05/06/2025
जैसे ही पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया प्लेटफार्म को सर्च किया तो बहुत तेजी के साथ वायरल हुआ तरुण आचार्य #कौनहै Tarun Acharya और इस के साथी क्यों यह जनता के हितों के लिए लड़ाई लड़ने रहे दोस्तों जिस परिवार की पृष्ठभूमि संघर्ष की रही है जिस परिवार की पृष्ठभूमि जनता की सेवा की रही है जिस परिवार की पृष्ठभूमि राजनीतिक रही है जिस परिवार की पृष्ठभूमि में जनता के संघर्षों को सड़क पर लड़ने की परंपरा रही है जिस पृष्ठभूमि से तरुण आचार्य आते हैं जहाँ से स्वतन्त्रता संग्राम सेनानी स्व:पंडित श्री मुरली मनोहर जी आचार्य बड़नगर की राजनीति का एक जाना पहचाना चेहरा स्व:श्री रविंद्र आचार्य और नगर पालिका परिषद में दूसरी बार पार्षद श्रीमती मंजू आचार्य के सुपुत्र हैं वर्तमान में नगर पालिका द्वारा नामांतरण प्रकरणों को पिछले कई माह से निपटाया नहीं जा रहा है और बिना वजह नामांतरण प्रकरणों को लंबित रखा जा रहा है इसी बात को लेकर के पूरे नगर में आक्रोश पैदा होता जा रहा था लेकिन राजनीति की बिसात पर सत्ता के खिलाफ संघर्ष करने का साहस बड़नगर में किसी भी व्यक्ति के सामने नहीं आ रहा था ऐसी स्थिति में तरुण आचार्य एवं विपक्षी दलों के पार्षदों द्वारा इस मुद्दे को बड़ी ही गंभीरता के साथ उठाया गया और इस संघर्ष को सड़कों पर लाया गया जिसकी परिणीति यह रही कि नगर पालिका अध्यक्ष एवम सभापति द्वारा 10 जून तक का समय दिया है कि 10 जून तक नामांतरण के प्रकरणों को निपटा देंगे कल्पना कीजिए कि जिन्होंने नामांतरण करने के लिए आवेदन दिए हैं वह नौ नौ दस दस महीने तक नामांतरण के लिए अटके हुवे हैं ऐसे प्रकरण जिनमें कोई विवाद नहीं है ऐसे प्रकरण जो सीधे सरल और सपाट होते हैं ऐसे प्रकरणों में नामांतरण की प्रक्रिया को लचीला बनाया जाना चाहिए लेकिन यह विसंगति पूर्ण है कि हमारे यहां नामांतरण की प्रक्रिया को इतना जटिल बना दिया जाता है कि मजबूरन व्यक्ति को रिश्वतखोरी का सहारा लेना पड़ता है और रिश्वतखोरी भी छोटे-मोटे पैसों की नहीं होती है इस बात से नगर की सक्रिय और भोली भाली जनता भी बखूबी वाकिफ है अगर नामांतरण की प्रकरण इसी प्रकार लटकते रहेंगे तो रिश्वतों का कालाबाजारी का बाजार बहुत तेजी के साथ बढ़ेगा नगर पालिका अध्यक्ष को इस बात के लिए ध्यान रखना चाहिए कि जो प्रकरण विवादास्पद नहीं है ऐसे प्रकरणों जो शीघ्र ही निपटाने वाले हैं ऐसे प्रकरणों को शीघ्र निपटाया जाए बड़नगर की जनता को याद है कि जब नगर पालिका में समय नामांतरण के प्रकरणों को त्वरित कार्रवाई के साथ निपटाया जाता था और कई कई बार तो ऐसे भी प्रकरण सुनने में आए हैं कि जिन लोगों के नामांतरण बिना विवाद के होते थे उनके नामांतरण समय सीमा के अंदर पूर्ण करके उनको नामांतरण के प्रमाण पत्र सौंप दिए गए हैं क्या जो काम नगर पालिका में पूर्व में होता था वह अभी नहीं हो सकता आज नगर निगम इंदौर में नामांतरण की प्रक्रिया को इतना सरल बनाया गया है कि आपको नामांतरण को लेकर के इंतजार करने की जरूरत नहीं पड़ती क्या यह कार्रवाई नगर पालिका बड़नगर नहीं कर सकती इन्हीं सब बातों को लेकर के तरुण आचार्य संघर्ष की राह पर आ चुके हैं निश्चित रूप से वे विपक्ष का एक ऐसा चेहरा बनकर सामने आये है जो आम जनता की आवाज को लोगों के सामने ले जाने का साहस रखता है इसी संघर्ष को लेकर के पूर्व में भी नगरपालिका में विवाद हुए थे लेकिन वह विवाद किसी और घटना के साथ जोड़ दिए जाने के कारण उन सभी मुद्दों का पटाक्षेप कर दिया गया इसी प्रकार पुन: यह संघर्ष हमारे सामने आ रहा है बरसात सामने खड़ी है नालियों की गटरों की सफाई नहीं हो रही है मच्छर बहुत अधिक फैल रहे हैं ऐसी स्थिति में अगर सत्ताधारी सत्ता का सुख भोगने में तल्लीन है तो विपक्ष को संघर्ष की भूमिका में आना ही पड़ेगा और तरुण आचार्य,विजयंतसिंह गोसर,कुशल गहलोत जैसे जनता के कार्यकर्ता की जिम्मेदारी ज्यादा बढ़ जाती है और इन्हीं जिम्मेदारियां को पूर्ण करने के लिए यह लोग संघर्ष की राह को पकड़ चुके हैं कहीं ऐसा ना हो कि यह पार्षदों का संघर्ष धीरे-धीरे नगर में जन आक्रोश बन जाए नगर पालिका को इस बात का ध्यान रखना पड़ेगा कि उनकी प्रतिबद्धता नगर की जनता के और नगर की जनता के हितों के साथ जुड़ी हुई है वह स्वयं के हितों का ध्यान न रखते हुए नगर के हितों का ध्यान रखें या नगर पालिका के लिए भी अच्छा होगा यह एक बड़े संघर्ष की शुरुआत है नगर पालिका चाहे तो इसे यहां पर रोक सकती है भाई Er Vijayant Gosar Kusal Gehlot और तमाम संघर्ष के साथियों को बहुत-बहुत साधुवाद जो उन्होंने नगर के हित में इस संघर्ष को उठाया।