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02/08/2026

मझवार आरक्षण जारी करो

02/08/2026

निषाद पैदाइशी बहादुर होते हैं 💪

15/07/2026
सरला निषाद पुत्री मुन्ना लाल निषाद निवासी फिरोजाबाद को sub inspector up police 🚨 बनने पर हार्दिक शुभकामनाएं।।।।।।।
15/07/2026

सरला निषाद पुत्री मुन्ना लाल निषाद निवासी फिरोजाबाद को sub inspector up police 🚨 बनने पर हार्दिक शुभकामनाएं।।।।।।।

लिस्ट में नाम है, हाथ में सर्टिफिकेट नहीं - ये कैसा हक है?पहले बिहार में दिला के दिखाओ, फिर UP में ज्ञान बांटना!जय निषाद...
10/07/2026

लिस्ट में नाम है, हाथ में सर्टिफिकेट नहीं - ये कैसा हक है?
पहले बिहार में दिला के दिखाओ, फिर UP में ज्ञान बांटना!

जय निषादराज!

भाइयों, संविधान में लिखा है - हमारा हक मझवार (53) और तुरैहा (66) के नाम से SC लिस्ट में है। पर जमीन पर क्या है? लिस्ट में नाम है, हाथ में सर्टिफिकेट नहीं। यही सबसे बड़ा धोखा है।

और इस धोखे के खिलाफ लड़ाई आज अगर कोई मजबूती से लड़ रहा है, तो सिर्फ निषाद पार्टी लड़ रही है। डॉ. संजय निषाद जी ने दिल्ली में 70 साल से बंद फाइल खुलवाई, RGI से रिपोर्ट निकलवाई, लड़ाई गृह मंत्रालय तक पहुंचा दी।

और जो लोग आज UP में आकर ज्ञान बांट रहे हैं, उनसे समाज का सीधा सवाल है -

"भाई, तुम बिहार के समाज को आरक्षण कब दिलाओगे? पहले बिहार के निषाद को SC का सर्टिफिकेट दिलवा के दिखाओ, तभी UP में आकर दिलाने का दावा करना।"

तुम तो डिप्टी सीएम की कुर्सी के लालच में 4 से 0 हो गए। अपना घर नहीं बचा पाए, समाज को बेच दिया, और अब UP में आकर हमें सिखा रहे हो?

और तुम दावा करते हो कि हम संजय निषाद से भी पुराने नेता हैं, हमने संजय निषाद का सहयोग किया है?

तो सुनो, अगर तुम संजय निषाद से पुराने नेता हो और सहयोगी रहे हो, तो बताओ -

डॉ. संजय निषाद जी ने तो समाज की फाइल को सड़क से संसद तक, लखनऊ से दिल्ली के गृह मंत्रालय तक पहुंचा दिया। तुमने आज तक बिहार में हक की लड़ाई कहां लड़ी? बताओ किस कोर्ट में गए? किस कचहरी में लड़े? तुम्हारे पास कौन सी फाइल है, कौन सा कागज है जो तुमने समाज को दिया है?

सच तो ये है कि तुम्हारे पास दिखाने को कुछ नहीं है, सिवाय समाज को धोखा देने के। और आज उसी लूटे हुए चंदे के चंद टुकड़ों में बिककर समाज को गुमराह कर रहे हो।

समाज अब तुम्हारी चाल समझ चुका है - तुम समाज के नाम पर आरक्षण विरोधी ताकतों से मिलकर जुटाए हुए, लूटे हुए पैसों से ही समाज को आपस में बांट रहे हो। चंद टुकड़ों का लालच देकर, हमारे ही भाइयों को हमारे खिलाफ खड़ा करके समाज को गुमराह कर रहे हो।

याद रखो, दुनिया में किसी भी समाज को बिना एकजुट हुए हिस्सा नहीं मिला। बिना एकता के कोई सरकार आरक्षण नहीं देती।
याद रखो -
मझवार-तुरैहा का सर्टिफिकेट मिलेगा, तभी असली आजादी मिलेगी।
नौकरी में हिस्सा मिलेगा, तभी गरीबी मिटेगी।

इसलिए भाइयों, बिकना बंद करो, लड़ना बंद करो।
बंटोगे तो लुटोगे, एक होगे तो हक पाओगे!

एक झंडे के नीचे आओ। निषाद पार्टी ने तुम्हें गर्व दिया है - 'जय निषादराज' का नारा दिया, श्रृंगवेरपुर की पहचान दी। अब वही पार्टी तुम्हारे बच्चों के हक के लिए दिल्ली से लड़ रही है।

पार्टी मजबूत होगी तो सर्टिफिकेट मिलेगा, सर्टिफिकेट मिलेगा तभी राज मिलेगा।

जय निषाद राज!
जय महर्षि कश्यप!
जय मिहिर भोज!
जय संविधान!

#पुराने_नेता_हो_तो_फाइल_दिखाओ #पहले_बिहार_में_दिलाओ #कोर्ट_कचहरी_कहां_लड़े #चंदे_के_पैसे_से_मत_बांटो #निषाद_पार्टी_ही_विकल्

जिस समाज का राजा होता है वह समाज ताजा होता है। जिसका दल उसका बल है, उसकी समस्याओं का हल है।साथियों,राजा बदल जाते हैं, झं...
06/07/2026

जिस समाज का राजा होता है वह समाज ताजा होता है। जिसका दल उसका बल है, उसकी समस्याओं का हल है।
साथियों,
राजा बदल जाते हैं, झंडे फट जाते हैं... पर विचार वाली किताबें 500 साल तक कौम जिंदा रखती हैं। और जब किताब जिंदा हो, तो झंडा कभी झुकता नहीं।

ये लाइन सिर्फ शब्द नहीं है भाइयों, हमारे पूरे इतिहास का निचोड़ है। दुनिया का नियम यही रहा है — तलवार से राज्य बनते हैं, पर राष्ट्र किताब और झंडे से बनता है। झंडा शरीर है जो दिखता है, किताब आत्मा है जो जिंदा रखती है। अशोक के स्तंभ गिर गए, पर उसकी धम्म-लिपि की सोच आज भी बौद्ध देशों को जोड़ती है। अकबर का सुनहरा आलम म्यूजियम में चला गया, क्योंकि दीन-ए-इलाही की किताब बंद हो गई। शिवाजी का भगवा इसलिए 350 साल से लहरा रहा है क्योंकि उसके पीछे समर्थ गुरु रामदास की ‘दासबोध’ का विचार जिंदा है। अंग्रेजों की यूनियन जैक उतर गई, पर श्यामलाल गुप्त ‘पार्षद’ की कलम से निकला ‘विजयी विश्व तिरंगा प्यारा’ आज भी करोड़ों की जुबान पर है। पार्षद जी 6 साल जेल में रहे, पर उनकी लिखी किताब-गीत ने एक पूरी पीढ़ी को आजादी का मकसद दे दिया।

अब आओ अपने घर की बात करें। ये किताब देखो — *“निषाद वंश : परिचय, विचारधारा, उद्देश्य”*। इसके कवर पर वो तस्वीर है जो 5000 साल का जवाब है : भगवान श्रीराम और निषादराज गले मिल रहे हैं। ये फोटो सबूत है कि हम दीन-हीन नहीं थे। जब राम को अयोध्या ने छोड़ दिया, तो गंगा किनारे खड़े निषादराज ने सीने से लगाया। नाव हमारी थी, पतवार हमारी थी, हिम्मत हमारी थी। हमने एहसान नहीं लिया, एहसान किया था। फिर भी सदियों से हमें पढ़ाया गया कि तुम्हारा कोई इतिहास नहीं। क्यों? क्योंकि जिस कौम की किताब छीन ली जाए, उसकी जमीन छिन जाती है। हमें जातियों में बाँटा गया — निषाद, केवट, मल्लाह, बिन्द, कश्यप, धीवर, मांझी, गंगापुत्र... ताकि हम खुद को छोटा समझें। ये किताब इसी बँटवारे को तोड़ती है। पहला पन्ना खोलते ही चिल्लाकर कहती है — “हम सब एक वंश हैं”। बिखरे तो लुटे, जुड़े तो राज किए।

ये किताब तीन काम करती है। पहला, परिचय देती है — बताती है कि रामायण के पहले पन्ने से लेकर आज तक हम थे। दूसरा, विचारधारा देती है — स्वाभिमान की। कि हम राम के बराबरी के दोस्त थे, नौकर नहीं। तीसरा, उद्देश्य देती है — शिक्षा, संगठन, संघर्ष। पर सबसे बड़ी बात ये है कि ये किताब हमें ‘याद’ दिलाती है। क्योंकि भूलना हार है। मुगलों ने कहा तुम मछुआरे हो, अंग्रेजों ने कहा तुम क्रिमिनल ट्राइब हो, आजादी के बाद कहा तुम सिर्फ वोट बैंक हो। और हम मानते गए... क्योंकि अपनी किताब नहीं थी।

अब किताब हाथ में है। इस किताब को पढ़ोगे तो गुस्सा नहीं, जागरण आएगा। गुस्सा 2 दिन का होता है, जागरण 200 साल का। जब हर निषाद युवा ये जान जाएगा कि उसके पुरखों ने मर्यादा पुरुषोत्तम की मदद की थी, तो वो किसी अफसर, किसी नेता के सामने सिर नहीं झुकाएगा। वो पूछेगा — “हमारा हक कहाँ है?” और हक माँगने से नहीं, लड़ने से मिलता है। पर लड़ाई से पहले विचार साफ होना चाहिए। वो विचार इस किताब में है।

इसलिए भाइयों, इस फोटो को दीवार पर टाँगो। राम और निषादराज का गले लगना हमारी असली पहचान है। इस किताब को हथियार बनाओ। 4 लोग बैठकर पढ़ो। मल्लाह खुद को छोटा न समझे, कश्यप खुद को अलग न समझे। पुरखे नाव चलाते थे, अब हमें कलम चलानी है। IAS बनो, वकील बनो, मास्टर बनो। पर याद रखना — राजा बदल जाते हैं, झंडे फट जाते हैं... पर जिस दिन इस किताब को हर निषाद घर में जगह मिल गई, उस दिन निषाद समाज का झंडा कभी नहीं झुकेगा।

उठो, जागो, पढ़ो। अब राज तिलक का समय है। किताब जिंदा है, तो कौम जिंदा है।

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जय निषाद राज!




कमेंट करो : “जय निषादराज” — दुनिया को बता दो कि हम जाग गए हैं।

2015 में गोरखपुर की धरती से निषाद आरक्षण के मुद्दे पर उठी आवाज़ ने समाज में एक नई उम्मीद जगाई थी। उस समय दिए गए आश्वासनो...
30/06/2026

2015 में गोरखपुर की धरती से निषाद आरक्षण के मुद्दे पर उठी आवाज़ ने समाज में एक नई उम्मीद जगाई थी। उस समय दिए गए आश्वासनों के बाद आज 2026 में भी निषाद समाज अपने अधिकार और आरक्षण के विषय पर ठोस निर्णय की प्रतीक्षा कर रहा है।

निषाद समाज ने लोकतांत्रिक यात्रा में निषाद पार्टी और डॉ. संजय कुमार निषाद जी के नेतृत्व में अपनी आवाज़ को मजबूती दी। मझवार 53, तुरैहा 66 समेत अपने सभी संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए समाज निषाद पार्टी के बैनर तले एकत्रित है, और एकत्रित रहेगा। समाज ने विश्वास के साथ अपना समर्थन दिया और उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक आपको सरकार और सत्ता में पहुंचाया।

आज निषाद समाज अपना हक पहचानता है, सही निर्णय लेने की क्षमता रखता है, और डॉ. संजय कुमार निषाद जी के नेतृत्व में मजबूत, निर्णायक, बुद्धिमान और जागरूक है। सही समय आने पर यदि वादा खिलाफी होती है, तो समाज अपना फैसला खुद करने के लिए तैयार है।

आज आवश्यकता है कि निषाद आरक्षण के विषय पर स्पष्ट नीति, गंभीर संवाद और ठोस पहल हो, जिससे समाज के बीच विश्वास और मजबूत हो सके। निषाद समाज अपने हक, सम्मान और भविष्य के लिए लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज़ उठाता रहेगा।

हक़ मांगा था, वादा याद है

जय निषाद राज।

30/05/2026

जय निषाद राज

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