07/09/2026
विषय: देश में लंबित पड़े मामलों के त्वरित निष्पादन एवं प्रशासनिक सुधारों के संबंध में।
आदरणीय शासन एवं प्रशासनिक महोदय,इस संदेश के माध्यम से मैं देश की न्यायिक और प्रशासनिक व्यवस्था में लंबित पड़े करोड़ों मामलों की ओर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूँ। "न्याय में देरी, न्याय न मिलने के समान है" (Justice delayed is justice denied)। यह केवल एक कहावत नहीं, बल्कि आज के समय में लाखों नागरिकों की पीड़ा बन चुकी है।अदालतों और प्रशासनिक विभागों में सालों-साल खिंचते मुकदमे आम नागरिकों के मानसिक, आर्थिक और सामाजिक जीवन को पंगु बना रहे हैं। इससे न केवल जनता का व्यवस्था पर से विश्वास डगमगाता है, बल्कि देश के विकास की गति भी प्रभावित होती है।शासन-प्रशासन से हमारी विनम्र अपील और अपेक्षाएँ:रिक्त पदों को प्राथमिकता से भरना: देश के विभिन्न न्यायालयों और प्रशासनिक पंचाटों (Tribunals) में खाली पड़े न्यायाधीशों व अधिकारियों के पदों को अविलंब भरा जाए।तकनीक का व्यापक उपयोग: नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (NJDG) और ई-कोर्ट जैसी डिजिटल तकनीकों का दायरा बढ़ाकर जिला और ब्लॉक स्तर तक मामलों की ट्रैकिंग व ऑनलाइन फाइलिंग को और अधिक सुचारू बनाया जाए।वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR): मध्यस्थता (Mediation), सुलह (Conciliation) और लोक अदालतों को अधिक बढ़ावा दिया जाए, ताकि छोटे और दीवानी मामलों को अदालत के बाहर ही तेजी से सुलझाया जा सके।समय सीमा का कड़ा निर्धारण: प्रशासनिक स्तर पर पेंडिंग पड़े राजस्व (Revenue), जमीन और पेंशन से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए एक सख्त समय सीमा (Timeline) तय की जाए और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित हो।सरकारी मुकदमों में कमी: चूंकि लंबित मामलों का एक बड़ा हिस्सा खुद सरकार से जुड़े मुकदमों का है, इसलिए प्रशासन को आंतरिक विवादों को आपसी नीतिगत स्तर पर सुलझाने का प्रयास करना चाहिए।एक सजग नागरिक के रूप में हमारा यह मानना है कि एक कुशल, पारदर्शी और त्वरित न्याय प्रणाली ही एक सशक्त लोकतंत्र की असली पहचान है। उम्मीद है कि शासन इस गंभीर विषय पर तात्कालिक और दूरगामी सुधारात्मक कदम उठाएगा।
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