागत की एक फीसदी राशि बैंक में जमा कराई जानी चाहिए।

यदि अपार्टमेंट बनने के एक साल में कोई टूट-फूट हो तो उस राशि से ठीक करवाया जा सके। फ्लैट का मालिकाना हक ट्रांसफर करने को लेकर कई सुझाव आए। जेडीए की विधि शाखा के अधिकारियों वीनू निहलानी और अन्य ने सुझाव दिया कि बिल्डर्स सुपर बिल्ट अप एरिया मिलाकर कीमत लेते हैं। यह नहीं होना चाहिए। कारपेट एरिया में सुपर बिल्ड अप एरिया का अमाउंट पूरे की बजाय एक चौथाई वसूलने का अधिकार ही बिल्डर को मिलना चाहिए।

बिल्डरों ने सुझाव दिया कि अपार्टमेंट के लिए सोसायटी बने। उसके सभी सदस्यों की जिम्मेदारी तय हो कि वे अंत तक अपार्टमेंट की मेंटीनेंस देखेंगे। एक-दो साल में रखरखाव छोड़ने पर दंड का प्रावधान हो। बड़े प्रोजेक्ट में कुछ लोगों द्वारा स्पेशल फैसिलिटी चाहने पर उसका चार्ज सभी से नहीं वसूला जाए। वह केवल जो लोग स्पेशल फेसिलिटी चाहते हैं, उनसे ही लेने का प्रावधान हो। सभी के लिए आवश्यक सुविधाओं की ही लागत सभी से ली जानी चाहिए।

कुछ लोगों ने प्रोजेक्ट में फैसिलिटी एरिया अनिवार्य रूप से विकसित करने का प्रावधान जोड़ने का सुझाव दिया। आयोग अध्यक्ष के के भटनागर ने कहा कि भास्कर द्वारा उठाए इस मुद्दे पर शुक्रवार की बैठक में काफी जाग्रति दिखी। भास्कर में उठाये मुद्दे लोगों ने भी उठाये और अपने सुझावों को नए ड्राफ्ट में जोड़ने पर जोर दिया। भटनागर ने कहा कि भास्कर की ओर से दिए गए सुझावों को भी ड्राफ्ट में शामिल कर नया अंतिम ड्राफ्ट तैयार किया जाएगा।

चाहिए INCOME TAX से जुड़ी सलाह तो डायल कीजिए यह नंबर!सीकर.आयकर से जुड़ी सलाह के लिए अब आपको सिर्फ एक कॉल करना होगा। विशेष...
01/12/2012

चाहिए INCOME TAX से जुड़ी सलाह तो डायल कीजिए यह नंबर!

सीकर.आयकर से जुड़ी सलाह के लिए अब आपको सिर्फ एक कॉल करना होगा। विशेषज्ञों का एक पूरा पैनल आपकी हर समस्याओं पर राय देने के लिए तैयार किया गया है। कॉल सेंटर में आयकर से जुड़े जटिल प्रश्नों के समाधान के लिए विभाग ने चार्टर्ड एकाउंटेंट व आयकर के जानकारों का पैनल बनाया है। अगर कॉलेज सेंटर में बैठे व्यक्ति के पास जवाब नहीं है तो वह इस पैनल के पास लाइन ट्रांसफर कर देगा।

आयकरदाता टोल फ्री नंबर 1800 10 23738 पर फोन कर आयकर से जुड़ी समस्या का हल निकाल सकते हैं। आयकर विभाग की ओर से इस तरह का प्रयोग पहली बार किया गया है।

विभाग ने आयकर दाताओं की राहत के लिए 7500 टैक्स प्रिपेयर्स की नियुक्ति कर रहा है। इन लोगों को तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। फिलहाल आयकर दाताओं के सामने परेशानी यह है कि आयकर से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए उन्हें सीए या अन्य जानकार की मदद लेनी पड़ती है। आयकर विभाग की ओर से इस तरह का कॉल सेंटर पहली बार बनाया गया है।

HAPPY DIWALI..........FRIENDS....
12/11/2012

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