29/01/2026
दिल्ली को सोनीपत, पानीपत और करनाल से जोड़ने वाली बहुप्रतीक्षित दिल्ली–पानीपत–करनाल नमो भारत (RRTS) हाई-स्पीड रेल परियोजना अब कागजों से निकलकर जमीनी स्तर पर उतरने लगी है। पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) से मंजूरी मिलने के बाद नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) ने दिल्ली सेक्शन में कश्मीरी गेट से भलस्वा तक इलेक्ट्रिकल यूटिलिटी शिफ्टिंग का पहला बड़ा तकनीकी टेंडर जारी कर दिया है। इस कार्य के लिए फंड भी रिलीज कर दिया गया है, जिससे निर्माण प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत मानी जा रही है।
इस हाई-स्पीड रैपिड रेल कॉरिडोर के शुरू होने से यात्रा समय में बड़ी कटौती होगी। सराय काले खां से करनाल का सफर करीब 90 मिनट में पूरा हो सकेगा, जबकि दिल्ली से मुरथल की दूरी लगभग 30 मिनट में तय होने की उम्मीद है। परियोजना के पूरा होने के बाद सोनीपत सेक्शन में ट्रैफिक जाम, वायु प्रदूषण और निजी वाहनों पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।
PIB से हरी झंडी मिलने के बाद यह आरआरटीएस परियोजना का पहला प्रमुख तकनीकी टेंडर है। इससे साफ संकेत मिलता है कि नमो भारत कॉरिडोर अब केवल प्रस्तावित योजना नहीं रहा, बल्कि एक सक्रिय निर्माण परियोजना के रूप में आगे बढ़ चुका है।
सोनीपत सेक्शन पर सबसे पहले दिखेगा असर
इस रैपिड रेल कॉरिडोर का सबसे ज्यादा प्रभाव हरियाणा के सोनीपत जिले में देखने को मिलेगा। आरआरटीएस रूट को एनएच-44 के समानांतर विकसित किया जाएगा, जिससे कुंडली, बहालगढ़, मुरथल, बरही और गन्नौर जैसे इलाकों में आवागमन की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। फिलहाल दिल्ली–सोनीपत के बीच रोजाना लंबे जाम से जूझने वाले यात्रियों को एक तेज़, सुरक्षित और भरोसेमंद परिवहन विकल्प मिल सकेगा।