15/12/2016
बड़े से लेके छोटे व्यापारी में चर्चा स्पद यह है क़ी
मार्केटिंग और सेल्स
एक ही तो बात है ! इस में कौन सा बड़ा फर्क है !
हालांकि ऐसा नहीं है ! दोनों शब्दो का लक्ष्य एक ही हे
पर कार्य प्रणाली अलग हे !
मार्केटिंग
यह पद्धति सर प्लानिंग से और उस प्लानिंग का अम्लीकरण से ,जिनका दाइत्व पैठी या कम्पनी पर रहता है ।
इन कार्यो का मुलभुत हेतु , उत्पादक मतलब बे च नार और खरीद नार को जोड़ ना हे !
जबकी सेल्स ओनली सेल्स
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दो पैठी ,या दो व्यक्ति , को व्यापार के माध्यम से जोड़ ने का एक सामान्य प्रयास है ।
दो पैठी के बीच मॉल की गुणवत्ता एवं भाव का सौदा तय हो जाए फिर जो सेल्स की प्रकिया होती है वः सेल्स
मार्केटिंग का माप दंड का फिल्ड व्यापक रहता है और यह सतत कार्य शील रहने वाली प्रक्रिया हे।जिस में परिणाम दूरगामी रहता है !
तुरत परिणाम कताही नहीं मिलता
तुरन्त परिणाम सेल्स में ही मिलता है
क्योंकि ग्राहक की मांग पर आप ग्राहकों की आवश्यकता अनुसार प्रोडक्ट बना के देदो , आप का सेल्स हो जाता है !
पर इनका रेवन्यू आपको आगे मिलेगा की नहीं इस की कोई गेरंटी नहीं है !
क्यंकि आप सिर्फ सेल्स पे फॉक्स करते हो
ग्राहक पे नहीं
यही पे अगर थोड़ा मार्केटिंग टच दे दो तो , वः ग्राहक आपसे सालो तक जुड़ा रहेगा
अहम बात यही है , ग्राहक की संतुष्टि सर्वपरि हे !
आप ने मॉल बेच दिया
रुपिया आप की जेब में आ गया ,पर ग्राहक को क्यों नाराजगी हे ,वः जानने की कोशिश नही की , क्यों की आप यह समझ ते हो की आना हो गा ,आएगा , नहीतो उनकी मर्जी !
यही होता है , आम तौर पर , आप देखो मार्केट में हजारों लाखों , कारोबारी यो का कारोबार तो पैठी दर पैठी से हे ! पर ज्यो का त्यों हे , क्यों वः कॉर्पोरेट क्यों नहीं बन पाए !?????
अहंकार !!!!
अपने ही ग्राहक से अहंकार ! जिस से व्यापार करके ,आप सेल्स जुटा ते हो , मुनाफा जुटा ते हो !
हम आपको हाजी !!! हाजी !!! करने को नही कहते !
पर एक रीत हे !