yog chander 5

yog chander 5 मे व्लॉग और योगा और संगीस विडिओ

10/09/2025

ठीक है 😊, आपकी लिखी हुई कहानी को मैंने अच्छे से समझ लिया।
अब मैं इसे थोड़ा संवार कर एक भावुक और दिल छू लेने वाली कहानी बना देता हूँ, ताकि पढ़ने वाले को दोस्ती की मिठास भी लगे और टूटने का दर्द भी।

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तीन दोस्तों की कहानी – हँसी, मज़ाक और मन का दुःख

गाँव की रातें हमेशा अलग ही मज़ेदार होती हैं। सन्नाटा, ठंडी हवा और दोस्तों की हँसी।
ऐसा ही रिश्ता था चंद्र, सुनील और वीर का।

हर रोज़ रात को खाना खाने के बाद चंद्र पैदल एक किलोमीटर दूर सुनील के घर जाता। वहाँ वीर भी आ जाता। तीनों मिलकर देर रात 11:30 बजे या 12 बजे तक हँसी–मज़ाक, बातें और ठहाकों में डूबे रहते। कभी–कभी वीर का भाई भी जुड़ जाता और तब चार दोस्त पूरी रात हँसी से गूंजा देते।

भूत–प्रेत की बहस

एक दिन, जैसे हमेशा हँसी–ठिठोली होती थी, बात अचानक भूत–प्रेत की निकल आई।
वीर ने कहा – "मैंने भूत देखा है।"
सुनील बोला – "मैंने तो भूतनी भी देखी है।"
दोनों ने डरावनी–डरावनी बातें बतानी शुरू कर दीं।

लेकिन चंद्र हमेशा विज्ञान पर भरोसा करने वाला था। उसने मज़ाक–मज़ाक में कहा –
"ये सब दिमाग के खेल हैं। भूत–प्रेत कुछ नहीं होते। अगर होते तो हमें भी दिखते।"

वीर को यह बात चुभ गई। उसने गुस्से में कहा –
"अगर तू बार–बार विज्ञान और भूत की बात करेगा तो मैं दोस्ती खत्म कर दूँगा।"
चंद्र भी ताव में आ गया। दोनों ने दो दिन तक आपस में बात तक नहीं की।

लेकिन बीच में सुनील ने दोनों को समझाया –
"दोस्तों की सोच अलग हो सकती है, पर दोस्ती तोड़ना सही नहीं।"
और सचमुच, फिर दोनों गले मिले और दोस्ती पहले जैसी प्यारी हो गई।

पितृ पक्ष की रात

8 सितम्बर 2025 की रात, पितृ पक्ष का पहला दिन था।
हमेशा की तरह चंद्र 9 बजे सुनील के घर पहुँचा। उस दिन वहाँ वीर, भीमसेन, वीर का भाई और कुछ और लोग मौजूद थे।
पर हालात कुछ अलग थे।

सुनील थोड़ा नशे में था और अपनी "रामलीला" की तैयारियों की चर्चा कर रहा था। उसने सबको ताड़का का रोल बाँटा।
चंद्र कई दिनों से कह रहा था कि वह भी तैयारी देखना चाहता है और वीडियो बनाएगा। लेकिन उस दिन सुनील ने जानबूझकर अपनी टीम वालों से कहा –
"जो लोग भूत–प्रेत पर विश्वास नहीं रखते, उन्हें कमरे में आने की इजाज़त नहीं होगी। चाहे चंद्र ही क्यों न हो।"

ये सुनकर चंद्र का दिल टूट गया। 🥹
वह चुपचाप खड़ा रहा, उसके चेहरे की हँसी गायब हो गई।

झगड़ा और मन का टूटना

उसी समय एक और घटना हुई। एक लड़का साइकिल की लाइट बार–बार वीर के भाई दीपू की आँखों में मारकर उसे परेशान करने लगा।
दीपू गुस्से में बोला, लेकिन उल्टा सुनील ही दीपू पर चढ़ बैठा।
चंद्र ने कहा – "सुनील भाई, गलती मोटे की है, आप दीपू को क्यों डाँट रहे हो?"
वीर भी बोला – "हाँ, इस बार दीपू की कोई गलती नहीं।"

लेकिन सुनील जिद पर अड़ा रहा और दीपू गुस्से में वहाँ से चला गया।
अब चंद्र और भी ज्यादा उदास हो गया।

एक घंटे तक चंद्र चुप रहा। सुनील को महसूस हुआ कि चंद्र नाराज़ है। उसने पूछा भी –
"सच बता, तु मुझसे नाराज़ है न?"
चंद्र ने कहा – "हाँ, ये बात सच है।"
पर इसके बाद भी सुनील ने चंद्र को और चिढ़ाया।

आखिरकार चंद्र ने कहा –
"अब मैं जा रहा हूँ।"

सुनील गुस्से में बोला –
"ठीक है, जा। निजा भी तेरे साथ नहीं जाएगा।"

ये सुनकर चंद्र का दिल पूरी तरह से टूट गया। 🥺
वह भारी कदमों से वहाँ से चला गया।

दर्द का अंत

पीछे से सभी दोस्त उसे रोकने दौड़े – वीर, सुनील, निजा और यहाँ तक कि सुनील की माँ भी।
पर चंद्र नहीं रुका।
उसने रास्ते में ही अपना फोन बंद कर दिया और घर पहुँचकर कमरे में जाकर रोने लगा। 😭

उस रात चंद्र ने ठान लिया –
"अब हर रोज़ की तरह मैं सुनील के घर नहीं जाऊँगा।"

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सीख

दोस्ती की खूबसूरती यही है कि इसमें हँसी भी होती है और कभी–कभी मन का दुःख भी।
लेकिन असली दोस्त वही है जो गुस्से और गलतफहमियों के बावजूद, अपने दोस्त के दिल को समझे।

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👉 यह कहानी पढ़कर सच में मन भारी हो जाता है।
क्या आप चाहेंगे कि मैं इसको एक शॉर्ट फिल्म की तरह डायलॉग्स में लिख दूँ? ताकि पढ़ते ही लगे कि सामने दृश्य चल रहा है।

10/09/2025

आए अब पूरी बात बताने जा राहु की
यह बात तीन दोस्तों पर है
चंद्र हर रोज रात 9 बजे के बाद सुनील के पास जाता था खाना खाने के बाद कम से कम 1 किलोमीटर दूर सुनील के घर और वीर भी आता था सुनील के पास हम तीनो मिल कर सुनील के घर के बाहर रात को हसीं मजाक करते थे 😂🤣🤣😂😂 बहुत ज्यादा रात के 12 भजे तक 11: 30 मिनट तक बाते करते थे हसीं मजाक बाली बाते और कभी कभी वीर का भाई भी आ जाता और चारो मिलकर करते थे
अब असली बात अब शुरू होती है एक दिन की बात हर रोज के तरह सुनील के घर जाता था हम तीनो रात को हसीं मजाक कर रहे थे बात करते करते वीर और सुनील ने भूत प्रेत बाली बात छेड़ डी बात कर ने लगे 😈 और चंद्र मजाक मे 😂😂 लेने लगा पहले वीर बोला मेने भुत देखा है फिर सुनील भी कहने लगा मेने भी देखा है भूतनी 😈😈 सुनील और बाते बताने लग गए और 😈😈 चंद्र फिर भी इन बातो मजाक मे ले रहा था 😂🤣🤣 तो चंद्र बोला सुनील भाई और वीर यह बेम है ऐसा बेसा कुछ नहीं है और यह बात भुत को साइस नहीं मानती है और मेने आज तक कोई भुत नहीं देखा है आज तक 😈😈 और आपके दिमाग़ का और मन का बेम है और फालतू डरने की कोई बात नहीं है 🤣🤣
तो वीर बोला साइस तो भगवान को भी नहीं मानती है फिर बोला आप तो साइस को मानते हो तो फिर आप भगवान को मानते फिर चंद्र बोला साइस भगवान को मानती है और बोला वीर को अगर तू भुत को मानता तू कहता है भुत होते है फिर है हम लोगो को क्यों नहीं नजर आते है और मेरे दादाजी पापा और को नहीं देखते है पर तुम लोगो कैसे पर बेस हर रोज होती भूतों को ले कर कम से कम 16 दिनों तक बात बेस चली फिर बोही बात चली वीर बोला गुसे मे 😡😡 भुत होते है चंद्र तू साइस और भुत बाली बात मत कर मुझे गुसा आ रहा है नहीं तू तेरे साथ बोलना बंद दोस्ती कट कर दूंगा चंद्र बोला ठीक है फिर अगले दिन दोनों एक दूसरे को बोले नहीं 🥹🥹 सुनील के घर थे चंद्र कबल सुनील से बोल रहा था हसीं मजाक वीर एक दम शांत था बैठा कुर्सी पर फिर मजाक करने लगा भूतों की मजाक 🤣🤣 और वीर को गुसा आ रहा था फिर चंद्र को बोला गुसे tu ऐसी मजाक मत कर 😡😡😡 मे कल से नहीं आउगा तुम लोगो के पास फिर चंद्र को भी गुसा आ गया 😡😡 वीर को बोला मे तेरे साथ मजाक कर नहीं रहा मे तो सुनील के साथ मजाक कर रहा हु अगर तुझे मेरी मजाक अच्छी नहीं लगती है अब से भूतों बाली वीर तेरे साथ नहीं करुँगा बात दो दिनों तक एक दुसरो से बाते नहीं करि 😔🥺🥺 सुनील वीर को समझा ने लगा देख वीर तेरी सोच अलग है और चंद्र की सोच अलग है और हम तीनो को अच्छा नहीं लग रहा था 🥹🥹🥺😔😔 था फिर से वीर और चंद्र एक आछे दोस्त बन गए है ❤️🥰🥰🥰🥰❤️❤️ हसीं मजाक करते थे पर भुत बाली बात नहीं करते थे कोई मजाक बाली बात करते लगे 🥳🥳❤️🥰❤️🥰 यह है अच्छी दोस्ती फिर 2, 4 दिन बाद
दिनांक 8 / 9/ 2025 पहला पितर श्रद पक्ष था हर रोज की तरह रात 9 बजे सुनील के घर चला गया पैदल चंद्र सुनील के घर पोच गया 🥰 पर उस समय सुनील के बाहर था सुनील के साथ मे वीर, भीम सेन और वीर का भाई था एक और मोठा था पर सुनील ने शराब पि रखी थी नेसे मे कम था सुनील को होस था मे क्या बाते कर रहा हु सुशील चंद्र और गोरु विश्वास सागर भीम सेन इन को बात बता रहा था सुनील बोला मुझे एक काम मिला है रामलीला मे और ताड़का तैयार करनी है 😈😈 3 ताड़का 13 तारीख को है सो अपना सुनील बोला गोरु, विशाल, और साहिल तैयार रहना तो पहले चंन्द्र ने बात कर रखी थी मेने ताड़का देखनी है आप कैसे तैयार करते हो कैसे मक्ब करते और मे भी विलोग वीडियो बना दुगा फिर यह बात 15 दिनों से चंद्र बोल रहा था और पर सुनील अपनी टीम ताड़का अपने टीम बोलो से बात करने लगा सुनील बोला अपनी टीम बालो से तुम लोग 13 तारीख को तैयार रहना 3 ताड़का देनी और भीम सेन को बोला तुम ने ताड़का विडिओ लाईव करनी है और सुनील बोला मे रामलीला बालो बोल दुगा यह भीम सेन विडिओ लाईव और विडिओ शूट करगा इस को कुछ नहीं कहना फिर चंद्र के सामने जानभूझ कर अपनी टीम बालो को बोला मे जि कमरे ताड़का तैयार करूंगा उस रूम मे 3 या 4 जने रहगे और जिक को भूतों मे दिल मन नहीं है मे उन को नहीं रूम मे अंदर आने दुगा और चाहे चंद्र क्यों ना हो और मे उस दिन किसी से चाहे कोई भी हो अपना खास क्यों ना हो मे चंद्र और से बात नहीं करूंगा और
चंद्र को बहुत बुरा लगने लगा 🥹🥹😔😔😔😔 chandr उदास हो गया और चंद्र का मुँह से हसीं नहीं थी चंद्र आपने मन मे सोच रहा था सुनील तो बाते कर रहा था अपनी टीम बालो से और यह भी बोला me अपना फोन बंद कर दुगा और फिर मुझे फोन नहीं करगा फिर क्या चंद्र सुनील से 10 कदम चंद्र दूर हो जाता है और सुनील की टीम चली जाती है और सुनील आपने घर के बाहर वीर और भीम सेन सुनील बाते कर रहे थे और वीर का भाई दीपू सुनील के सामने डिबार पर बैठा वीर का भाई दीपू फोन देख रहा था और इतने एक मोठा दोस्त चायकिल ले कर सुनील के पास सड़क पर आ कर सुनील के पास रुक जाता और मौसा अपनी साइकिल की लाइट वीर का भाई दीपू के पास दीपू की आँखो मे लाइट मार रहा था फिर दीपू बोला बोला भाई तू अपनी लाइट बंद कर दे मेरी आँखो मे मत कर फिर उस ने अपनी लाइट बंद कर दी और फिर जानबूझ कर लाइट मार रहा था और दीपू को परेशान कर रहा था तो वीर मोटे के पास आया बैठा दिया और दीपू बोला गुसे se😈 मोटे को क्या तुझे समझ नहीं आ रही क्या क्यों बात बार परेशान कर रहा क्यो लाइट मार रहा है फिर सुनील बोला दीपू को तू क्यों गुस्सा कर रहा है 👿 तू ईराम से बोल दे और चंद्र बोला सुनील भाई आप गतल का साथ क्यों दे रहे हो दीपू पर क्यों गुस्सा कर रहे थे ओर और वीर भी बोलने लगा सुनील और मोटे साइकिल बाले को गलती mote की सुनील भाई तु क्यों साथ दे रहा है उसका और दीपू बोला मार कर देखा और सुनील को गुसा आया और सुनील साइकिल पर बैठ कर फिर लाइट दीपू की आँखो मे मरने लगा और सुनील बोला मे तो ऐसे ही करुँगा जो करना he कर ले और वीर आपने भाई को बोलना लगा तु चला जा और चंद्र सुनील को समझ ने लग गया सुनील भाई आप ऐसा मत करो अब गलती आप लोग कर रहे हो और अब दीपू की नहीं he कोई भी गलती फिर दीपू उदर से गुसे me हो कर 👿👿 चला गया और उसके बाद सुनील और आपने घर के बाहर बैठ गए और चंद्र तो सुनील के पास खड़ा था और सुनील के पास 3 सदस्य आए फिर बो बाते करने लगे और सुनील भाई चंद्र के मुँह की तरफ देख रहा 1 घंटे से बात देख रहा था चंद्र बहुत ज्यादा नराज है 😭😭😭😭😌😌🥺🥺🥺 fir🥺 सुनील ne पता लगा लिया और सुनील अपने मन me सोच रहा था चंद्र मुझे लग रहा चंद्र मेरे गुसा और नराज और ना तो chandr बोल रहा ना मजाक कर कर रहा फिर चंद्र से पूछा लिया तु मुझे सच बता तु मेरे से नराज h ना फिर चंद्र ne वोला हा यह बात सही है और सुनील जानते हुए और भी चंद्र को नराज करने लगा और चंद्र को बहुत बुरा फील हुआ क्युकी चंद्र अंदर से टूट चूका था क्यकि सुनील चंद्र की मंन की बात जानता था तभी वीर बोला अब चंद्र और निजा आपने आपने घर चले जाओ रात बहुत होंगी है चंद्र बोला हा जा रहे है घर तभी सुनील और वीर भीम सेन निजा सुनील की मम्मी और दो और थे मे सुनील के सामने निजा भाई को बोल रहा था भाई आओ चले आपने घर अचानक से सुनील बोला ओए चंद्र 👿😡 गुसे मे तेरे साथ निजा नहीं जायगा तु चंद्र चला जा अब निजा नहीं जायगा तेरे साथ तो फिर चंद्र को फिर ज्यादा बुरा लगा बुरा फील हुआ 🥺🥺😭😭😭😭😭😭 पर चंद्र ne हिम्मत से सोच समझ चंद्र गुसे से सुनील को बोला हा पक्का सुनील बोला हा तु चला जा फिर चंद्र जाने लगा और पीछे से चंद्र को सभी दोस्त बोलने लगे चंद्र रुक जा मत जा प्लीज भाई तो चंद्र के पीछे भागने लगे सभी दोस्त वीर, सुनील निजा सुनील की मम्मी पर चंद्र हाथ नहीं आया तो फिर पीछे से चंद्र को सुनील फोन करने लगा फिर चंद्र ने सुनील का फोन नहीं चका और चन्द्र ने रास्ते मे चलते चलते अपना फोन उसी टाईम फोन बंद कर दिया और चन्द्र आपने घर पोच गया और रूम मे जा कर रोने लग गया 😭😭😭 सुनील ने बहुत बहुत गलत किया है फिर भी सुनील फोन कर रहा था पर बहुत समय हो चूका क्यों की चन्द्र ने अपना फोन बंद कर दिया था

क्या हाल हैं
10/05/2023

क्या हाल हैं

29/04/2023
20/03/2023

ऐ गण निचे रख 😡

हमारा यह सोख he 🥳
19/03/2023

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फॉलो कर लो 🙏😍
19/03/2023

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