11/12/2025
देहरादून और उत्तराखंड में नया भू-कानून लागू हो गया है, जिसके तहत अब बाहरी लोग 11 पर्वतीय जिलों में कृषि/बागवानी भूमि नहीं खरीद सकते; केवल शहरी क्षेत्रों (नगर निगम/विकास क्षेत्र) में आवासीय/व्यावसायिक जमीन खरीद सकते हैं, और वह भी अधिकतम 250 वर्ग मीटर तक, जिसके लिए शपथ पत्र और कानूनी प्रक्रिया ज़रूरी है, और नियमों का उल्लंघन करने पर जमीन ज़ब्त हो सकती है, साथ ही अब भूमि खरीद-बिक्री की पूरी जानकारी एक भू-पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज होगी।
मुख्य बिंदु:
11 पर्वतीय जिलों में रोक: हरिद्वार और ऊधमसिंहनगर को छोड़कर, उत्तराखंड के बाकी 11 पर्वतीय जिलों में बाहरी लोग कृषि और बागवानी भूमि नहीं खरीद सकते।
250 वर्ग मीटर की सीमा: शहरी क्षेत्रों (नगर निगम/विकास क्षेत्र) में बाहरी व्यक्ति आवासीय उपयोग के लिए अधिकतम 250 वर्ग मीटर (लगभग 300 गज) तक जमीन खरीद सकते हैं, जिसके लिए शपथ पत्र देना होगा और उचित उपयोग न करने पर ज़ब्ती का प्रावधान है।
भूमि पोर्टल: एक नया भू-पोर्टल बनाया जा रहा है, जहाँ सभी भूमि खरीद-फरोख्त का ब्योरा ऑनलाइन दर्ज होगा और निगरानी की जाएगी।
अवैध भूमि ज़ब्ती: भू-कानून का उल्लंघन करने पर देहरादून में भी कई बीघा जमीन ज़ब्त की गई है।
उद्देश्य: इस कानून का मुख्य उद्देश्य राज्य की सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण की सुरक्षा और भू-माफिया पर रोक लगाना है।
उद्योगों और पर्यटन के लिए छूट: थ्रस्ट सेक्टर (उद्योग, अस्पताल, पर्यटन, शिक्षण संस्थान) के लिए भूमि खरीद के नियम अलग हैं, जिसके लिए संबंधित विभागों से अनुमति और भूमि की अनिवार्यता प्रमाण पत्र लेना होगा, और यह अधिकार जिलाधिकारी से शासन को दे दिया गया है।
यह नया कानून उत्तराखंड के मूल निवासियों के हितों की रक्षा के लिए लाया गया है, जिससे जमीन की अनियंत्रित खरीद-फरोख्त पर अंकुश लग सके।