30/07/2026
Pawan Das is Live Spritual Page
पांचो चोरो से बचकर भक्ति बचानी है काम ,क्रोध,लोभ ,मोह ,अहंकारध्रुव प्रह्लाद कहां पार हुए, एक कल्प के बाद वो भी जन्म मरण में आएंगे ।
- वाणी = जट कुंडल ऊपर आसन है सतगुरु कि सैल सुनो भाई जहां ध्रुव प्रह्लाद नहीं पहुंचे सुखदेव को मार्ग ना पाई ।
आदरणीय गरीब दास जी ने अगर ये कहा है कि - डेरे डांडै खुश रहो...
तो यह भी तो कहा है - यहां आवण जाण बखेडा अडै कोण बसावै खेडा ।
- डेरे डांडै वाली वाणी उनके लिए कही गई है जो संन्यासी है (जो घर बार त्याग कर जंगल में चले जाते हैं भगवान पाने के लिए) उनके लिए कहा गया है कि तुम्हीं कहते हो कि ध्रुव प्रह्लाद पार हो गए (उन्होंने तो घर नहीं छोड़ा, वो थो नहीं तुम्हारे तरह जंगलों में नहीं भटके) वो पार हो गए तो तुम क्यों संन्यासी बने फिरते हो (यानि गृहस्थ रहकर भक्ति करो)
- गुरु जी ने सत्संग में बताया है कि गृहस्थ केवल वो नहिं होता जिसने शादी करवाई हुई है वो भी होता है अपने घर के काम काज में व्यस्त रहता है)
और विवाह के लिए पहले बता दिया है - यहा आवण जाण बखैडा अडै कोण बसावै खेड़ा । सबने ठेका थोड़ी ले रखा है बच्चे पैदा करने का करने वाले करेंगे सभी का मोक्ष इसी समय में थोडी होना है ।
गुरु जी कहते हैं कि तुम सतलोक निर्विकार (24 carat) का सोना बनके हि जा सकते हो और जो भक्त अभी भी दुराचार (s*x) करते हैं या गंदे विचार रखते हैं उनके लिए क्या कहा है -
आदरणीय गरीब जी कि वाणी है -
।। योग करै पर भोग न छोडै पांच पचिस न घर से काडै जिनके है कच्चे बारांह (12) ।।
भक्ति भी करते हैं और भोग (दुराचार - S*X) भी करते हैं, जो काम क्रोध मोह लोभ अंहकार का त्याग नहीं करते, वो तो काल के लोक में जन्मेंगे और मरेंगे ।
कामी क्रोधी लालची इनपै भक्ति न होय भक्ति करै कोए सुरमा जाति वर्ण कुल खोए :-
जो कामवासना (दुराचार - s*x) , क्रोधी तथा लोभ-लालची प्राणी भक्ति नहीं कर सकता अर्थात उसकी भक्ति अंत:कर्ण में जमा हि नहीं होगी वो ये गंदे कर्म करके अपनी भक्ति नष्ट करता रहेगा, भक्ति तो कोई सुरमा आत्मा (सुरमा) से तात्पर्य है जो 5 विकारों पर विजय पा लें, जाति धर्म लोकलाज सब त्याग दें उन्हें हरा दें वो आत्मा भक्त कहलाती है और वही सतलोक कि अधिकारी है ।
इसलिए ज्ञान को आधार बनाए दुराचार त्यागे और निर्विकारी हंस बने
सतलोक मुहिम (सतगुरु रामपाल जी (कल्की भगवान) का यथार्थ 13वां पंथ (गुप्त मिशन) साध संगति)
जहां से आत्माएं सतलोक के लिए तैयार हो रहीं हैं ।
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