Rahul Shrimali - BJP

Rahul Shrimali - BJP जय हो

पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक आदरणीय गुलाब जी भाई साहब से दिवाली के दिन मिलना हुआ और भाई साहब को दिवाली कि बधाई...
24/10/2025

पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक आदरणीय गुलाब जी भाई साहब से दिवाली के दिन मिलना हुआ और भाई साहब को दिवाली कि बधाई और शुभकामनायें प्रेषित कि 💐🙏🙏🙏

दिवाली पर उदयपुर कि खूबसूरती देखने लायक थी 💐💐
24/10/2025

दिवाली पर उदयपुर कि खूबसूरती देखने लायक थी 💐💐

जय मेवाड़ जय एकलिंगनाथ श्री जी हुजूर महाराज डॉ लक्ष्यराज सिंह जी मेवाड़ से मिलना भी किसी सपने से कम नहीं बचपन से महाराणा प...
24/10/2025

जय मेवाड़ जय एकलिंगनाथ
श्री जी हुजूर महाराज डॉ लक्ष्यराज सिंह जी मेवाड़ से मिलना भी किसी सपने से कम नहीं बचपन से महाराणा प्रताप कि कहानियाँ सुनी उनकी कहानियाँ सुनते हुए बड़े हुए फिर शाखा में जाते थे तो जय राणा प्रताप कि जय शिवा सरदार कि...
यह घोष लगाते थे और ज़ब महल में मेवाड़ राजपरिवार से मिलना हुआ तो यही लगा जैसे बरसो से इस परिवार से जुड़े हुए है और यह परिवार और महल हमसे अलग नहीं है 🙏🙏🙏
आपसे फिर कभी मिलेंगे जब मेरे आराध्य प्रभु श्री एकलिंगनाथ का आदेश होगा तब 💐💐🙏🙏
मेरे और इस राज परिवार कि बीच कि सबसे बड़ी कड़ी हमारे मेवाड़ के नाथ प्रभु श्री एकलिंगनाथ है 💐💐💐🙏🙏🙏🙏
Lakshyaraj Singh Mewar

24/10/2025

जय मेवाड़ जय एकलिंगनाथ 💐🙏

धन्यवाद 💐🙏
04/05/2025

धन्यवाद 💐🙏

जीवन मे सादगी और सरलता देखनी हो तो हमारे मेवाड़ के कुँवर लक्ष्यराज जी को देखे यह कही भी आराम से बेठ जाते है महाराणा प्रता...
14/02/2024

जीवन मे सादगी और सरलता देखनी हो तो हमारे मेवाड़ के कुँवर लक्ष्यराज जी को देखे यह कही भी आराम से बेठ जाते है महाराणा प्रताप भी ऐसे ही सबके साथ बैठते होंगेl
जय मेवाड़ जय एकलिंगनाथ🚩🚩🚩🚩
Lakshyaraj Singh Mewar

🚩🚩जय श्री राम 🚩🚩
11/02/2024

🚩🚩जय श्री राम 🚩🚩

02/11/2023

डॉ सीपी जोशी जी
V/S
विश्वराज सिंह जी

कोहली-राहुल की 'CLASS' पारियों ने ऑस्ट्रेलिया को दी पटखनी, भारत ने जीत से किया आगाज
09/10/2023

कोहली-राहुल की 'CLASS' पारियों ने ऑस्ट्रेलिया को दी पटखनी, भारत ने जीत से किया आगाज

01/10/2023

रूस और यूक्रेन के बम भी फुस्सी ही निकले...
पिछले 18 महीने से फोड़े जा रहें हैं लेकिन
आज तक न वातावरण प्रदूषित हुआ,..ना किसी बॉलीवुड सेलिब्रिटी को अस्थमा हुआ ......
और
ना ही अंटार्कटिका की बर्फ पिघली...!
इससे ज्यादा शक्तिशाली तो हमारे दीपावली के पटाखे होते हैं !
समूची पृथ्वी खतरे में पड़ जाती है...😅😊

मेरा बेटा अमेरिका में बेटी ऑस्ट्रेलिया में है ऐसा दम्भ भरने वाले अक्सर वृद्धाश्रम या सुनसान जिन्दगी जीते  मिलते है---!!!...
22/09/2023

मेरा बेटा अमेरिका में बेटी ऑस्ट्रेलिया में है ऐसा दम्भ भरने वाले अक्सर वृद्धाश्रम या सुनसान जिन्दगी जीते मिलते है---!!!
Everyone
#परिवारजन
#परिवार

आज से 100 वर्ष पहले  की सावलिया सेठ  के दर्शन।।भगवान श्री सांवलिया सेठ का संबंध मीरा बाई से बताया जाता है। किवदंतियों के...
22/09/2023

आज से 100 वर्ष पहले की सावलिया सेठ के दर्शन।।
भगवान श्री सांवलिया सेठ का संबंध मीरा बाई से बताया जाता है। किवदंतियों के अनुसार सांवलिया सेठ मीरा बाई के वही गिरधर गोपाल है जिनकी वह पूजा किया करती थी। मीरा बाई संत महात्माओं की जमात में इन मूर्तियों के साथ भ्रमणशील रहती थी। ऐसी ही एक दयाराम नामक संत की जमात थी जिनके पास ये मूर्तियां थी
एक बार जब औरंगजेब की मुग़ल सेना मंदिरों को तोड़ रही थी। मेवाड़ राज्य में पंहुचने पर मुग़ल सैनिकों को इन मूर्तियों के बारे में पता लगा। तब संत दयाराम जी ने प्रभु प्रेरणा से इन मूर्तियों को बागुंड-भादसौड़ा की छापर (खुला मैदान) में एक वट-वृक्ष के नीचे गड्ढा खोद कर पधरा दिया और फिर समय बीतने के साथ संत दयाराम जी का देवलोकगमन हो गयाकालान्तर में सन 1840 में मंडफिया ग्राम निवासी भोलाराम गुर्जर नाम के ग्वाले को एक सपना आया कि भादसोड़ा-बागूंड के छापर में 4 मूर्तियां ज़मीन में दबी हुई है, जब उस जगह पर खुदाई की गई तो भोलाराम का सपना सही निकला और वहां से एक जैसी 4 मूर्तियां प्रकट हुईं। सभी मूर्तियां बहुत ही मनोहारी थी।देखते ही देखते ये खबर सब तरफ फ़ैल गई और आस-पास के लोग प्राकट्य स्थल पर पंहुचने लगे। फिर सर्वसम्मति से चार में से सबसे बड़ी मूर्ति को भादसोड़ा ग्राम ले जाई गई, भादसोड़ा में प्रसिद्ध गृहस्थ संत पुराजी भगत रहते थे। उनके निर्देशन में उदयपुर मेवाड़ राज-परिवार के भींडर ठिकाने की ओर से सांवलिया जी का मंदिर बनवाया गया। यह मंदिर सबसे पुराना मंदिर है इसलिए यह सांवलिया सेठ प्राचीन मंदिर के नाम से जाना जाता है।मंझली मूर्ति को वहीं खुदाई की जगह स्थापित किया गया इसे प्राकट्य स्थल मंदिर भी कहा जाता है। सबसे छोटी मूर्ति भोलाराम गुर्जर द्वारा मंडफिया ग्राम ले जाई गई जिसे उन्होंने अपने घर के परिण्डे में स्थापित करके पूजा आरंभ कर दी। चौथी मूर्ति निकालते समय खण्डित हो गई जिसे वापस उसी जगह पधरा दिया गया।

कालांतर में सभी जगह भव्य मंदिर बनते गए। तीनों मंदिरों की ख्याति भी दूर-दूर तक फै ली। आज भी दूर-दूर से लाखों यात्री प्रति वर्ष श्री सांवलिया सेठ दर्शन करने आते हैं। सांवलिया सेठ के बारे में यह मान्यता है कि नानी बाई का मायरा करने के लिए स्वयं श्री कृष्ण ने वह रूप धारण किया था। व्यापार जगत में उनकी ख्याति इतनी है कि लोग अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए उन्हें अपना बिजनेस पार्टनर बनाते हैं।






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