08/12/2025
भ्रष्टाचारी या धर्मपरायण,,,,
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राजनीतिक जीवन स्वतः कई कठिनाइयों से भरा हुआ होता है स्वाभाविक रूप से आप राजनीतिक व्यक्तियों को कई रोगों का शिकार होते हुए देखते होंगे जिनमें शुगर,कमर दर्द, ब्लडप्रेशर तो आम तरह से होते ही हैं कारण असमय भोजन दिनचर्या का कोई ठोर ठिकाना नहीं कब सोना है और कब जागना है इसका कोई अता पता नहीं परिवार के लिए समय होता ही नहीं बस जनता जनार्दन की सेवा और उनके कार्यों संपर्कों में ही समय निकल जाता है खैर हर राजनीतिक सफल भी नहीं होता सफल होने का अनुपात भी लगभग 10% ही रहता है और जो राजनेता सफलता प्राप्त कर लेता है उसका जीवन और दुर्लभ हो ही जाता है कारण साफ है असफल होने का डर,,,
देखिए पूरे जनपद में ऐसे कई राजनेता हैं जो दूसरी बार लगातार एक ही दल से जीत कर विधानसभा पहुंचे हैं और उनमें सबसे अधिक चर्चित हैं सेउता विधायक श्री ज्ञान तिवारी जी जो सदैव अपने क्षेत्र में अपने कार्यकर्ताओं और जनता जनार्दन के हित को साधते रहते हैं और हां वे सम्पूर्ण देश में इकलौते धर्मपरायण विधायक भी हैं उन्होंने "चार साल चार धाम" में सफल भगवत कथा का आयोजन करवाकर गांजर जैसे इलाके के हजारों लोगों के उस स्वप्न को पूरा किया है जो उन व्यक्तियों के साथ साथ उनके पूर्वज भी देखते चले आ रहे थे ये लगातार चारों वर्षों हुआ है और चौथे चरण में इस समय द्वारकाधीश में कथा चल भी रही है अब वे हुए नहीं क्या धर्मपरायण खैर,,,
वैसे दूसरी तरफ डॉक्टर बृजबिहारी जी जिन्होंने सम्पूर्ण जीवन संघर्षों में बिताया वो भी दलितों वंचितों और उस जनता के लिए जो दबी कुचली हुई रही वैसे डॉक्टर साहब का विवादों से भी बड़ा पुराना रिश्ता रहा है वे प्रकांड विद्वान हैं ज्ञाता हैं और हर विषय वस्तु पर उनकी जमीनी पकड़ है आज कल वे अत्यधिक चर्चा में भी हैं पर मेरी एक बात समझ नहीं आती वे भगवत द्रोही क्यों हैं? इतने विद्वान व्यक्ति के मन में भगवान के लिए इतना विष क्यों? खैर इस समय उनका एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें उन्होंने ज्ञान तिवारी जी पर निशाना साधा है भ्रष्टाचार को लेकर बड़बोलापन को लेकर पर डॉक्टर साहब अभी तक गैर राजनीतिक रूप से एक प्लेटफार्म पर कार्य कर रहे थे परन्तु अब वे कांग्रेस के बैनर तले सम्पूर्ण राजनीतिक रूप में कार्य कर रहे हैं और कांग्रेस की जनपद की रीति नीति में उनका पूर्ण योगदान भी रहता है वैसे अगर कहा जाए तो वो ही पूरे विपक्ष का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं पर आरोप प्रत्यारोप अलग की बात है पर जो सत्य है वो दिखता ही है,,,
अब आप सब ही बताएंगे कौन सही और कौन गलत पर मैं तो कहूंगा कि शब्दों की मर्यादा बनाए रखना तो सभी के लिए जरूरी है वैसे जनपद के प्रबुद्ध वर्ग से मुझे उम्मीद है वो मेरा मार्गशन अपनी बेवाक टिप्पणी से अवश्य देंगें,,,