18/08/2020
#प्रॉपर्टी खरीदते समय रहें सावधान, वरना खा सकते हैं #धोखा
सम्पत्ति के लेन-देन में लापरवाही या असावधानी की वजह से धोखा खाकर नुकसान हो सकता है। पेश हैं कुछ खास बातें जिन पर ध्यान दिया जाए तो व्यक्ति सम्पत्ति के लेन-देन में कभी धोखा नहीं खाएगा।
#लक्ष्य_का_अभाव
सम्पत्ति खरीदने के पीछे एक मकसद होना चाहिए। क्या आप मकान अपने रहने के लिए खरीद रहे हैं या यह महज निवेश के लिए है, आपके दिमाग में यह स्पष्ट होना चाहिए। इन दोनों में काफी फर्क है। निवेश के लिए आप किसी भी शहर में सम्पत्ति ले सकते हैं लेकिन रहने के लिए नहीं। पैसे कमाने के लिए तो आप कमर्शियल स्पेस में भी दिलचस्पी ले सकते हैं लेकिन सोच-समझ कर निवेश करना ही सही होगा।
#सही_जगह_का_चुनाव
सम्पत्ति कहां ली जाए, इस बारे में ठीक से विचार करके और अपना बजट देख कर ही निवेश करें। एक ही जगह बहुत-सी सम्पत्तियां खरीदने से बचें। जगह ऐसी हो जो आपके माकूल हो यानी अगर वहां आप रहना चाहते हैं तो वहां कैसे लोग रहते हैं वहां क्या सुविधाएं हैं वगैरह बातों का पता लगा लें। अगर आप निवेश के लिए सम्पत्ति खरीद रहे हैं तो देखिए कि उसमें कितने साल में कितनी मूल्य वृद्धि होगी। इसके लिए वहां के भूगोल, इतिहास और संभावित योजनाओं के बारे में पता लगाइए।
#टाइटल_टू_प्रॉपर्टी_चैक_न_करना
जब कोई सम्पत्ति खरीदते हैं तो आपको उसके बारे में पता होना चाहिए कि उसका मालिकाना हक किसके पास है यानी टाइटल किसके पास है। इसके लिए आपको कागजात मांगने चाहिएं। यह भी देखें कि उस बिल्डिंग पर कोई मुकद्दमा वगैरह तो नहीं है। उलझन हो तो किसी विशेषज्ञ या वकील से सलाह लें। सही दस्तावेज से आपका धन सुरक्षित रहेगा क्योंकि भूमि या सम्पत्ति में धोखेबाजी के ज्यादातर मामले पक्के कागजात के अभाव में होते हैं।
#सरकारी_स्वीकृतियों_का_पता_न_करना
अगर आप फ्लैट खरीदने जा रहे हैं तो देखिए कि बिल्डर को निर्माण शुरू करने की स्वीकृति मिली भी है या नहीं। बिल्डर इस बारे में बरगलाने की कोशिश करते हैं। इसके लिए संबंधित विभागों से पता करें और यदि संतोषजनक उत्तर न मिले तो सूचना के अधिकार का सहारा लें। इससे आपको सच पता चल जाएगा।
सरकारी इजाजत कई तरह की होती है जैसे निर्माण शुरू करने के लिए पर्यावरण विभाग की जमीन के दाम का भुगतान वगैरह सभी की जानकारी इकट्ठी कर लेने से आप सुरक्षित रहेंगे। यह जानना भी जरूरी है कि सम्पत्ति का नक्शा पास हुआ है या नहीं। अगर मकान तैयार है तो देखें कि उसे कंप्लीशन सटिर्फिकेट मिला है या नहीं।
#सम्पत्ति_पर_कर्ज
पता करें कि सम्पत्ति पर कोई कर्ज तो नहीं लिया गया है। अगर ऐसा है तो उसके भुगतान की जिम्मेदारी आप पर ही होगी। यह जानना आसान नहीं होगा और इसके लिए काफी मेहनत करनी पड़ सकती है। कई बिल्डरों ने अपने निवेशकों को इस तरह काफी चूना लगाया है। वे सम्पत्ति को गिरवी रख कर कर्ज ले लेते हैं और उसे आगे बेच देते हैं। बाद में निवेशक को वह कर्ज चुकाना पड़ता है।
#बेचने_वाले_की_जानकारी
जिनसे आप सम्पत्ति खरीद रहे हैं वे कैसे लोग हैं यह जानना भी जरूरी है। नामी-गिरामी बिल्डरों से फ्लैट खरीदने पर यही फायदा है कि वहां बहुत बड़ी गड़बडिय़ों की आशंका नहीं होती। किसी बिल्डर से फ्लैट खरीदते वक्त जरूर देखें कि उसने कितने मकान बना कर दिए हैं। इससे उसकी क्षमता का पता चलता है। इसके अलावा कम्पनी की बैलेंस शीट पर भी नजर डालें जिससे उसकी वित्तीय स्थिति का पता चल जाता है।
#धोखेबाज_विज्ञापन
सम्पत्ति के लुभावने विज्ञापन छपते रहते हैं और लोग इनके झांसे में भी आते हैं। इनमें ऐसी चीजें भी दिखाई जाती हैं जो दरअसल वहां होती ही नहीं हैं। फिर कई चीजों पर खर्च करने का मतलब भी नहीं बनता है- मसलन अगर आपको ही नहीं तैरना आता है या आपको इसका शौक नहीं है तो स्विमिंग पूल वाली बिल्डिंग में फ्लैट के लिए अतिरिक्त पैसे देने का फायदा नहीं है। विज्ञापनों में बताए गए घरों में जितनी फिटिंग लगी दिखती है वे आपको मिलेंगी या नहीं यह जानकारी जरूर लें। विज्ञापनों में कई तरह की बातें लिखी होती हैं जिनका बिल्डर से कोई ताल्लुक नहीं होता मसलन वहां से कई साल बाद किसी हाइवे का गुजरना या मैट्रो रेल का आना।
#सैंपल_फ्लैट_का_प्रभाव
ज्यादातर बिल्डर सैंपल फ्लैट से ग्राहकों को प्रभावित करते हैं। इनमें चमक-दमक होती है तथा बेहतरीन फिटिंग और जगह का भी सही इस्तेमाल किया जाता है। बिल्डर बहुत चालाकी से वहां फिटिंग लगाते हैं और बेहतरीन कम्पनियों के सामान दिखाते हैं जबकि मकान देते वक्त वैसा कुछ नहीं होता। इसी तरह सैंपल फ्लैट में कई बिल्डर तय से ज्यादा जगह दिखाते हैं ताकि मकान बड़ा दिखे जबकि हकीकत में ऐसा नहीं होता। वहां बेहतरीन पेंट लगाए जाते हैं ताकि फ्लैटों में खूब चमक हो जबकि बाद में वैसे पेंट इस्तेमाल नहीं होते।
#शुल्क_का_फेर
बिल्डर मकान की कीमत वसूलते वक्त कई तरह के शुल्क लगाते हैं। यह पहले से तय होना चाहिए और आपको सब विस्तार से जान लेना चाहिए। जैसे कि कार पार्किंग, इसी तरह क्लब चार्ज वसूले जाते हैं जबकि कई लोगों को तो क्लब से मतलब ही नहीं होता। कई बिल्डर पार्क फेसिंग के नाम पर ही पैसे वसूलते हैं तो कई गोल्फ कोर्स के नाम पर। ऐसे शुल्क गलत हैं और इनके बारे में आपको पहले से जानकारी होनी चाहिए। सरकार ने बिल्डरों से खरीदे जाने वाले फ्लैट पर जीएसटी लगा दिया है। ज्यादातर बिल्डर इस बारे में बताते नहीं हैं और ग्राहक को धोखे में रखते हैं। कब्जा देने का वक्त आने पर इस बारे में बताते हैं। याद रखें यह टैक्स जरूरी है।
#नियम_कानून_न_जानना
जहां सम्पत्ति खरीदने जा रहे हैं वहां के नियम-कानून के बारे में जानकारी जुटा लें। कई शहरों के कानून अलग होते हैं। हाऊसिंग सोसायटियों के भी अपने नियम होते हैं। सोसायटियों के मकानों में तो उनके बाइलॉज की कॉपी जरूर देखनी चाहिए और बाकायदा एन.ओ.सी. लेनी चाहिए। हिमाचल, जम्मू-कश्मीर तथा गोवा कुछ ऐसे राज्य हैं जहां बाहर वालों के लिए जमीन खरीदने पर कई तरह के प्रतिबंध हैं। इसी तरह झारखंड में आदिवासियों की जमीन खरीदने पर रोक है।
#खतरे_की_घंटी_समझें_यदि...
- अगर विक्रेता पूरा का पूरा पैसा नकद मांग रहा हो।
- सम्पत्ति के मूल दस्तावेज मौजूद न हों।
- दस्तावेजों में किए गए दस्तखतों में फर्क नजर आए।
- सम्पत्ति के दस्तावेज सादे कागज पर हों।
- सौदे के वक्त विक्रेता मौजूद न हो।
- सम्पत्ति गिरवी रखी गई हो या उस पर कोई मुकद्दमा चल रहा हो।
- सम्पत्ति कर, बिजली का बिल, पानी का बिल जैसी चीजों का भुगतान रुका हो।
- सम्पत्ति पर विक्रेता के अलावा किसी और का कब्जा हो।
क्या आप जानते हैं कि...
- प्रॉपर्टी के मालिक के लिए रजिस्ट्री के दस्तावेजों पर अपना फोटो लगाना जरूरी है।
- दोनों पक्ष एक-दूसरे की मौजूदगी में रजिस्ट्री के दस्तावेजों पर दस्तखत करते हैं।
- किसी सर्टिफाइड प्रोफेशनल ब्रोकर या अच्छी साख वाले रियलिटी एक्सपर्ट की सेवाएं लेकर इन खतरों से बचा जा सकता है।