02/05/2026
इक बार मन हुआ कि समंदर को देख लूं।
बाहर से बहुत देखा है अंदर से देख लूं।।
वह समझे मर गया ये साला जान बूझकर।
मैं मोती निकाल लाया हूँ सागर में डूब कर।।
शैलेश कुमार जैन (प्रवक्ता )
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