जो सही सो कही

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इक बार मन हुआ कि समंदर को देख लूं। बाहर से बहुत देखा है अंदर से देख लूं।।वह समझे मर गया ये साला जान बूझकर।मैं मोती निकाल...
02/05/2026

इक बार मन हुआ कि समंदर को देख लूं।

बाहर से बहुत देखा है अंदर से देख लूं।।

वह समझे मर गया ये साला जान बूझकर।

मैं मोती निकाल लाया हूँ सागर में डूब कर।।

शैलेश कुमार जैन (प्रवक्ता )
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16/04/2026
रहना गर पड़ जाए जो, सबल जनों के साथ।हां में हां करते रहो, रहौ जोड़ते हाथ ।।रहौ जोड़ते हाथ रात को रात न कहिए ।जैसे राखै र...
02/03/2024

रहना गर पड़ जाए जो, सबल जनों के साथ।
हां में हां करते रहो, रहौ जोड़ते हाथ ।।
रहौ जोड़ते हाथ रात को रात न कहिए ।
जैसे राखै राम अरे! ताहि विधि रहिए ।।
जो सुख चाहो मित्र! संग धारा के बहना।
दिन को कहिए रात सुखी आजीवन रहना।।

कवि
शैलेश जैन (प्रवक्ता)
एम डी जैन इंटर कॉलेज

जो बंदर के पेट से बच्चा चिपका जाए ।गिरने नहीं दूंगी तुझे मां विश्वास दिलाय ।।मां विश्वास दिलाय भरोसा भी है उसको ।नहीं बग...
10/05/2023

जो बंदर के पेट से बच्चा चिपका जाए ।
गिरने नहीं दूंगी तुझे मां विश्वास दिलाय ।।
मां विश्वास दिलाय भरोसा भी है उसको ।
नहीं बगावत करो समझते हो मां जिसको।।
यही प्रभू के प्रति भाव रखिए अंदर के ।
चिपके रहिए रोज समझ बच्चा बंदर के।।

शैलेश जैन
प्रवक्ता
एमडी जैन इंटर कॉलेज

अति का भोजन क्रोध हो, कामुक बरसे मेह।धन,स्त्री,सुत, संपदा ,से अति का न सनेह।। से अति का न सनेह प्रीत करते सब  थोथी ।परिज...
03/05/2023

अति का भोजन क्रोध हो, कामुक बरसे मेह।
धन,स्त्री,सुत, संपदा ,से अति का न सनेह।।
से अति का न सनेह प्रीत करते सब थोथी ।
परिजन, प्रियवर परख मित्र विपदा में होती।।
बैर,इश्क, अभिमान ,प्रबल कारण दुर्गति का ।
अति की भली न धूप बरसना भला न अति का।।

शैलेश जैन शालीन
प्रवक्ता
एमडी जैन इंटर कॉलेज

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Sadabad
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