27/04/2023
आंनद मोहन नाम के ख़ूँख़ार अपराधी जिसने DM की हत्या के जुर्म में फाँसी की सज़ा पाई, उसे बिहार सरकार ने जाति विशेष को ख़ुश करने के लिए क़ानून बदल कर छोड़ दिया। और मीडिया उसके ख़िलाफ़ बोलने की जगह, आंनद मोहन का लगातार PR कर रही है। उसके तारीफ़ में क़सीदा लिख रही है।
वहीं मुख़्तार अंसारी जिनके ऊपर एक भी जुर्म आज तक साबित नहीं हुआ, कोई सज़ा नहीं हुई, उन्हें उल्टे सीधे अल्फ़ाज़ से ख़िताब कर रही है। यही मीडिया ट्रायल उन्होंने अतीक अहमद के साथ किया। एक जुर्म उन पर साबित नहीं हुआ था, तब भी ज़बरदस्ती उनका Character assassination किया और जिसके बाद एक अपहरण मामले में उन्हें सज़ा हुई। ज़बरदस्ती Character Assassination से भी जी न भरा तो पुलिस की गिरफ़्त में पाँच बार के विधायक और एक बार के सांसद और उनके भाई जो ख़ुद एक बार का विधायक है, को हथकड़ी लगे हुए, एक ख़ास मज़हबी नारे के साथ मीडिया के रूप में अपराधियों से मरवा दिया।
जब मामला मुसलमान का होता है तो बिना किसी ट्रायल और सबूत के उन्हें माफिया और न जाने क्या बोल दिया जाता है। जबकि इनके स्वजातीय होते हैं तो पूर्व सांसद शब्द का उपयोग होता है, जबकि वो अदालत से सज़ायफ़्ता होते हैं। उदाहरण सूरजभान सिंह जो पूर्व सांसद हैं, बीजेपी के गठबंधन वाली LJP के 2021 में अध्यक्ष भी रहे। एक मंत्री बृज बिहारी प्रसाद के क़त्ल के इल्ज़ाम में क़ैद हुए। सज़ा पाई। लेकिन आज कल जेल के बाहर आराम से घूम रहे। केंद्र के बड़े बड़े मंत्री के साथ डाइस शेयर करते हैं। फिलहाल चुनाव लड़ने पर लगी हुई है रोक, इस वजह कर पहले पत्नी को मुंगेर से लोकसभा का चुनाव लड़वाया और अब भाई नवादा से एमपी हैं। मजाल है कोई इन पर एक शब्द बोल दे।
पप्पू यादव पर विधायक अजीत सरकार के क़त्ल का इल्ज़ाम रहा है।
मोकामा के पूर्व विधायक अनंत सिंह पर भी चुनाव लड़ने पर रोक लगी हुई है, क्यूँकि उन्हें एके-47 और हैंड ग्रेनेड रखने के मामले में एमपी-एमएलए कोर्ट ने 10-10 साल की सजा सुनाई थी, अब उनकी जगह उनकी पत्नी विधायक हैं। इन्हें मीडिया माफिया या डॉन कहने की जगह छोटे सरकार लिखती है।
यही हाल कुंडा के राजा भैया का है, DSP हत्याकांड से लेकर न जाने किन किन अपराध में उनका नाम नही आता है। गुंडा माफ़िया कहने की जगह मीडिया बाहुबली शब्द का इस्तेमाल करती है।
हम यहाँ लोगों में तुलना नहीं करना चाहते हैं, पर मीडिया धर्म देखकर जिस तरह रियेक्ट कर रहा, वो खुले तौर पर समुदाय विशेष के ख़िलाफ़ मीडिया द्वारा छेड़ी गई जंग है। क्यूँकि यही वो मीडिया है जो बिश्नोई जैसे बड़े गैंगेस्टर का इंटरव्यू लाइव चलाती है।