05/09/2023
समाज के निर्माण में शिक्षकों का महत्वपूर्ण रौल पूर्व प्रधानाध्यापक रूप नारायण मिश्र
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बिहार की आवाज न्यूज नेटवर्क संपादक उत्कर्ष सिंह मोनू की रिपोर्ट
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1964 में ही नवाब हाई स्कूल में शिक्षक के पद पर योगदान देने वाले रुप नारायण मिश्र ने शिक्षक दिवस पर दिया संदेश
शिवहर-प्रख्यात शिक्षाविद् महान दार्शनिक व विचारक भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिवस के अवसर पर मनाए जाने वाले शिक्षक दिवस पर शिवहर नवाब हाई स्कूल के पूर्व प्रभारी प्रधानाध्यापक रूप नारायण मिश्र ने शिवहर जिले वासियों को बधाई एवं शुभकामनाएं दी है आर डी एस कॉलेज मुजफ्फरपुर से ग्रेजुएशन तथा कॉमर्स एवं अर्थशास्त्र से मिथिला यूनिवर्सिटी से एमए की शिक्षा प्राप्त करने वाले पूर्व प्रधानाध्यापक रूपनारायण मिश्र ने राष्ट्रीय सहारा न्यूज़ नेटवर्क के टीम को बताया है कि शिक्षकों की गरिमा स्थापित होना चाहिए
उन्होंने बताया है कि मेरे जमाने में शिक्षकों के द्वारा विद्यार्थियों के प्रति काफी सहानुभूति रहती थी। बच्चे विकास कैसे करें,बच्चों का शिक्षण व्यवस्था कैसे सुदृढ़ हो, एक अध्यापक को समाज एवं प्रशासन ने अधिकार दिया है कि वे अपने छात्र के जीवन में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से हस्तक्षेप करें ,विद्यार्थियों को भविष्य के सपने दिखाए और उसमें निहित क्षमता को समृद्ध कर उन सपनों को साकार करने के लिए तैयार करें पूर्व प्रधानाध्यापक श्री मिश्रा ने अपने विद्यालय व समाज के बच्चों के साथ-साथ अपने बच्चों के भी उच्च तामिला दी, इसी कारण उनके बड़े पुत्र कमिश्नर इनकम टैक्स मुंबई में कार्यरत है तथा दूसरे पुत्र मुंबई की एक कॉलेज के प्रोफेसर है, 4 पुत्री ग्रेजुएशन कर अच्छे पदों पर कार्य कर रही है उनकी पत्नी नीलिमा मिश्रा कुशहर मिडिल स्कूल के प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत हो चुकी है उन्होंने कहा है कि शिक्षा नीति 2020 के महत्वाकांक्षी स्वप्न को सकार देने के लिए अध्यापकों की स्थाई व्यवस्था जरूरी है अतीत को याद करते हुए पूर्व प्रधानाध्यापक रूप नारायण मिश्र ने कहा है कि पहले एक गुरु मानसिक और व्यावहारिक रूप से दूसरे की भलाई करने वाले और भविष्य का नजरिया रखने वाले इंसान के रूप में प्रतिष्ठित था विद्यार्थी का प्रेरणा स्रोत और ऐसा हितैषी था जो उसे सत्य पथ पर जाने की राह दिखाता था उन में चरित्र निर्माण करते वे एक अच्छा मनुष्य और देश का अच्छा नागरिक बनाना उसका कर्तव्य था उन्होंने कहा है कि आज के जमाने में नैतिकता और शिक्षण प्रक्रिया के संबंध को न्याय और ईमानदारी की भावना से स्थापित करना आवश्यक हो गया है सामाजिक मूल्य और मानकों का पालन, गुणवत्तापूर्ण सीखने की प्रक्रिया, छात्रों की आवश्यकताओं को जानकर ईमानदार और न्यायपूर्ण समाधान आज की सबसे बड़ी चुनौती हो गई है उन्होंने कहा है कि सरकार प्रशासन व समाज को शिक्षकों के प्रति वह सम्मान करना चाहिए ताकि वे छात्रों को प्रेरणा का स्रोत बन सके शिक्षक ही घर ,परिवार, समाज के साथ साथ देश का निर्माण कर सके और बच्चों के भविष्य को राह दिखा सके